Crop Damage: खेत में आग से फसल जली तो क्या मिलेगा मुआवजा? बिना बीमा भी ऐसे मिल सकती है किसानों को सहायता
Gaon Connection | Apr 12, 2026, 16:25 IST
गर्मी में खेतों में आग लगने से किसानों की मेहनत राख हो जाती है। ऐसे में फसल बीमा न होने पर भी सरकार मदद करती है। इसके लिए राज्य आपदा राहत कोष से सहायता मिलती है। उत्तर प्रदेश में लेखपाल/पटवारी को सूचना देने पर मुआवजा मिलता है। अन्य राज्यों में भी ऐसी व्यवस्था है। बीमा कराने से अधिक और तेज मुआवजा मिलता है।
जानिए कहाँ करें शिकायत, किससे संपर्क करें और कैसे मिलेगा मुआवजा
देश के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ने के साथ खेतों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं। ऐसी स्थिति में किसानों की मेहनत कुछ ही मिनटों में राख हो जाती है। बड़ा सवाल यह होता है कि अगर किसान ने फसल बीमा नहीं कराया है, तो क्या उसे किसी तरह की आर्थिक मदद मिल सकती है? जवाब है-हाँ, लेकिन कुछ शर्तों के साथ।
अगर किसान ने फसल बीमा योजना (जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) का लाभ नहीं लिया है, तब भी सरकार आगजनी जैसी घटनाओं के नुकसान के बाद सहायता राशि देती है। खेत में आग लगने जैसी घटनाओं को कई मामलों में आपदा (disaster) मानते हुए राज्य सरकारें राहत देती हैं। यह सहायता आमतौर पर राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत दी जाती है।
Uttar Pradesh में खेत या खलिहान में आग लगने पर किसान को राहत पाने के लिए सबसे पहले स्थानीय प्रशासन को सूचना देनी होती है।
कई बार बड़े स्तर पर आग लगने या ज्यादा किसानों के प्रभावित होने पर राज्य सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष से अतिरिक्त मदद भी देती है। हालांकि यह हर मामले में तय नहीं होता, बल्कि प्रशासनिक निर्णय और स्थिति पर निर्भर करता है।
आमतौर पर किसानों को ₹6,800 से ₹13,500 प्रति हेक्टेयर तक की सहायता मिल सकती है, जो फसल और नुकसान की मात्रा पर निर्भर करती है। यूपी सरकार द्वारा खलिहान अग्नि दुर्घटना सहायता योजना के अंतर्गत 2.5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों को 15 हजार, 2.5 से 5 एकड़ तक भूमि वाले किसान को 20 हजार, 5 एकड़ से अधिक जमीन वाले किसान को 30 हजार रुपये तक का मुआवजा देने का प्रावधान है.
आग की घटना के बाद किसान को तुरंत इन अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए:
अगर किसान ने फसल बीमा कराया होता, तो उसे:
तुरंत घटना की सूचना लेखपाल/पटवारी को दें, नुकसान की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखें, तहसील या ब्लॉक में आवेदन करें, बैंक खाता और आधार अपडेट रखें। खेत में आग लगने से नुकसान होने पर बीमा न होने के बावजूद किसान को राहत मिल सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सरकारी जाँच और नियमों पर निर्भर होती है। ऐसे में समय पर सूचना देना और जरूरी प्रक्रिया पूरी करना बेहद जरूरी है। सबसे सुरक्षित विकल्प यही है कि किसान भविष्य में फसल बीमा जरूर कराएं, ताकि ऐसी आपदा में आर्थिक नुकसान की भरपाई बेहतर तरीके से हो सके।
बीमा नहीं है तो भी मिल सकती है मदद
आग लगते ही क्या करें?
- सबसे पहले आग बुझाना और नुकसान रोकना जरूरी है:
- तुरंत फायर ब्रिगेड को कॉल करें
- आसपास के लोगों की मदद लें
- खुद जोखिम में न पड़ें
- अगर संभव हो तो वीडियो/फोटो बना लें (सबूत के लिए)
उत्तर प्रदेश में क्या है नियम?
- किसान को तुरंत लेखपाल/पटवारी को जानकारी देनी होती है
- इसके बाद मौके पर जाकर नुकसान का आकलन (जांच) किया जाता है
- रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा तय होता है
क्या है ‘मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड सहायता’?
- किसानों को जन सुविधा केंद्र के माध्यम से ई-डिस्टिक पोर्टल पर जाकर मंडी समिति के पोर्टल के जरिए अग्निकांड पोर्टल पर आवेदन करना होता है।
- इसके बाद मुख्यमंत्री अग्निकांड खेत खलियान योजना के अंतर्गत उनका वेरिफिकेशन किया जाएगा।
- फिर तहसील के जरिए जांच कराई जाएगी। इसके बाद हफ्ते से 10 दिन के अंदर मंडी समिति द्वारा किसान के खाते में पैसा भेज दिया जाएगा।
कितनी मिलती है सहायता?
किस-किस से संपर्क करें?
- लेखपाल / पटवारी (सबसे जरूरी)
- ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव
- तहसील (SDM ऑफिस)
- कृषि विभाग के अधिकारी
- ये सभी मिलकर नुकसान का सर्वे (जांच) कराते हैं।
अन्य राज्यों में क्या व्यवस्था है?
- Madhya Pradesh: पटवारी जांच के बाद SDRF से सहायता, कुछ मामलों में अतिरिक्त राज्य मदद
- Bihar: “इनपुट सब्सिडी” के रूप में राहत, पैसा सीधे खाते में
- Rajasthan: गिरदावरी के आधार पर मुआवजा
- Haryana और Punjab: आपदा राहत और विशेष पैकेज के जरिए सहायता
- यानी लगभग हर राज्य में बिना बीमा के भी कुछ न कुछ राहत का प्रावधान मौजूद है, लेकिन राशि और प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
बीमा होता तो क्या फर्क पड़ता?
- ज्यादा और तय मुआवजा मिलता
- प्रक्रिया तेज और स्पष्ट होती
- नुकसान का कवरेज व्यापक होता
- बिना बीमा के राहत मिलती है, लेकिन सीमित और जांच पर आधारित होती है।