क्लाइमेट चेंज के दौर में खेती को आधुनिक बनाने पर जोर, हर गाँव तक पहुंचेगी कृषि मशीनरी

Gaon Connection | Apr 12, 2026, 12:11 IST
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केंद्र सरकार बदलते मौसम की चुनौतियों से लड़ने के लिए खेती में तकनीकी सुधार कर रही है। अब हर गाँव में आधुनिक मशीनें उपलब्ध होंगी। किसान अब किफायती दाम पर उन्नत यंत्र किराए पर ले सकेंगे। इससे उन्हें लागत में कमी आएगी और पैदावार में वृद्धि होगी। सरकार किसानों को आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रही है।
क्लाइमेट चेंज के दौर में आधुनिक खेती पर जोर
क्लाइमेट चेंज के दौर में आधुनिक खेती पर जोर
बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार खेती को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर किसान तक उन्नत बीज, सही फसल सलाह और आधुनिक कृषि मशीनरी की आसान पहुँच सुनिश्चित की जाए, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सके।

क्लाइमेट चेंज से निपटने की तैयारी

मंत्री ने कहा कि क्लाइमेट चेंज का असर अब साफ दिखने लगा है। अनियमित बारिश, पश्चिमी विक्षोभ और तापमान में अचानक बदलाव खेती को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक संस्थान ऐसी नई फसल किस्में विकसित कर रहे हैं, जो ज्यादा गर्मी, अधिक या कम पानी जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। इन उन्नत किस्मों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने पर काम किया जा रहा है।

हर गाँव में मशीनीकरण का विस्तार

सरकार अब व्यक्तिगत स्तर पर मशीन सब्सिडी देने से आगे बढ़कर सामूहिक मॉडल पर काम कर रही है। इसके तहत गाँव स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर और पंचायत आधारित फार्म मशीनरी बैंक विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के जरिए छोटे और सीमांत किसान भी किराये पर आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे उनकी लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।

सरकारी योजनाओं से मिलेगा आर्थिक सहयोग

कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता भी दे रही है। सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) के अंतर्गत परियोजना लागत का 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे पंचायतों, किसान समूहों और एफपीओ को मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने में मदद मिल रही है।

MPLADS से नहीं, योजनाओं से होगा विकास

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सांसद निधि (MPLADS) का उपयोग कस्टम हायरिंग सेंटर बनाने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह योजना स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए है। वहीं कस्टम हायरिंग सेंटर संचालन आधारित मॉडल पर चलते हैं, इसलिए इनके लिए अलग योजनाओं के तहत ही सहायता दी जा रही है।

जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका

हालांकि MPLADS से सीधे ऐसे केंद्र नहीं बन सकते, लेकिन सांसद और विधायक इन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे किसानों, एफपीओ और पंचायतों के प्रस्तावों को आगे बढ़ाने, स्वीकृति दिलाने और निगरानी करने में मदद कर सकते हैं, जिससे योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुंच सके।

प्राइवेट सेक्टर के साथ साझेदारी

सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को भी बढ़ावा दे रही है। कुछ राज्यों में निजी कंपनियां पहले से इस दिशा में काम कर रही हैं। सरकार चाहती है कि पंचायत, एफपीओ और निजी क्षेत्र मिलकर ऐसे मॉडल विकसित करें, जिससे किसानों को सस्ती और समय पर मशीनरी सेवाएं मिल सकें।

किसान-केंद्रित और वैज्ञानिक सोच पर जोर

मंत्री ने कहा कि यह पूरी पहल किसान-केंद्रित दृष्टिकोण और वैज्ञानिक सलाह पर आधारित है। सरकार का उद्देश्य खेती को एग्रो-क्लाइमेटिक रणनीति, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर एक मजबूत ढांचे में बदलना है, ताकि किसानों की आय बढ़े, लागत घटे और खेती लंबे समय तक टिकाऊ बन सके।
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