Fertilizers की जमाखोरी पर सरकार सख्त: 6900 से अधिक लाइसेंस रद्द, 4.66 लाख से अधिक छापे
Gaon Connection | Mar 28, 2026, 17:00 IST
किसानों के हित में सरकार ने उर्वरकों की जमाखोरी व कालाबाजारी पर कड़ा रुख अपनाया है। अप्रैल 2025 से अब तक लाखों छापे मारे गए हैं और हजारों लाइसेंस रद्द किए गए हैं। इसका मकसद रबी 2025-26 सीजन में किसानों को उर्वरक आसानी से उपलब्ध कराना है।
उर्वरक की जमाखोरी और कालाबाजारी मामले में कार्रवाई तेज
सरकार किसानों को राहत देने के लिए उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई कर रही है। इस मुहिम के तहत अप्रैल 2025 से अब तक 4,66,415 जगहों पर छापेमारी हुई है और 6,802 से ज़्यादा लाइसेंस रद्द कर दिए और 821 प्राथमिकी दर्ज कीं। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया एस. पटेल ने लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उर्वरकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत ज़रूरी चीज़ माना गया है। इससे राज्य सरकारों को ऐसे गलत काम करने वालों पर कार्रवाई करने का पूरा अधिकार मिल गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग भी हर हफ़्ते इन कार्रवाइयों पर नज़र रखता है।
सरकार का मकसद है कि किसानों को सही समय पर और सही दाम पर खाद मिले। जमाखोरी और कालाबाजारी की वजह से किसानों को अक्सर खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है और उन्हें ज़्यादा पैसे भी देने पड़ते हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने ये कड़े कदम उठाए हैं।
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एक ऐसा कानून है जो कुछ ज़रूरी चीज़ों की जमाखोरी, कालाबाजारी और अनुचित वितरण को रोकता है। जब किसी चीज़ को इस अधिनियम के तहत 'आवश्यक वस्तु' घोषित किया जाता है, तो सरकार उस पर नियंत्रण रख सकती है और ज़रूरी कदम उठा सकती है।
प्रवर्तन एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं ताकि कोई भी व्यापारी या व्यक्ति किसानों को परेशान न कर सके। इन छापों से जमाखोरों और कालाबाजारियों में हड़कंप मचा हुआ है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो और वे अपनी खेती अच्छे से कर सकें।
वर्तमान रबी 2025-26 सीजन के दौरान देश में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस जैसे उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। रबी वर्ष 2025-26 के दौरान उर्वरकों की आवश्यकता, उपलब्धता और बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, यूरिया की मांग 191.72 एलएमटी थी, जबकि उपलब्धता 249.17 एलएमटी रही। इसी तरह, डीएपी की मांग 52.72 एलएमटी थी और उपलब्धता 74.55 एलएमटी रही। एमओपी की मांग 15.17 एलएमटी और उपलब्धता 18.98 एलएमटी रही, जबकि एनपीकेएस की मांग 80.34 एलएमटी और उपलब्धता 114.66 एलएमटी रही।
किसानों को किफायती दामों पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए, यूरिया सब्सिडी योजना के तहत किसानों को वैधानिक रूप से अधिसूचित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर यूरिया दिया जाता है। 45 किलो यूरिया के बैग का एमआरपी 242 रुपये प्रति बैग है (इसमें नीम कोटिंग और लागू करों का शुल्क शामिल नहीं है)। खेत में यूरिया की आपूर्ति लागत और यूरिया इकाइयों द्वारा प्राप्त शुद्ध बाजार मूल्य के बीच का अंतर भारत सरकार द्वारा यूरिया निर्माता/आयातकर्ता को सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।
सरकार फॉस्फेट और पोटैशियम (पी एवं के) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना का क्रियान्वयन जारी रखे हुए है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के अनुरूप सब्सिडी दरों को समायोजित करके किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करना है। सरकार प्रमुख उर्वरकों और कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर नजर रखती है और यदि कोई उतार-चढ़ाव होता है तो उसे पी एवं के उर्वरकों के लिए एनबीएस दरें निर्धारित करते समय ध्यान में रखती है। इसके अलावा, सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए, खरीफ 2025 और रबी 2025-26 के मौसमों के लिए एनबीएस सब्सिडी के अतिरिक्त आयातित और घरेलू दोनों प्रकार के डीएपी और आयातित टीएसपी पर 3500 रुपये प्रति मीट्रिक टन जैसे विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एक ऐसा कानून है जो कुछ ज़रूरी चीज़ों की जमाखोरी, कालाबाजारी और अनुचित वितरण को रोकता है। जब किसी चीज़ को इस अधिनियम के तहत 'आवश्यक वस्तु' घोषित किया जाता है, तो सरकार उस पर नियंत्रण रख सकती है और ज़रूरी कदम उठा सकती है।
प्रवर्तन एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं ताकि कोई भी व्यापारी या व्यक्ति किसानों को परेशान न कर सके। इन छापों से जमाखोरों और कालाबाजारियों में हड़कंप मचा हुआ है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो और वे अपनी खेती अच्छे से कर सकें।