E20 Petrol: इस तारिख़ से 20% एथेनॉल वाला पेट्रोल लेना होगा अनिवार्य, जानें गाड़ियों के माइलेज पर क्या होगा असर?
Gaon Connection | Feb 26, 2026, 13:03 IST
1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में मिलने वाला पेट्रोल E20 ग्रेड का होगा यानी इसमें 20% एथेनॉल और बाकी पारंपरिक पेट्रोल होगा, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर 95 तय किया गया है।एथेनॉल देश में ही बनने वाला नवीकरणीय ईंधन है, जिससे गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ती है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में चेतावनी दी गई है कि अगर मक्का की खेती जरूरत से ज्यादा बढ़ी और उसने दालों व तिलहनों की जगह ली, तो खाद्य सुरक्षा से जुड़ा जोखिम भी पैदा हो सकता है।
1 अप्रैल 2026 से E20 पेट्रोल अनिवार्य
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में बिकने वाले पेट्रोल को E20 बनाने का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाया जाएगा और इसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 होगा। यह फैसला तेल आयात कम करने, प्रदूषण घटाने और गन्ना व मक्का जैसी फसलों की माँग बढ़ाने के लिए लिया गया है। एथेनॉल इन्हीं फसलों से बनता है और यह पेट्रोल की तुलना में ज्यादा साफ जलता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 फरवरी की अधिसूचना में कहा है, "केंद्र सरकार निर्देश देती है कि पेट्रोलियम कंपनियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारतीय मानक ब्यूरो के विनिर्देशों के अनुसार 20 प्रतिशत तक एथेनॉल के साथ मिश्रित मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) की बिक्री करेंगी, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (रॉन) 95 होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पहले 10% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया गया था।"
RON 95 का मतलब है कि पेट्रोल, इंजन में समय से पहले जलने (नॉकिंग) से कितना बचाव करता है। नॉकिंग तब होती है जब ईंधन सही समय से पहले या असमान रूप से जल जाता है, जिससे इंजन में 'पिंग' जैसी आवाज आती है और लंबे समय में इंजन को नुकसान हो सकता है। RON जितना ज्यादा होगा, पेट्रोल नॉकिंग से उतना ही बेहतर बचाव करेगा और इंजन को सुरक्षित रखेगा।
ऑक्टेन (RON) को आसान भाषा में समझें
ऑक्टेन को आप ईंधन का “दबाव में खुद को संभालने की ताक़त” समझिए। इंजन के अंदर ईंधन पर बहुत दबाव पड़ता है।
कम RON का मतलब हुआ ईंधन जल्दी जल जाता है जिससे इंजन में “नॉकिंग/पिंग”जैसी समस्या आती है।
ज़्यादा RON का मतलब हुआ ईंधन सही समय पर, बराबरी से जलता है जिससे इंजन सुरक्षित रहता है।
एथेनॉल गन्ने, मक्का या अनाज से बनता है। यह नवीकरणीय है, देश में ही बनता है और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में ज्यादा स्वच्छ जलता है। सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को अनिवार्य किया है ताकि तेल आयात में कटौती की जा सके और उत्सर्जन कम हो। इससे किसानों को भी फायदा होगा क्योंकि गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की माँग बढ़ेगी। भारत ने जून 2022 में पेट्रोल में 10% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पाँच महीने पहले ही हासिल कर लिया था।
एथेनॉल का ऑक्टेन मान अपने आप ही बहुत ऊँचा (करीब 108 RON) होता है। जब पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जाता है (E20), तो कुल ईंधन का ऑक्टेन बढ़ जाता है। इसका फायदा यह है कि इंजन में नॉकिंग कम होती है, परफॉर्मेंस बेहतर रहती है और इंजन ज्यादा सुरक्षित रहता है।
इससे प्रोत्साहित होकर सरकार ने 20% मिश्रण का लक्ष्य 2030 के बजाय 2025-26 तक आगे बढ़ा दिया है। देश भर के ज्यादातर पंपों पर अब E20 या 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बिकता है। तेल मंत्रालय के अनुसार, 2014-15 से भारत ने पेट्रोल के बदले एथेनॉल का उपयोग करके विदेशी मुद्रा में 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। वहीं आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 कहता है कि जब सरकार एथेनॉल को बढ़ावा देती है, तो मक्का की माँग बढ़ती है क्योंकि उसी से एथेनॉल बनता है। इससे किसान मक्का ज़्यादा बो सकते हैं और दालें व तिलहन (सरसों, सोयाबीन आदि) कम बोए जा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो खाने की चीज़ों की उपलब्धता घट सकती है और दाम बढ़ने का खतरा रहता है, यही खाद्य सुरक्षा का जोखिम है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की 17 फरवरी की अधिसूचना के मुताबिक, तेल कंपनियाँ अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री करेंगी, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 होगा। सरकार का कहना है कि पहले 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E10) का लक्ष्य समय से पहले पूरा हो गया था, इसी वजह से E20 को देशभर में लागू करने का फैसला लिया गया है।
पुरानी पेट्रोल गाड़ियों, खासकर 2020 से पहले बनी कारों और बाइकों में E20 पेट्रोल से कुछ समस्याएँ आ सकती हैं। इनमें माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक घट सकता है और रबर या प्लास्टिक के कुछ पुर्ज़ों पर असर पड़ सकता है। ऐसे वाहन मालिकों को कंपनी की गाइडलाइन देखने और जरूरत पड़ने पर सर्विस सेंटर से सलाह लेने की जरूरत होगी। नई गाड़ियों के लिए यह बदलाव आसान रहेगा, जबकि पुरानी गाड़ियों के मालिकों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होगी। तेल मंत्रालय के अनुसार, 2014–15 से अब तक एथेनॉल मिश्रण के चलते भारत को विदेशी मुद्रा में 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो चुकी है। जिसको देखते हुए आने वाले सालों में ये नियम E20 से बढ़कर E27 तक जा सकता है।
क्या है RON 95?
ऑक्टेन (RON) को आसान भाषा में समझें
ऑक्टेन को आप ईंधन का “दबाव में खुद को संभालने की ताक़त” समझिए। इंजन के अंदर ईंधन पर बहुत दबाव पड़ता है।
कम RON का मतलब हुआ ईंधन जल्दी जल जाता है जिससे इंजन में “नॉकिंग/पिंग”जैसी समस्या आती है।
ज़्यादा RON का मतलब हुआ ईंधन सही समय पर, बराबरी से जलता है जिससे इंजन सुरक्षित रहता है।
कैसे बनता है Ethanol ?
एथेनॉल क्यों मददगार है?
इससे प्रोत्साहित होकर सरकार ने 20% मिश्रण का लक्ष्य 2030 के बजाय 2025-26 तक आगे बढ़ा दिया है। देश भर के ज्यादातर पंपों पर अब E20 या 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बिकता है। तेल मंत्रालय के अनुसार, 2014-15 से भारत ने पेट्रोल के बदले एथेनॉल का उपयोग करके विदेशी मुद्रा में 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। वहीं आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 कहता है कि जब सरकार एथेनॉल को बढ़ावा देती है, तो मक्का की माँग बढ़ती है क्योंकि उसी से एथेनॉल बनता है। इससे किसान मक्का ज़्यादा बो सकते हैं और दालें व तिलहन (सरसों, सोयाबीन आदि) कम बोए जा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो खाने की चीज़ों की उपलब्धता घट सकती है और दाम बढ़ने का खतरा रहता है, यही खाद्य सुरक्षा का जोखिम है।