गाँव तक पहुंचेगी 50 जरूरी सेवाएं, पंचायत स्तर पर बदलेगी जिंदगी
Gaon Connection | Feb 24, 2026, 11:52 IST
केंद्र सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर मिलने वाली अनिवार्य सेवाओं की संख्या सात से बढ़ाकर 50 करने की सिफारिश की है। पंचायतीराज मंत्रालय द्वारा गठित एक केंद्रीय समिति ने यह सुझाव दिया है, जबकि राज्य सरकारें इस संख्या को 70 से भी ऊपर ले जाना चाहती हैं। इस कदम का मकसद गांवों में रहने वाले लोगों की जिंदगी को आसान बनाना और 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के सपने को पूरा करना है।
Village Governance
आज भी देश के करोड़ों ग्रामीणों को एक साधारण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मीलों दूर शहर या तहसील जाना पड़ता है। कभी-कभी तो कई दिन चक्कर लगाने के बाद भी काम नहीं होता। इस परेशानी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार अब एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पंचायतीराज मंत्रालय की एक केंद्रीय समिति ने सिफारिश की है कि ग्राम पंचायत स्तर पर दी जाने वाली अनिवार्य सेवाओं की संख्या को सात से बढ़ाकर 50 किया जाए। यानी अब गाँव का आम नागरिक अपने घर के पास ही ज्यादा से ज्यादा सरकारी काम करवा सकेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को तभी पाया जा सकता है जब देश का गाँव-गाँव तरक्की करे। गांवों में ईज ऑफ लिविंग यानी आसान जीवन को इस पूरी योजना का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अभी देश भर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों में कुल मिलाकर 6,600 से भी ज्यादा सेवाएं दी जा रही हैं। लेकिन इनमें एकरूपता नहीं है। किसी राज्य में एक सेवा आसानी से मिल जाती है तो किसी राज्य में वही सेवा पाने के लिए लोगों को भटकना पड़ता है। कहीं डिजिटल सुविधा है तो कहीं सब कुछ कागजों पर चलता है। शिकायत करने का तरीका भी हर जगह अलग-अलग है।
इन सब खामियों को दूर करने के लिए पंचायतीराज मंत्रालय ने सभी राज्यों को साथ लेकर एक केंद्रीय समिति बनाई। इस समिति का काम था कि वह देखे कि ग्राम पंचायत स्तर पर कौन सी सेवाएं दी जा रही हैं, उनकी क्या हालत है और इन्हें कैसे बेहतर किया जा सकता है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया कि कोर कॉमन सर्विसेज यानी वे अनिवार्य सेवाएं जो हर पंचायत में मिलनी ही चाहिए, उनकी संख्या सात से बढ़ाकर 50 की जाए। इन सेवाओं में हर नागरिक की रोजमर्रा की जरूरतें शामिल होंगी।
दूसरी तरफ राज्य सरकारें और भी आगे जाना चाहती हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन सेवाओं की संख्या 70 से भी ज्यादा होनी चाहिए। राज्यों का कहना है कि उनके यहां की स्थानीय जरूरतें भी अलग हैं और उन्हें भी इस सूची में जगह मिलनी चाहिए।
समिति ने जिन सेवाओं पर खास ध्यान देने की बात कही है उनमें सबसे पहले निवास प्रमाण पत्र है, जिससे नागरिक अपनी पहचान और पते की पुष्टि आसानी से करवा सकें। इसके साथ ही व्यापार लाइसेंस की सुविधा भी पंचायत स्तर पर मिलेगी ताकि छोटे दुकानदार और कारोबारी बिना दफ्तरों के चक्कर लगाए अपना काम शुरू कर सकें।
जमीन से जुड़े कागजात यानी भूमि अभिलेखों में बदलाव की सेवा भी इसमें शामिल होगी। इससे संपत्ति के झगड़े कम होंगे और पारदर्शिता आएगी। पानी के कनेक्शन की सुविधा भी पंचायत स्तर पर मिलेगी जिससे बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।
सबसे जरूरी बात यह है कि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और पेंशन की सुविधा भी अब सीधे पंचायत से मिल सकेगी। इससे इन कमजोर वर्गों को अपने हक के लिए बड़े दफ्तरों में नहीं भटकना पड़ेगा।
पंचायतीराज मंत्रालय इन सिफारिशों के आधार पर एक ब्लूप्रिंट यानी विस्तृत योजना तैयार कर रहा है। इस योजना के तहत तय किया जाएगा कि कौन सी सेवाएं किस तरह पंचायत स्तर पर दी जाएंगी, उनकी डिजिटल ट्रैकिंग कैसे होगी और शिकायत मिलने पर उसका समाधान कैसे किया जाएगा।
इस पूरी पहल का सबसे बड़ा फायदा देश के उन करोड़ों लोगों को होगा जो गांवों में रहते हैं और छोटे-छोटे कामों के लिए शहर जाने पर मजबूर होते हैं। अगर यह योजना सही तरीके से लागू हो जाती है तो ग्राम पंचायतें सरकार और आम नागरिक के बीच की सबसे मजबूत कड़ी बन जाएंगी और गांवों में जीवन सचमुच आसान हो जाएगा।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
अभी देश भर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों में कुल मिलाकर 6,600 से भी ज्यादा सेवाएं दी जा रही हैं। लेकिन इनमें एकरूपता नहीं है। किसी राज्य में एक सेवा आसानी से मिल जाती है तो किसी राज्य में वही सेवा पाने के लिए लोगों को भटकना पड़ता है। कहीं डिजिटल सुविधा है तो कहीं सब कुछ कागजों पर चलता है। शिकायत करने का तरीका भी हर जगह अलग-अलग है।
इन सब खामियों को दूर करने के लिए पंचायतीराज मंत्रालय ने सभी राज्यों को साथ लेकर एक केंद्रीय समिति बनाई। इस समिति का काम था कि वह देखे कि ग्राम पंचायत स्तर पर कौन सी सेवाएं दी जा रही हैं, उनकी क्या हालत है और इन्हें कैसे बेहतर किया जा सकता है।
समिति ने क्या कहा?
दूसरी तरफ राज्य सरकारें और भी आगे जाना चाहती हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन सेवाओं की संख्या 70 से भी ज्यादा होनी चाहिए। राज्यों का कहना है कि उनके यहां की स्थानीय जरूरतें भी अलग हैं और उन्हें भी इस सूची में जगह मिलनी चाहिए।
कौन सी सेवाएं होंगी शामिल?
जमीन से जुड़े कागजात यानी भूमि अभिलेखों में बदलाव की सेवा भी इसमें शामिल होगी। इससे संपत्ति के झगड़े कम होंगे और पारदर्शिता आएगी। पानी के कनेक्शन की सुविधा भी पंचायत स्तर पर मिलेगी जिससे बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।
सबसे जरूरी बात यह है कि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और पेंशन की सुविधा भी अब सीधे पंचायत से मिल सकेगी। इससे इन कमजोर वर्गों को अपने हक के लिए बड़े दफ्तरों में नहीं भटकना पड़ेगा।
आगे क्या होगा?
इस पूरी पहल का सबसे बड़ा फायदा देश के उन करोड़ों लोगों को होगा जो गांवों में रहते हैं और छोटे-छोटे कामों के लिए शहर जाने पर मजबूर होते हैं। अगर यह योजना सही तरीके से लागू हो जाती है तो ग्राम पंचायतें सरकार और आम नागरिक के बीच की सबसे मजबूत कड़ी बन जाएंगी और गांवों में जीवन सचमुच आसान हो जाएगा।