Spice Prices in India: खाड़ी देशों में निर्यात ठप होने से मसालों की कीमतों में आई गिरावट, घरेलू बाजार में सस्ते हुए मसाले

Preeti Nahar | Mar 23, 2026, 13:21 IST
Share
भारत से खाड़ी देशों को मसालों का निर्यात ठप होने से अब घरेलू बाजार में विभिन्न मसालों की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। जैसे ही इलायची, काली मिर्च, जीरा, हल्दी और धनिया की खेप देश के भीतर रुकी, किसानों और निर्यातकों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया।
खाड़ी देशों को निर्यात रुका
खाड़ी देशों को निर्यात रुका
खाड़ी देशों को मसालों का निर्यात रुकने का असर अब सीधे तौर पर भारत के घरेलू बाजार में दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय माँग में अचानक आई गिरावट के कारण इलायची, काली मिर्च, जीरा, हल्दी और धनिया जैसे प्रमुख मसालों की बड़ी खेप देश के भीतर ही अटक गई है, जिससे सप्लाई बढ़ गई और कीमतों में नरमी आ गई। खासतौर पर छोटे और मध्यम व्यापारियों के पास स्टॉक बढ़ने से उन्हें कम दाम पर माल निकालना पड़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में आयात नीतियों में बदलाव, गुणवत्ता मानकों की सख्ती और वैश्विक आर्थिक सुस्ती इसके प्रमुख कारण हैं।

किसानों को नहीं मिल रही मेहनत जितनी कमाई

इस स्थिति का दोहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक ओर जहाँ उपभोक्ताओं को सस्ते मसाले मिल रहे हैं, वहीं किसानों और निर्यातकों की आय पर दबाव बढ़ गया है। जिन किसानों ने बेहतर कीमत की उम्मीद में मसालों की खेती की थी, उन्हें अब कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। खासकर इलायची और काली मिर्च उत्पादक क्षेत्रों में यह चिंता ज्यादा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही निर्यात फिर से शुरू नहीं हुआ या नए बाजार नहीं मिले, तो कीमतों में और गिरावट आ सकती है।

करना होगा रणनीति में बदलाव

सरकार और निर्यात एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशने और गुणवत्ता सुधार के जरिए निर्यात को फिर से पटरी पर लाने की है। साथ ही घरेलू खपत बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर देने की जरूरत है। यदि समय रहते रणनीति नहीं बनाई गई, तो मसाला किसानों की आर्थिक स्थिति पर इसका लंबा असर पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञ विजय बताते हैं कि निर्यात लंबे समय तक रूका तो किसानोें के लिए समस्या बढ़ सकती है।आयात निर्यात रूकने पर, किसानों को भी नुकसान झेलना पड़ता है। इससे दामों में बढ़ोतरी और गिरावट होने लगती है। खाद, फर्टिलाइजर ब्लैक होने लगते हैं तो दाम बढ़ जाते हैं। भारत से निर्यात होने वाले मसालों और सब्जियों के निर्यात रुकने के कारण घरेलू बाजार में आवक बढ़ जाने से दाम गिरने लगते हैं। इससे भारत का दुनिया के बाजारों में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। अगर ये स्थिति लंबी चली तो इसका असर सीधा-सीधा किसानों, व्यापारियों और आम आदमी की जेब पर पडे़गा। ऐसे में अगर सरकार खाद की सब्सिडी मंहगी करती है तो किसानों की लगात भी बढ़ जाएगी। लगात बढ़ने से कोस्ट ऑफ प्रोडक्शन भी बढ़ जाएगा।

निर्यात बाधित हुआ तो आपूर्ति बढ़ी

इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के मसाला व्यापार की संरचना को भी प्रभावित कर रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक और निर्यातक देशों में से एक है और खाड़ी देश (जैसे यूएई, सऊदी अरब, ओमान) इसके प्रमुख बाजार रहे हैं। जब इन बाजारों से माँग अचानक घटती है, तो घरेलू सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ जाता है। नतीजतन मंडियों में आवक बढ़ती है और व्यापारियों को स्टॉक क्लियर करने के लिए कम दाम पर बिक्री करनी पड़ती है। हालांकि सभी मसालों के दाम एक जैसे नहीं गिरे हैं। कुछ मसाले ऐसे भी हैं जिनकी कीमतें घरेलू माँग या सीमित उत्पादन के कारण बढ़ी हैं। इससे बाजार में एक ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहाँ कुछ मसाले सस्ते हुए हैं, वहीं कुछ महंगे भी हुए हैं।

मसाला बाजार का ट्रेंड (हालिया स्थिति)

मसालाकीमत का रुझानहालिया डेटा / संकेत
इलायचीसस्तानिर्यात रुका, स्टॉक ज्यादा
काली मिर्चसस्ताखाड़ी मांग में गिरावट
जीरासस्ताओवर सप्लाई
हल्दीहल्की गिरावटघरेलू स्टॉक अधिक
धनियासस्तानई आवक ज्यादा
लाल मिर्चमहंगाउत्पादन कम, मांग स्थिर
तेजपत्तामहंगासीमित सप्लाई
लौंगमहंगाआयात पर निर्भरता
दालचीनीमहंगाइंटरनेशनल कीमतें ऊंची

बाजार की गहराई से समझ

मसाला बाजार में यह असंतुलन बताता है कि भारत अभी भी कुछ उत्पादों में निर्यात पर अत्यधिक निर्भर है, जबकि कुछ मसालों के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है। उदाहरण के लिए, लौंग और दालचीनी जैसे मसाले बड़े पैमाने पर बाहर से आते हैं, इसलिए उनकी कीमतें वैश्विक बाजार से प्रभावित होती हैं। वहीं जीरा और इलायची जैसे मसालों में भारत का दबदबा है, इसलिए इनके दाम घरेलू परिस्थितियों और निर्यात पर ज्यादा निर्भर करते हैं।

छत्तीसगढ़ के काली मिर्च के किसान राजाराम त्रिपाठी बताते हैं कि काली मिर्च का जहाँ तक सवाल है गल्फ कंट्री, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों की जलवायु ठंडी है और कावी मिर्च यहाँ के खाने को पचाने के लिए बेहद जरूरी है। काली मिर्च के व्पायाप पर असर पड़ने के बाद विक्ल्प बचता है लाल मिर्च का, लेकिन इन देशों के लोग लाल मिर्च बिल्कुल नहीं पचा पाते और लाल मिर्च बिल्कुल हजम नहीं कर सकते, छाले पड़ जाते हैं। तो वो काली मिर्च ही यूज़ करते हैं, इसीलिए सदियों से काली मिर्च की माँग रही है। ऐसे में शिपमेंट रूक रही है तो दाम पर असर पड़ना स्वाभाविक हैा, क्योंकि दूसरी मिर्च की माँग काली मिर्च की माँग को पूरी नहीं कर पाएगी।

किसानों की दुर्दशा का मुख्य कारण

राजाराम त्रिपाठी बताते हैं, भारत के किसानों के पास लॉजिस्टिक सपोर्ट भी नहीं है। अन्य देशों में भी जहाँ माल जाता था, वह रास्ता में भी रुका हुआ है फिलहाल। लेकिन होलसेल मार्केट में ही काली मिर्च का रेट 900 या 800 रुपए कुंटल रेट है और ये महीने भर पहले 450-500 में निकली काली मिर्च। यानी की दाम दुगना हो गया या 1.5 गुना कीमत बोल सकते हैं।आप देखेंगे कि जो ₹200 किलो अनार बिक रहा है, तो नासिक में वो अनार ₹30-35 किलो में ही निकल रहा है किसान के पास से। मार्केट का बुनावट ऐसी है, किसान को बेनिफिट नहीं मिल रहा है, बाकी सबको मिल रहा है। बिचौलियों को भी मिल रहा है और ग्राहकों को भी मिल रहा है।

किसानों और व्यापारियों के लिए संकेत

किसानों को अब फसल विविधीकरण (crop diversification) पर ध्यान देना होगा।

केवल निर्यात पर निर्भर रहने की बजाय घरेलू प्रोसेसिंग (जैसे मसाला पाउडर, पैकेजिंग) पर जोर बढ़ाना होगा।

सरकार अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या बफर स्टॉक जैसी व्यवस्था लाती है, तो कीमतों को स्थिर किया जा सकता है।

आगे क्या?

अगर अगले 2-3 महीनों में निर्यात दोबारा शुरू नहीं होता, तो सस्ते मसालों की कीमतों में और गिरावट संभव है। वहीं महंगे मसालों में और तेजी आ सकती है। यानी आने वाले समय में मसाला बाजार “दो हिस्सों” में बंटा हुआ दिख सकता है, एक जहाँ कीमतें दबाव में हैं और दूसरा जहाँ कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

Tags:
  • Spice Prices India
  • मसालों की कीमतें भारत
  • Gulf Export Halt
  • खाड़ी देशों में निर्यात
  • Indian Spice Market
  • Export Halted in Gulf Countries
  • saste hue masale
  • सस्ते हुए मसाले
  • मसलाों की कीमतों पर क्या असर
  • Decline in Spice Prices in India