Poshan Tracker में Face रिकग्निशन: राशन वितरण की सीधी निगरानी और फर्जीवाड़ा रोकने में मदद
Gaon Connection | Mar 25, 2026, 18:07 IST
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में फेस रिकग्निशन सिस्टम (चेहरे की पहचान प्रणाली) को लागू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य घर ले जाने वाले राशन के वितरण के अंतिम चरण तक पूरी निगरानी रखना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल असली लाभार्थियों तक ही पहुँचे।
लाभार्थियों तक सही तरीके से पहुँच रहा राशन
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर/ Poshan Tracker एप्लिकेशन में फेस रिकग्निशन सिस्टम (चेहरे की पहचान प्रणाली) को सफलतापूर्वक लागू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य घर ले जाने वाले राशन के वितरण के अंतिम चरण तक पूरी निगरानी रखना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल असली लाभार्थियों तक ही पहुँचे। यह पहल आधार के उपयोग से लाभार्थियों की सही पहचान करने, डेटा लीक को रोकने और फर्जीवाड़े को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर ऐप में फेस रिकग्निशन सिस्टम लागू किया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। इस तकनीक के जरिए घर ले जाने वाले राशन के वितरण पर आखिरी स्तर तक निगरानी रखी जा रही है। साथ ही आधार के माध्यम से सही पहचान होने से फर्जीवाड़ा और डेटा लीक जैसी समस्याओं पर भी रोक लग रही है।
इस नई व्यवस्था से लाभार्थियों की पहचान पहले से ज्यादा आसान और तेज हो गई है। यह सिस्टम मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत तैयार किया गया है। पहले जहां ई-केवाईसी और फेस कैप्चर में ज्यादा समय लगता था, अब यह प्रक्रिया जल्दी और सुरक्षित तरीके से पूरी हो रही है, जिससे आंगनवाड़ी सेवाएं और बेहतर हुई हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2025 तक, कुल 5,10,24,888 लाभार्थियों में से 3,51,97,271 (68.98 प्रतिशत) ने ई-केवाईसी और फेस कैप्चर प्रक्रिया पूरी की थी। वहीं, फरवरी 2026 तक, यह आंकड़ा बढ़कर कुल 4,77,88,108 लाभार्थियों में से 4,63,58,376 (97.01 प्रतिशत) तक पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि सिस्टम को लाभार्थियों द्वारा तेजी से अपनाया जा रहा है।
इस सिस्टम को सही तरीके से लागू करने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण वीडियो भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ साझा किए जाते हैं। इसके अलावा, 'पोषण भी पढ़ाई भी-पीबीपीबी' योजना के तहत, सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित कर रहा है, जो आगे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देते हैं। 18 मार्च 2026 तक, 3,901 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
मिशन पोषण 2.0 एक बड़ी योजना है, जिसमें 6 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां शामिल हैं। इस योजना को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जरिए लागू किया जा रहा है, ताकि हर जरूरतमंद तक पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं सही समय पर पहुंच सकें।
लाभार्थियों की पहचान में आई तेजी
इस नई व्यवस्था से लाभार्थियों की पहचान पहले से ज्यादा आसान और तेज हो गई है। यह सिस्टम मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत तैयार किया गया है। पहले जहां ई-केवाईसी और फेस कैप्चर में ज्यादा समय लगता था, अब यह प्रक्रिया जल्दी और सुरक्षित तरीके से पूरी हो रही है, जिससे आंगनवाड़ी सेवाएं और बेहतर हुई हैं।