Crop Insurance: जानिए किन डिजिटल माध्यमों से मिलेगी किसानों को फसल बीमा और राहत की तुरंत जानकारी?
Gaon Connection | Mar 27, 2026, 17:15 IST
उत्तर प्रदेश में फसलों के नुकसान की सूचना देना और सरकारी योजनाओं की जानकारी पाने के लिए किसान अब टोल-फ्री नंबर का उपयोग कर सकते हैं, साथ ही 'क्राप-इन्श्योरेन्स एप्प' और व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से भी मदद ले सकते हैं। जानिए कैसे होगा इन डिजिटल माध्यमों का उपयोग?
फसल बीमा योजना के लिए कहाँ संपर्क करें?
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान की सूचना तुरंत देने और सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से पाने के लिए कई डिजिटल रास्ते खोल दिए हैं। अब किसान टोल-फ्री नंबर 14447, 'क्राप-इन्श्योरेन्स एप्प' और व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7065514447 का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके अलावा, वे फसल बीमा पोर्टल पर भी लॉग-इन कर सकते हैं और किसी भी समस्या के समाधान के लिए अपने जिले के उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क कर सकते हैं। योगी सरकार का मकसद इन तरीकों से किसानों को समय पर मदद पहुँचाना और बीमा की प्रक्रिया को आसान बनाना है। यह सब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किया जा रहा है।
अब किसान फसल नुकसान की तुरंत सूचना देने या जानकारी प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री नंबर 14447 का प्रयोग कर सकते हैं। 'क्राप-इन्श्योरेन्स एप्प' और व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7065514447 के माध्यम से भी सूचना साझा की जा सकती है। कृषक योजनाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए फसल बीमा पोर्टल पर भी लॉग-इन कर सकते हैं।
सभी डिजिटल माध्यमों के अतिरिक्त, यदि किसानों को फसल बीमा से संबंधित किसी भी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वे उसके त्वरित समाधान के लिए अपने जनपद के उप कृषि निदेशक या जिला कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, संबंधित जनपद में कार्यरत बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से भी सीधे संपर्क कर सहायता ली जा सकती है।
किसानों को कई तरह के फसल नुकसान पर मुआवजा मिलता है। बुवाई न हो पाने की स्थिति (कम बारिश या खराब मौसम के कारण) में भी मुआवजा मिलता है। खड़ी फसल का नुकसान (सूखा, बाढ़, कीट, तूफान, ओलावृष्टि आदि) होने पर भी मुआवजा दिया जाता है। कटाई के बाद 14 दिनों तक नुकसान (बारिश या चक्रवात) होने पर भी मुआवजा मिलता है। स्थानीय आपदाएं जैसे जलभराव या भूस्खलन होने पर भी किसानों को राहत दी जाती है। हालांकि, युद्ध या जानबूझकर किए गए नुकसान को इसमें शामिल नहीं किया जाता है।
इस योजना में किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है। खरीफ फसल के लिए 2% प्रीमियम देना होता है। रबी फसल के लिए 1.5% प्रीमियम देना होता है। बागवानी/व्यावसायिक फसल के लिए 5% प्रीमियम देना होता है। बाकी का पैसा सरकार देती है, जिससे किसानों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है।
इसके अलावा, वे फसल बीमा पोर्टल पर भी लॉग-इन कर सकते हैं और किसी भी समस्या के समाधान के लिए अपने जिले के उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क कर सकते हैं। योगी सरकार का मकसद इन तरीकों से किसानों को समय पर मदद पहुँचाना और बीमा की प्रक्रिया को आसान बनाना है। यह सब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किया जा रहा है।