Weaver Schemes: अब बुनकरों को मिलेगा सस्ता धागा और लाखों की मदद, जानिए कैसे उठाएं लाभ?
Gaon Connection | Mar 24, 2026, 17:53 IST
हथकरघा उद्योग न केवल देश की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का आधार भी है। केंद्र सरकार की योजनाओं से बुनकरों को आर्थिक सहायता, तकनीकी उन्नयन और बाजार तक पहुंच मिल रही है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को भी नई पहचान मिल रही है।
बुनकरों के लिए आर्थिक सहायता
देश के पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कई अहम योजनाएं चला रही है। राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत बुनकरों और उनके संगठनों को वित्तीय सहायता, कच्चे माल की उपलब्धता और आधुनिक उपकरणों के लिए सहयोग दिया जा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पाँच वर्षों में देशभर के सैकड़ों हथकरघा समूहों और विपणन आयोजनों को सहायता प्रदान की गई है।
सरकार की योजनाओं के तहत बुनकरों को रियायती ऋण और सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। बुनकर मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋण राशि पर 20% तक मार्जिन मनी सहायता दी जाती है। व्यक्तिगत बुनकरों को अधिकतम 25,000 रुपये और संगठनों को 20 लाख रुपये तक का लाभ मिलता है। इसके अलावा, 7% तक ब्याज सब्सिडी और तीन वर्षों तक क्रेडिट गारंटी शुल्क की सुविधा भी दी जाती है, जिससे छोटे बुनकरों के लिए वित्तीय बोझ कम होता है।
हथकरघा संवर्धन सहायता (HSS) योजना के तहत बुनकरों को उनके करघों और उपकरणों को अपग्रेड करने के लिए सहायता दी जाती है। इसमें 90% लागत केंद्र सरकार वहन करती है, जबकि केवल 10% हिस्सा लाभार्थी को देना होता है। इससे कपड़े की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है, साथ ही श्रम का दबाव कम होता है।
सरकार बुनकरों को व्यक्तिगत कार्यशाला बनाने के लिए भी सहायता प्रदान कर रही है। बीपीएल, एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग श्रेणी के लाभार्थियों के लिए 100% लागत केंद्र सरकार वहन करती है, जबकि अन्य के लिए 75% सहायता दी जाती है। इसके अलावा, सौर ऊर्जा सहित प्रकाश व्यवस्था के लिए भी 90% तक अनुदान दिया जाता है, जिससे कार्य की सुविधा और उत्पादकता बढ़ती है।
कच्चा माल आपूर्ति योजना (RMSS) के तहत बुनकरों को धागा उचित कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। इसमें माल ढुलाई शुल्क की प्रतिपूर्ति के साथ-साथ सूती, रेशम, ऊन और अन्य प्राकृतिक फाइबर के धागों पर 15% तक मूल्य सब्सिडी दी जाती है। इससे उत्पादन लागत कम होती है और बुनकरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) के दौरान देशभर में 359 हथकरघा समूहों और 659 विपणन कार्यक्रमों को वित्तीय सहायता मिली है।
भारत के पूर्वी क्षेत्र में सबसे अधिक 162 समूह और 394 कार्यक्रम
भारत के दक्षिण क्षेत्र में 121 समूह और 125 कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश सहित उत्तरी क्षेत्र में 51 समूह और 100 कार्यक्रम
भारत के पश्चिमी क्षेत्र में 25 समूह और 40 कार्यक्रम
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार पूरे देश में हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
बुनकरों को मिल रही आर्थिक मदद
आधुनिक उपकरण और उत्पादन में सुधार
कार्यशाला और आधारभूत सुविधाएं
कच्चे माल पर सब्सिडी
राज्यों में बढ़ता लाभ
भारत के पूर्वी क्षेत्र में सबसे अधिक 162 समूह और 394 कार्यक्रम
भारत के दक्षिण क्षेत्र में 121 समूह और 125 कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश सहित उत्तरी क्षेत्र में 51 समूह और 100 कार्यक्रम
भारत के पश्चिमी क्षेत्र में 25 समूह और 40 कार्यक्रम
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार पूरे देश में हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।