भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान: किसानों के लिए जरूरी सलाह मार्च में बुवाई की तैयारी और फसलों की देखभाल
Gaon Connection | Feb 13, 2026, 15:52 IST
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को 18 फरवरी तक मौसम के अनुसार खेती के कई जरूरी काम करने की सलाह दी है। मार्च में बोई जाने वाली दालों के बीज इकट्ठा करने से लेकर गेहूं में रोग की रोकथाम तक, किसानों को कई काम करने होंगे।
कृषि भौतिकी संभाग के वैज्ञानिकों ने इस हफ्ते किसानों को मौसम के हिसाब से कई जरूरी काम करने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि किसान अभी से मार्च महीने में बोई जाने वाली मूंग और उड़द की फसलों के लिए अच्छे बीज इकट्ठा करना शुरू कर दें। मूंग के लिए पूसा विशाल, पूसा बैसाखी जैसी किस्में और उड़द के लिए पंत उड़द-19, पंत उड़द-30 जैसी किस्में अच्छी मानी जाती हैं। वैज्ञानिकों ने खास तौर पर कहा कि बीज बोने से पहले उन्हें राईजोबीयम और फास्फोरस घोल वाले बैक्टीरिया से जरूर उपचारित करें इससे पैदावार अच्छी होगी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली के क्षेत्रीय मौसम केन्द्र से मिली जानकारी के अनुसार 14 फरवरी से 18 फरवरी तक मौसम सूखा रहेगा। इस दौरान बारिश की कोई संभावना नहीं है।तापमान की बात करें तो अधिकतम तापमान 27-28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा, जबकि न्यूनतम तापमान 11 डिग्री से शुरू होकर धीरे-धीरे 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाए रहेंगे। हवा की गति 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है। हवा की दिशा शुरुआत में पूर्व-दक्षिण-पूर्व से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बदल जाएगी। हवा में नमी का स्तर 65 से 78 प्रतिशत के बीच रहेगा। मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि इस हफ्ते कुल संचयी वर्षा शून्य रहने की उम्मीद है, यानी बारिश बिल्कुल नहीं होगी।
मौसम को देखते हुए अभी भिंडी की जल्दी बुवाई का सही समय है। किसान ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका जैसी किस्मों की बुवाई कर सकते हैं। एक एकड़ में करीब 10-15 किलो बीज की जरूरत होगी। बुवाई से पहले खेत में पर्याप्त नमी का ध्यान रखना जरूरी है। इसके अलावा फ्रेंच बीन और गर्मी के मौसम वाली मूली की भी सीधी बुवाई के लिए अभी का तापमान बिल्कुल सही है। टमाटर, मिर्च और कद्दू जैसी सब्जियों के तैयार पौधों को इस सप्ताह खेत में लगाया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को चेतावनी दी है कि वे गेहूं की फसल में रतुआ रोग की लगातार निगरानी करते रहें। काला, भूरा या पीला रतुआ दिखने पर तुरंत प्रोपिकोनेजोल दवा का छिड़काव करें। विशेषज्ञों ने बताया कि पीला रतुआ 10-20 डिग्री तापमान में फैलता है, जबकि 25 डिग्री से ऊपर तापमान में यह नहीं फैलता। भूरा रतुआ के लिए 15-25 डिग्री तापमान और नमी वाला मौसम जरूरी है।
इस मौसम में सब्जियों और सरसों की फसल में चेपा कीट लगने का खतरा रहता है। किसानों को इसकी निगरानी करनी चाहिए। सब्जियों में इमिडाक्लोप्रिड दवा का छिड़काव सब्जी तोड़ने के बाद करें और छिड़काव के बाद एक हफ्ते तक सब्जी न तोड़ें।
टमाटर के फलों को फली छेदक कीट से बचाने के लिए किसान खेत में पक्षियों के बैठने की जगह बनाएं। खराब फलों को इकट्ठा कर जमीन में दबा दें। साथ ही फिरोमोन ट्रैप भी लगाएं। बैंगन की फसल में भी प्ररोह और फल छेदक कीट का खतरा रहता है। प्रभावित फलों और तनों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। अगर कीट की संख्या ज्यादा हो तो स्पिनोसेड दवा का छिड़काव करें।
प्याज की फसल में थ्रिप्स कीट की निगरानी जरूरी है। कीट दिखने पर कानफीड़ोर दवा को चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल के साथ मिलाकर छिड़काव करें।गेंदे में इस मौसम में फूल सड़ने की बीमारी लगने की संभावना बढ़ जाती है। अगर ऐसे लक्षण दिखें तो कार्बंडीजम दवा का छिड़काव करें। कृषि विशेषज्ञों ने सभी किसानों से अपील की है कि वे बीज हमेशा प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें और मौसम के अनुसार खेती के काम समय पर करें।