केमिकल से आम, केला व पपीता पकाया तो होगी कार्रवाई, FSSAI ने दिए सख्त निर्देश, मंडियों में पड़ेंगे छापे
Gaon Connection | Apr 17, 2026, 11:46 IST
गर्मियों में फलों को जल्दी पकाने के लिए केमिकल के इस्तेमाल पर एफएसएसएआई ने सख्त रुख अपनाया है। कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंडियों और गोदामों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। अवैध रूप से फल पकाने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होगी।
अवैध केमिकल्स पर सख्ती
गर्मियों की दस्तक के साथ ही देशभर की मंडियों में आम, केला और पपीता जैसे फलों की आमद तेज होने लगती है। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी इन फलों को जल्दी पकाने के लिए केमिकल के इस्तेमाल का खतरा मंडरा रहा है, जो सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा मुद्दा है। उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से पके फल पहुंचे, इसके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सीजन की शुरुआत से पहले ही सख्त रुख अपनाया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अवैध फल पकाने वाले रसायनों के खिलाफ सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। FSSAI ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार बाजारों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
FSSAI ने अपने आधिकारिक पत्र में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, क्षेत्रीय निदेशकों और लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे फल मंडियों, थोक बाजारों और स्टोरेज सुविधाओं में निरीक्षण बढ़ाएं। खास तौर पर उन जगहों पर निगरानी रखने को कहा गया है, जहां फलों को जल्दी पकाने के लिए अवैध केमिकल्स के इस्तेमाल की आशंका रहती है।
पत्र में दोहराया गया है कि कैल्शियम कार्बाइड, जिसे आम भाषा में ‘मसाला’ कहा जाता है, का इस्तेमाल फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह नियम खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर प्रतिबंध और सीमाएं) विनियम, 2011 के तहत लागू है। FSSAI ने चेतावनी दी है कि यह केमिकल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है और इससे उल्टी, निगलने में दिक्कत, त्वचा संबंधी समस्याएं जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
FSSAI ने यह भी पाया है कि कुछ कारोबारी एथिलीन गैस के नाम पर गलत तरीके अपना रहे हैं। जहां नियंत्रित परिस्थितियों में एथिलीन गैस का उपयोग सुरक्षित माना जाता है, वहीं कई जगह फलों को सीधे केमिकल सॉल्यूशन में डुबोया जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन है। प्राधिकरण ने साफ कहा है कि फलों का एथिलीन (पाउडर या लिक्विड) के सीधे संपर्क में आना पूरी तरह वर्जित है।
FSSAI ने राज्यों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत मंडियों, गोदामों और वितरण केंद्रों पर छापेमारी की जाएगी। यदि किसी भी स्थान पर कैल्शियम कार्बाइड या अन्य प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाते हैं, तो इसे साक्ष्य मानते हुए संबंधित कारोबारी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण ने अधिकारियों को स्ट्रिप पेपर टेस्ट जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग करने की अनुमति दी है, जिससे गोदामों या पकाने वाले चैंबर में एसीटिलीन गैस की मौजूदगी का पता लगाया जा सके। साथ ही फलों पर वैक्स और सिंथेटिक रंगों के अवैध इस्तेमाल पर भी सख्त नजर रखने को कहा गया है।
मंडियों और गोदामों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश
FSSAI has ordered strict enforcement across states to intensify action against illegal fruit ripening agents, reiterating that the use of calcium carbide for artificial ripening of fruits such as mangoes, bananas & papayas is strictly prohibited. pic.twitter.com/OJ6JBqRn7u
— FSSAI (@fssaiindia) April 16, 2026