Climate Change: हिमालय में तेजी से ऊपर खिसक रहे पौधे, बदल रही हरियाली की सीमा
Gaon Connection | Apr 14, 2026, 17:11 IST
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर की हालिया अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के चलते हिमालय के पौधे तेजी से ऊँचाई की ओर बढ़ रहे हैं। तापमान में बढ़ोतरी और बर्फ की कमी के कारण वनस्पति की सीमा में बदलाव आ रहा है। यह परिवर्तन जैव विविधता, जल स्रोतों और आसपास के समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
हिमालय में बदल रही हरियाली की तस्वीर
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के वैज्ञानिकों ने हिमालय के छह इलाकों, लद्दाख से लेकर भूटान तक, का एक अहम अध्ययन किया है। इस शोध में इन क्षेत्रों के बारे में गहराई से जानकारी जुटाई गई है। इस अध्ययन का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर विश्वविद्यालय ने किया। इसमें हिमालय के छह अलग-अलग हिस्सों का बारीकी से विश्लेषण किया गया। ये इलाके लद्दाख से शुरू होकर भूटान तक फैले हुए हैं। वैज्ञानिकों ने इन सभी क्षेत्रों की विशेषताओं को समझने की कोशिश की।
नई रिसर्च के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में पौधे तेजी से ऊंचाई की ओर खिसक रहे हैं। तापमान बढ़ने और बर्फ की परत कम होने से वनस्पति की सीमा ऊपर जा रही है, जिससे पूरे इकोसिस्टम में बदलाव देखने को मिल रहा है। यह बदलाव न केवल जैव विविधता बल्कि जल स्रोतों और स्थानीय जीवन पर भी असर डाल सकता है।
जलवायु परिवर्तन का असर अब हिमालय की ऊंचाइयों पर साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में सामने आई एक स्टडी के अनुसार, पहाड़ों पर उगने वाले पौधे धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसक रहे हैं। पहले जहां बर्फ और कठोर परिस्थितियां थीं, अब वहां पौधों की नई परत बनने लगी है। वैज्ञानिक इसे “वेजिटेशन लाइन शिफ्ट” यानी हरियाली की सीमा में बदलाव बता रहे हैं।
अध्ययन में पाया गया कि 1999 से 2022 के बीच हिमालय के कई हिस्सों में पौधों की सीमा हर साल औसतन 1.4 मीटर से लेकर लगभग 7 मीटर तक ऊपर खिसकी है। यह बदलाव पूरे हिमालयी क्षेत्र—लद्दाख से लेकर भूटान तक—में देखा गया है, जो इस समस्या की व्यापकता को दर्शाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में तापमान वैश्विक औसत से तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही बर्फ की गहराई कम हो रही है, जिससे ऊंचाई वाले इलाकों में भी पौधों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। यही कारण है कि जहां पहले सिर्फ बर्फ थी, अब वहां झाड़ियां और छोटे पौधे उगने लगे हैं।
यह बदलाव सुनने में सामान्य लग सकता है, लेकिन इसका असर गंभीर हो सकता है। कई ऐसे पौधे जो खास ऊंचाई और तापमान में ही जीवित रहते हैं, उनके लिए खतरा बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे हिमालय की अनोखी जैव विविधता प्रभावित हो सकती है और कुछ प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच सकती हैं।
हिमालय को “एशिया का वाटर टावर” कहा जाता है, क्योंकि यहां से कई नदियां निकलती हैं। पौधों की इस शिफ्ट से जल चक्र पर भी असर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ पर्यावरण नहीं बल्कि इंसानों के जीवन पर भी असर डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। कुल मिलाकर, हिमालय में पौधों का ऊपर खिसकना एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि जमीन पर तेजी से दिखने वाली सच्चाई बन चुका है।
नई रिसर्च के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में पौधे तेजी से ऊंचाई की ओर खिसक रहे हैं। तापमान बढ़ने और बर्फ की परत कम होने से वनस्पति की सीमा ऊपर जा रही है, जिससे पूरे इकोसिस्टम में बदलाव देखने को मिल रहा है। यह बदलाव न केवल जैव विविधता बल्कि जल स्रोतों और स्थानीय जीवन पर भी असर डाल सकता है।