ज्यादा फल, कम परेशानी: अमरूद की छंटाई का वो आसान तरीका जो हर किसान को जानना चाहिए
Gaon Connection | Feb 23, 2026, 18:38 IST
अमरूद फलों में एक खास जगह रखता है। इसमें पोटेशियम, सोडियम और विटामिन A व C भरपूर मात्रा में होते हैं। लेकिन किसानों के लिए असली चुनौती सिर्फ पेड़ उगाना नहीं है बल्कि उसे सही आकार में रखना है। बिना देखभाल के अमरूद का पौधा इतना घना और अनियमित हो जाता है कि फल बहुत कम आते हैं। यहीं पर काम आता है छत्र प्रबंधन यानी कैनोपी मैनेजमेंट।
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अमरूद की भरपूर और अच्छी फसल लेने के लिए सही छंटाई, एक देसी पेस्ट और फसल चक्र में एक छोटा बदलाव काफी है। अमरूद एक बेहतरीन फल है जिसमें पोटेशियम, सोडियम और विटामिन A व C भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। लेकिन बिना देखभाल के अमरूद का पौधा इतना घना हो जाता है कि फल बहुत कम आते हैं। इसीलिए छत्र प्रबंधन यानी कैनोपी मैनेजमेंट बहुत जरूरी है।
जब पौधे में बहुत ज्यादा शाखाएं हो जाती हैं तो अंदर तक धूप नहीं पहुंच पाती। जिन नई कोपलों पर फल आते हैं वो बहुत कम निकलती हैं। इसलिए मार्च के पहले और दूसरे पखवाड़े में पौधे की सही छंटाई करना जरूरी है। सही ढांचे के लिए मुख्य तने से तीन से चार प्राथमिक शाखाएं रखें। हर प्राथमिक शाखा पर चार छोटी शाखाएं छोड़ें। ध्यान रहे कि कोई भी शाखा दूसरी शाखा के ठीक ऊपर या नीचे न हो। अगर एक शाखा दूसरे को छाया में रखेगी तो सभी नई कोपलें सिर्फ ऊपरी हिस्से में आएंगी और नीचे की शाखाएं बेकार रहेंगी।
अमरूद में फूल अप्रैल महीने में नई कोपलों पर आने लगते हैं। अप्रैल में इन नई कोपलों को नीचे से सिर्फ एक जोड़ी पत्ती छोड़कर ऊपर से काट दें। इससे बरसात की फसल नहीं आएगी लेकिन उन्हीं कोपलों पर जुलाई में दोबारा फूल आएंगे। यही फूल सर्दियों में अच्छी और गुणवत्ता वाली फसल देंगे। इस तरीके का एक और बड़ा फायदा यह है कि फल मक्खी का प्रकोप बरसात में सबसे ज्यादा होता है। बरसाती फसल न लेने से किसान बिना ज्यादा कीटनाशक के जैविक अमरूद उगा सकते हैं जो बाजार में अच्छे दाम पर बिकता है।
छंटाई के बाद हर कटे हुए हिस्से पर बोर्डो पेस्ट लगाना बहुत जरूरी है। यह पेस्ट पौधे को बीमारियों से बचाता है और तना गलन की समस्या को भी रोकता है। बनाने का तरीका बेहद आसान है। 1 किलो बिना बुझा हुआ चूना, 1 किलो नीला थोता यानी कॉपर सल्फेट और 10 लीटर पानी मिलाएं। मिश्रण दही जैसा गाढ़ा हो जाएगा। यह तैयार है या नहीं यह जांचने के लिए एक जंग लगी कील डालें। अगर पांच मिनट में कील की जंग उतर जाए तो पेस्ट तैयार है। इसे सभी कटी हुई शाखाओं और तने के पास जरूर लगाएं।
मार्च में छंटाई करें और पौधे को सही आकार दें। अप्रैल में नई कोपलें काटें ताकि सर्दी की अच्छी फसल मिले। हर कटे हुए हिस्से पर बोर्डो पेस्ट लगाएं। शाखाओं की घनता को नियंत्रित रखें ताकि धूप अंदर तक पहुंचे। इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखने से अमरूद की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बढ़ेंगी।
जब पौधे में बहुत ज्यादा शाखाएं हो जाती हैं तो अंदर तक धूप नहीं पहुंच पाती। जिन नई कोपलों पर फल आते हैं वो बहुत कम निकलती हैं। इसलिए मार्च के पहले और दूसरे पखवाड़े में पौधे की सही छंटाई करना जरूरी है। सही ढांचे के लिए मुख्य तने से तीन से चार प्राथमिक शाखाएं रखें। हर प्राथमिक शाखा पर चार छोटी शाखाएं छोड़ें। ध्यान रहे कि कोई भी शाखा दूसरी शाखा के ठीक ऊपर या नीचे न हो। अगर एक शाखा दूसरे को छाया में रखेगी तो सभी नई कोपलें सिर्फ ऊपरी हिस्से में आएंगी और नीचे की शाखाएं बेकार रहेंगी।