Dry Eye Drops: बिना जाँच पड़ताल के न ले कोई भी आँखों में डालनी वाली दवा, हो सकता है नुकसान

Gaon Connection | Mar 24, 2026, 13:06 IST
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सूखी आंखों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले आई ड्रॉप्स को लेकर सरकार ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। केंद्रीय औषधि नियामक ने पाया है कि बाजार में कुछ ऐसे आई ड्रॉप्स बेचे जा रहे हैं जिन्हें जरूरी मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे उत्पादों की अनुमति तुरंत रद्द करने और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बिना मंजूरी वाले आई ड्रॉप्स पर खतरे की घंटी
बिना मंजूरी वाले आई ड्रॉप्स पर खतरे की घंटी
Dry Eye Drops: देश में सूखी आंखों (ड्राई आई) के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाले आई ड्रॉप्स को लेकर सरकार ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। केंद्रीय औषधि नियामक ने पाया है कि बाजार में कुछ ऐसे आई ड्रॉप्स बेचे जा रहे हैं जिन्हें जरूरी मंजूरी नहीं मिली है। इसको गंभीर स्वास्थ्य जोखिम मानते हुए सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि ऐसे उत्पादों की अनुमति तुरंत रद्द की जाए और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

क्या है पूरा मामला?

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अनुसार, “सोडियम हायलूरोनेट 0.3%” जैसे आई ड्रॉप्स बिना केंद्रीय मंजूरी के ही बाजार में बनाए और बेचे जा रहे हैं। यह फॉर्मूलेशन “न्यू ड्रग” की श्रेणी में आता है, यानी इसे बाजार में लाने से पहले इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता की जांच और अनुमोदन जरूरी है। लेकिन बिना इस प्रक्रिया को पूरा किए ही इनका कारोबार किया जा रहा है।

क्यों बढ़ा खतरा?

ये आई ड्रॉप्स आमतौर पर सूखी आंखों और जलन को कम करने के लिए आर्टिफिशियल टियर्स (कृत्रिम आंसू) की तरह काम करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना परीक्षण और मंजूरी वाले उत्पाद इस्तेमाल करने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है।

ऐसे ड्रॉप्स से आंखों में जलन बढ़ सकती है, सूखापन ज्यादा हो सकता है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, खासकर कंजंक्टिवाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चूंकि सूखी आंखें पहले से ही संवेदनशील होती हैं, ऐसे में अनटेस्टेड प्रोडक्ट्स स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।

विशेषज्ञों की क्या राय है?

आंखों के विशेषज्ञों के अनुसार, बिना मंजूरी वाले आई ड्रॉप्स की गुणवत्ता, स्टेरिलिटी (स्वच्छता) और सही फॉर्मूलेशन की गारंटी नहीं होती। खराब निर्माण प्रक्रिया के कारण इनमें बैक्टीरिया या अन्य अशुद्धियां हो सकती हैं, जो आंखों में संक्रमण का कारण बन सकती हैं। AIIMS कि तरफ से भी चेतावनी दी गई है कि जो आई ड्रॉप्स मंजूर हैं, उन्हें भी खोलने के एक महीने के भीतर इस्तेमाल कर लेना चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा न बढ़े।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

  1. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं:
  2. राज्यों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे उत्पादों की दी गई अनुमति (NOC) रद्द करें
  3. निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए
  4. दवा आपूर्ति श्रृंखला में निगरानी बढ़ाई जाए
  5. बिना मंजूरी के दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई जाए

आम लोगों के लिए क्या सलाह?

  1. सरकार और विशेषज्ञों ने लोगों को स्पष्ट सलाह दी है कि:
  2. आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें
  3. किसी भी दवा को खरीदने से पहले उसकी विश्वसनीयता और मंजूरी की जांच करें
  4. ऑनलाइन या सस्ते विकल्पों के लालच में बिना प्रमाणित उत्पाद न खरीदें
ड्राई आई जैसी सामान्य समस्या के लिए भी सही और सुरक्षित इलाज जरूरी है। बिना मंजूरी वाले आई ड्रॉप्स का उपयोग आंखों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। सरकार की सख्ती का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में जागरूक रहना और केवल प्रमाणित दवाओं का ही उपयोग करना सबसे जरूरी है।
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