यूपी में 12 अक्टूबर तक पूरा होगा फसल नुकसान का डिजिटल सर्वे, डीएम और एसडीएम फील्ड पर करेंगे निरीक्षण
Oct 07, 2026, 13:14 IST
उत्तर प्रदेश में फसल नुकसान का आकलन केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगा। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगे।
बारिश और आंधी के बाद खेतों में बर्बाद बड़ी केले की फसल।
लखनऊ। यूपी में बारिश और बाढ़ से हुए फसलों के नुकसान का डिजिटल क्रॉप सर्वे 12 अक्टूबर तक पूरा करके किसानों को सहायता पहुंचाई जाएगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे से मिली जानकारी के आधार पर पात्र किसानों को उनकी फसल के नुकसान के अनुसार सहायता दी जाएगी। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन भी करेंगे।
यूपी के राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फसल नुकसान का आकलन केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगा। जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं क्षेत्र में जाकर सर्वे की स्थिति देखेंगे।
हर स्थिति में 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल नुकसान की फीडिंग पूरी कर ली जाए। जिलों में सर्वे की रिपोर्ट रोज गूगल शीट और पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही की जाएगी।
नुकसान का आकलन अधिक वैज्ञानिक और तथ्यपरक बनाने के लिए आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी की रिपोर्ट व आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संबंधित क्षेत्रों में वास्तव में कितनी बारिश हुई, इसका सही आकलन किया जा सकेगा। बारिश के वास्तविक आंकड़ों और डिजिटल सर्वे को आधार बनाकर फसल नुकसान का निर्धारण किया जाएगा।
यूपी के राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फसल नुकसान का आकलन केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगा। जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं क्षेत्र में जाकर सर्वे की स्थिति देखेंगे।
हर स्थिति में 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल नुकसान की फीडिंग पूरी कर ली जाए। जिलों में सर्वे की रिपोर्ट रोज गूगल शीट और पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही की जाएगी।
नुकसान का आकलन अधिक वैज्ञानिक और तथ्यपरक बनाने के लिए आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी की रिपोर्ट व आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संबंधित क्षेत्रों में वास्तव में कितनी बारिश हुई, इसका सही आकलन किया जा सकेगा। बारिश के वास्तविक आंकड़ों और डिजिटल सर्वे को आधार बनाकर फसल नुकसान का निर्धारण किया जाएगा।