भारत में गरीबी की स्थिति: क्या कहते हैं इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के आकड़ें
Gaon Connection | Jan 29, 2026, 14:38 IST
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में भारत में गरीबी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई है। सर्वे के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में गरीबी के आंकड़ों में काफ़ी बदलाव आया है। सर्वे में लिखा है कि 2011-12 और 2023-24 के बीच, निरंतर आर्थिक विकास और सरकार की लक्षित नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव से गरीबी दर 2011-12 में 21.9 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 4.7 प्रतिशत और 2023-24 में 2.3 प्रतिशत रह गई है।
विश्व बैंक ने जून 2025 में अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा को संशोधित किया। पहले ये 2.15 डॉलर प्रति दिन थी, अब इसे बढ़ाकर 3.00 डॉलर प्रति दिन कर दिया गया है। सर्वे के अनुसार, "संशोधित IPL के साथ, भारत में 2022-23 के लिए गरीबी दर अत्यधिक गरीबी के लिए 5.3 प्रतिशत और निम्न-मध्यम आय गरीबी के लिए 23.9 प्रतिशत है।"
सिर्फ पैसों की गरीबी नहीं, बल्कि बहुआयामी गरीबी के आंकड़ें भी सर्वे में दिए गए हैं। विश्व बैंक का बहुआयामी गरीबी माप भारत के लिए 2022-23 में 15.5 प्रतिशत रहा। NITI Aayog का मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) और भी विस्तृत तस्वीर देता है। सर्वे बताता है कि 2005-06 में 55.3 प्रतिशत से घटकर 2019-21 तक 14.96 प्रतिशत हो गया, और 2022-23 में इसके 11.28 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है।
MPI सिर्फ आय नहीं देखता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसे पहलुओं को भी मापता है। इससे पता चलता है कि लोगों की स्थिति कई मोर्चों पर कैसी है।
राज्यों के स्तर पर गरीबी में कमी का पैटर्न दिलचस्प है। सर्वे में एक चार्ट दिया गया है जो दिखाता है कि 2015-16 में MPI के संदर्भ में जिन राज्यों में उच्च गरीबी व्यापकता थी, उन्होंने वर्षों में गरीबी के हेडकाउंट अनुपात में अधिक कमी देखी है। इसका मतलब है कि जो राज्य पीछे थे, उनमें गरीबी तेजी से घटी है।सर्वे में कुछ राज्य स्तरीय योजनाओं का भी जिक्र है। बिहार की 'सतत जीविकोपार्जन योजना' (SJY) 2018 में शुरू की गई थी। सर्वे के अनुसार, यह कार्यक्रम गरीब परिवारों को धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत उन्हें काम से जुड़ी संपत्ति दी जाती है, प्रशिक्षण दिया जाता है, आमदनी शुरू होने तक आर्थिक मदद मिलती है और लगभग दो साल तक लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
ग्रेजुएशन अप्रोच एक ख़ास तरीका है जो कई तरह की मदद एक साथ देता है - संपत्ति, ट्रेनिंग, फाइनेंशियल सपोर्ट, कोचिंग और हेल्थ सर्विसेज। लाभार्थियों को बीमा, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, और COVID-19 जैसे संकट के दौरान राहत सहायता भी मिली।
J-PAL की एक स्टडी का हवाला देते हुए सर्वे बताता है कि SJY लाभार्थियों ने स्थिर आय स्रोत होने की रिपोर्ट की, जबकि COVID-19 के कारण आकस्मिक श्रम जैसे अन्य आय के अवसर गायब हो गए थे।
केरल का गरीबी उन्मूलन मॉडल भी सर्वे में शामिल है। सर्वे लिखता है, "केरल सरकार ने व्यापक सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सबसे कमजोर परिवारों की पहचान करने के लिए एक व्यापक विधि लागू की, जिसका नेतृत्व स्थानीय सरकारों ने किया और ASHA, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, कुटुम्बश्री और सक्रिय समूहों सहित फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं द्वारा समर्थन दिया गया।"
केरल मॉडल में कई चरण थे। पहले आधार, राशन कार्ड, विकलांगों के लिए UDID कार्ड और वोटर आईडी जैसे जरूरी दस्तावेज दिलाए गए। हेल्थ इंश्योरेंस और सोशल सिक्योरिटी पेंशन जैसी इमरजेंसी सर्विसेज को प्राथमिकता दी गई। बेसिक खाना और मेडिकल केयर पक्की की गई। हर फैमिली के लिए अलग से माइक्रो-प्लान बनाए गए। लोकल सेल्फ गवर्नमेंट और डिपार्टमेंट्स ने डिजिटल तरीके से ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की। कुदुम्बश्री नेटवर्क ने कम्युनिटी मॉनिटर और सर्विस प्रोवाइडर दोनों की भूमिका निभाई।
सर्वे बताता है कि SJY और केरल मॉडल दोनों सामुदायिक भागीदारी और बहुआयामी रणनीति को दिखाते हैं जिसमें निरंतर समर्थन और निगरानी के साथ कमजोर लोगों को दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए सहायता, प्रशिक्षण, वित्त तक पहुंच और बुनियादी आवश्यकताएं शामिल हैं।"
इन राज्य स्तरीय प्रयोगों से सीख लेते हुए, केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के जरिए DAY-NRLM के तहत 'समावेशी आजीविका योजना' शुरू की है। सर्वे के अनुसार ये "ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर लाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक व्यापक आजीविका कार्यक्रम है, जो 'ग्रेजुएशन दृष्टिकोण' पर बना है।"
सर्वे में ये भी लिखा है कि ये हस्तक्षेप परिवारों को आत्मनिर्भर और लचीला बनाने में सक्षम बनाते हैं, यहां तक कि संकट के समय भी।"
सर्वे के अनुसार, गरीबी में आई कमी सरकार की बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ी हुई है। इसमें बताया गया है कि कल्याण योजनाओं, आर्थिक सुधारों और बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुंच ने गांवों और शहरों दोनों में लोगों की स्थिति सुधारी है। इसी वजह से गरीबी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि बीते दो दशकों में गरीबी के सभी पैमानों, चाहे वह आय से जुड़ी हो या जीवन स्तर से, लगातार सुधार हुआ है। राज्यों के बीच असमानता घटी है और जिन योजनाओं व मॉडलों ने अच्छा काम किया है, उनकी पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।
सिर्फ पैसों की गरीबी नहीं, बल्कि बहुआयामी गरीबी के आंकड़ें भी सर्वे में दिए गए हैं। विश्व बैंक का बहुआयामी गरीबी माप भारत के लिए 2022-23 में 15.5 प्रतिशत रहा। NITI Aayog का मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) और भी विस्तृत तस्वीर देता है। सर्वे बताता है कि 2005-06 में 55.3 प्रतिशत से घटकर 2019-21 तक 14.96 प्रतिशत हो गया, और 2022-23 में इसके 11.28 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है।
MPI सिर्फ आय नहीं देखता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसे पहलुओं को भी मापता है। इससे पता चलता है कि लोगों की स्थिति कई मोर्चों पर कैसी है।
राज्यों के स्तर पर गरीबी में कमी का पैटर्न दिलचस्प है। सर्वे में एक चार्ट दिया गया है जो दिखाता है कि 2015-16 में MPI के संदर्भ में जिन राज्यों में उच्च गरीबी व्यापकता थी, उन्होंने वर्षों में गरीबी के हेडकाउंट अनुपात में अधिक कमी देखी है। इसका मतलब है कि जो राज्य पीछे थे, उनमें गरीबी तेजी से घटी है।सर्वे में कुछ राज्य स्तरीय योजनाओं का भी जिक्र है। बिहार की 'सतत जीविकोपार्जन योजना' (SJY) 2018 में शुरू की गई थी। सर्वे के अनुसार, यह कार्यक्रम गरीब परिवारों को धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत उन्हें काम से जुड़ी संपत्ति दी जाती है, प्रशिक्षण दिया जाता है, आमदनी शुरू होने तक आर्थिक मदद मिलती है और लगभग दो साल तक लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
ग्रेजुएशन अप्रोच एक ख़ास तरीका है जो कई तरह की मदद एक साथ देता है - संपत्ति, ट्रेनिंग, फाइनेंशियल सपोर्ट, कोचिंग और हेल्थ सर्विसेज। लाभार्थियों को बीमा, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, और COVID-19 जैसे संकट के दौरान राहत सहायता भी मिली।
J-PAL की एक स्टडी का हवाला देते हुए सर्वे बताता है कि SJY लाभार्थियों ने स्थिर आय स्रोत होने की रिपोर्ट की, जबकि COVID-19 के कारण आकस्मिक श्रम जैसे अन्य आय के अवसर गायब हो गए थे।
केरल का गरीबी उन्मूलन मॉडल भी सर्वे में शामिल है। सर्वे लिखता है, "केरल सरकार ने व्यापक सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सबसे कमजोर परिवारों की पहचान करने के लिए एक व्यापक विधि लागू की, जिसका नेतृत्व स्थानीय सरकारों ने किया और ASHA, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, कुटुम्बश्री और सक्रिय समूहों सहित फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं द्वारा समर्थन दिया गया।"
केरल मॉडल में कई चरण थे। पहले आधार, राशन कार्ड, विकलांगों के लिए UDID कार्ड और वोटर आईडी जैसे जरूरी दस्तावेज दिलाए गए। हेल्थ इंश्योरेंस और सोशल सिक्योरिटी पेंशन जैसी इमरजेंसी सर्विसेज को प्राथमिकता दी गई। बेसिक खाना और मेडिकल केयर पक्की की गई। हर फैमिली के लिए अलग से माइक्रो-प्लान बनाए गए। लोकल सेल्फ गवर्नमेंट और डिपार्टमेंट्स ने डिजिटल तरीके से ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की। कुदुम्बश्री नेटवर्क ने कम्युनिटी मॉनिटर और सर्विस प्रोवाइडर दोनों की भूमिका निभाई।
सर्वे बताता है कि SJY और केरल मॉडल दोनों सामुदायिक भागीदारी और बहुआयामी रणनीति को दिखाते हैं जिसमें निरंतर समर्थन और निगरानी के साथ कमजोर लोगों को दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए सहायता, प्रशिक्षण, वित्त तक पहुंच और बुनियादी आवश्यकताएं शामिल हैं।"
इन राज्य स्तरीय प्रयोगों से सीख लेते हुए, केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के जरिए DAY-NRLM के तहत 'समावेशी आजीविका योजना' शुरू की है। सर्वे के अनुसार ये "ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर लाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक व्यापक आजीविका कार्यक्रम है, जो 'ग्रेजुएशन दृष्टिकोण' पर बना है।"
सर्वे में ये भी लिखा है कि ये हस्तक्षेप परिवारों को आत्मनिर्भर और लचीला बनाने में सक्षम बनाते हैं, यहां तक कि संकट के समय भी।"
सर्वे के अनुसार, गरीबी में आई कमी सरकार की बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ी हुई है। इसमें बताया गया है कि कल्याण योजनाओं, आर्थिक सुधारों और बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुंच ने गांवों और शहरों दोनों में लोगों की स्थिति सुधारी है। इसी वजह से गरीबी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि बीते दो दशकों में गरीबी के सभी पैमानों, चाहे वह आय से जुड़ी हो या जीवन स्तर से, लगातार सुधार हुआ है। राज्यों के बीच असमानता घटी है और जिन योजनाओं व मॉडलों ने अच्छा काम किया है, उनकी पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।