Bihar के शहद की बढ़ने वाली है माँग, शहद प्रोडक्शन और प्रसंस्करण समितियों का हुआ गठन
Gaon Connection | Mar 12, 2026, 18:02 IST
बिहार सरकार ने मधुमक्खी पालकों की आर्थिक स्तिथि सुधारने के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू किया है। इससे किसानों को उचित मूल्य मिलेंगे और वे सीधे बाजारों में पहुंच सकेंगे। इस योजना के तहत, प्रखंड के स्तर पर शहद समितियों का गठन किया जाएगा। सभी समितियों का समर्पित फेडरेशन शहद की गुणवत्ता को बनाए रखने और ब्रांडिंग की जिम्मेदारी लेगा।
किसानों को बेहतर दाम दिलाने की तैयारी
बिहार में शहद उत्पादन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। सरकार का उद्देश्य यह है कि मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को उनके शहद का बेहतर दाम मिल सके और उन्हें बाजार तक सीधी पहुँच मिले। इसी दिशा में सहकारिता विभाग ने राज्य के कई प्रखंडों में शहद उत्पादक और प्रसंस्करण समितियों का गठन किया है, ताकि किसान मिलकर उत्पादन बढ़ा सकें और अपने उत्पाद को बेहतर तरीके से बेच सकें।
सरकार की ओर से राज्य के 144 प्रखंडों में शहद उत्पादक और प्रसंस्करण समितियाँ बनाई गई हैं। इन समितियों का उद्देश्य किसानों को संगठित करना, शहद के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देना और बाजार तक पहुँच आसान बनाना है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में मदद मिलेगी और उन्हें उचित कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
इन सभी समितियों को जोड़ने के लिए राज्य स्तर पर बिहार राज्य शहद उत्पादक एवं प्रसंस्करण फेडरेशन का गठन किया गया है। यह फेडरेशन शहद की गुणवत्ता बनाए रखने, ब्रांडिंग करने और बड़े बाजारों तक पहुँच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके जरिए शहद के निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
शहद उत्पादन को बढ़ाने के लिए कृषि विभाग, उद्योग विभाग और COMFED (सुधा) मिलकर काम करेंगे। इन विभागों के सहयोग से किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बेहतर बाजार संपर्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपने उत्पादन और कमाई दोनों बढ़ा सकें।
बिहार के कई जिलों में अलग-अलग फसलों से तैयार होने वाला शहद खास पहचान रखता है। मुजफ्फरपुर, वैशाली और समस्तीपुर के लीची बागानों से मिलने वाला लीची शहद काफी लोकप्रिय है। वहीं नालंदा और पटना जैसे क्षेत्रों में सरसों का शहद बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है। इसके अलावा औरंगाबाद और रोहतास में तिल का शहद भी उत्पादित होता है।
राज्य में लीची, सरसों, तिल और सूरजमुखी जैसी फसलों की मौजूदगी के कारण शहद उत्पादन की बड़ी संभावनाएं हैं। सरकारी प्रयासों के चलते बिहार देश में शहद उत्पादन के मामले में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है। सहकारिता मॉडल के जरिए सरकार किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम करना चाहती है, ताकि उनकी सीधी पहुंच बाजार और बड़े खरीदारों तक हो सके और उनकी आय में बढ़ोतरी हो।