Arka Citrus Special तकनीक से कर्नाटक के कागजी नींबू की पैदावार दोगुनी, किसानों की आय में से भारी वृद्धि
Gaon Connection | Feb 26, 2026, 16:39 IST
कर्नाटक के विजयपुरा के नींबू किसानों की जिंदगी में नया मोड़ आया है। ICAR द्वारा विकसित ‘अर्का सिट्रस स्पेशल’ तकनीक अपनाने से न केवल फसल की पैदावार बढ़ी है, बल्कि किसानों की आमदनी भी पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। यह उन्नत तकनीक कम उपजाऊ मिट्टी और सीमित पानी जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करती है। ICAR के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने कागजी नींबू की खेती को न सिर्फ अधिक उपज और आय वाला व्यवसाय बनाया है, बल्कि इसे पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ और किसान के अनुकूल भी साबित किया है । एक उदाहरण जो अन्य बागवानी फसलों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
‘Arka Citrus Special’ से किसान की आमदनी और पैदावार बढ़ी
विजयपुरा, कर्नाटक के कागजी नींबू किसानों की किस्मत ICAR की 'Arka Citrus Special' तकनीक से चमक उठी है। इस नई तकनीक ने न केवल नींबू की पैदावार को बढ़ाया है, बल्कि किसानों की आय में भी भारी इजाफा किया है। पहले जहाँ प्रति पेड़ 800 फल मिलते थे, वहीं अब यह संख्या 1000-2000 तक पहुंचने की उम्मीद है। यह तकनीक मिट्टी की कमी, पानी की कमी और शुष्क जलवायु जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसानों के लिए वरदान साबित हुई है।
विजयपुरा का कागजी नींबू अपनी पतली छिलके वाली बनावट, अधिक रस और बेहतर पोषण के लिए मशहूर है। इसकी माँग स्थानीय बाजार के साथ-साथ अचार, शर्बत, 'कंसंट्रेट' (Concentrate) और औषधीय उद्योगों में भी खूब है। 2023 में इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलने से इसकी पहचान और भी बढ़ी है। लेकिन पारंपरिक खेती के तरीकों से किसानों को उतना मुनाफा नहीं मिल पा रहा था जितना मिलना चाहिए था।
इस समस्या का समाधान करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 'Arka Citrus Special' नाम की एक खास माइक्रोन्यूट्रीएंट तकनीक विकसित की है। इसमें जिंक, बोरॉन, मैंगनीज़, लोहा, तांबा जैसे जरूरी तत्व हैं। ये तत्व पौधे को स्वस्थ रखते हैं, फूल लाने और फल देने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
किसानों को बताया गया दिक्कत कहाँ?
ICAR के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), इंडी ने 2018 से 2025 के बीच विजयपुरा जिले के कई गांवों में 80 'Front Line Demonstrations' (FLDs) चलाए। इन FLDs में मिट्टी की पोषक तत्व की कमी, पानी की कमी और शुष्क जलवायु जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा गया। किसानों को रोपाई से पहले अच्छी सिंचाई, हल्की छंटाई, GA₃ का इस्तेमाल, फूलों को नियंत्रित करने के लिए Lihocin का छिड़काव और नियमित रूप से Arka Citrus Special का छिड़काव करने की सलाह दी गई। साथ ही, कीटों पर नियंत्रण भी इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
इन प्रयासों का असर जल्द ही दिखने लगा। करीब 30 से 45 दिनों में ही किसानों ने देखा कि फल कम झड़ रहे हैं, फलों का आकार और रंग बेहतर हो रहा है, रस की मात्रा बढ़ रही है और कीटों का असर भी कम हो रहा है। FLDs वाले इलाकों में पौधों में पोषक तत्वों की कमी 22.5% तक कम हुई और कीटों का असर 15-20% तक घट गया।
सबसे बड़ा फायदा उत्पादन और आय में देखने को मिला। FLD वाले खेतों में औसतन 21.33 टन प्रति हेक्टेयर उपज मिली, जो पारंपरिक तरीकों से काफी ज्यादा थी। इन फलों की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण बाजार में इन्हें ₹250–₹500 प्रति 50 किलो तक का अतिरिक्त मूल्य मिला। इससे किसानों का लाभ-लागत अनुपात 2018 में 4.77 से बढ़कर 2024 में 9.60 हो गया। किसानों की आमदनी में भारी वृद्धि हुई, जो औसतन ₹4,23,427 प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पहले यह ₹2,78,852 प्रति हेक्टेयर थी।
इस तकनीक की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए ICAR–KVK ने 'Arka Citrus Special' के उत्पादन का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया। सितंबर 2022 में विजयपुरा-II (Indi) केंद्र पर एक उत्पादन इकाई स्थापित की गई। जनवरी 2023 से अगस्त 2025 के बीच करीब 2,700 किलो 'Arka Citrus Special' का उत्पादन हुआ और लगभग 1,525 किसानों को बांटा गया। इससे 214 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने वाले किसानों को फायदा पहुँचा।
किसानों का कहना है कि इस तकनीक को अपनाने के बाद खेती में रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता 20-30% तक कम हो गई है। मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ है और फलों की शेल्फ लाइफ (बाजार में टिकने की अवधि) भी बढ़ी है। यह तकनीक सिर्फ विजयपुरा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि किसान-से-किसान सीख, खेत दिवस और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से आस-पास के इलाकों में भी फैल रही है, जिससे नींबू की खेती का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है।
क्यों मशहूर है विजयपुरा का कागजी नींबू?
कागजी नीबू
क्या है Arka Citrus Special नामक माइक्रोन्यूट्रीएंट तकनीक?
किसानों को बताया गया दिक्कत कहाँ?
Arka Citrus Special नामक एक उन्नत माइक्रोन्यूट्रीएंट तकनीक विकसित
पोषक तत्वों की कमी हुई दूर
कागजी नींबू को मिला बढ़िया मूल्य
फलों की गुणवत्ता हुई बेहतर
2 सालों में हजारों किलो कागजी नींबू का बढ़ा उत्पादन
रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता हुई कम
रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता 20–30% तक कम