India Israel Special Strategic Partnership: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दो दिवसीय इजरायल दौरे के दौरान भारत और इजरायल ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा देने पर सहमति जताई। कुल 17 समझौतों और 10 अहम घोषणाओं के साथ यह दौरा रक्षा, तकनीक और अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से बहुत अहम माना जा रहा है। अब दोनों देशों के बीच सहयोग सिर्फ रक्षा और सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, मत्स्य पालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, श्रम और साइबर सुरक्षा जैसे कई नए क्षेत्रों में भी फैलेगा।
किन देशों के बीच होती है 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’
यह ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ उन देशों के बीच होती है जहाँ रक्षा, तकनीक, नए आविष्कार, आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच मेलजोल जैसे कई स्तरों पर लंबे समय तक गहरा तालमेल रहता है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि दोनों देश अपने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नए आविष्कारों से विकास और सुरक्षा सहयोग के आधार पर भविष्य में मिलकर काम करेंगे।
कृषि क्षेत्र में हुए कौनसे समझौते?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और इजरायल की अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी MASHAV के बीच भारत-इजरायल नवाचार केंद्र (India-Israel Innovation in Agriculture Center – IINCA) बनाने का समझौता हुआ है। इस केंद्र में सेंसर, ड्रोन और डेटा का इस्तेमाल करके खेती को बेहतर बनाने वाली ‘प्रिसिजन फार्मिंग’ तकनीक पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, पानी बचाने वाली सैटेलाइट सिंचाई प्रणाली, छोटे किसानों के लिए आधुनिक मशीनें, कीटनाशकों का कम इस्तेमाल करने वाले तरीके, बेहतर बीजों का आदान-प्रदान और फसल कटाई के बाद की तकनीकों पर भी काम होगा। इजरायल अपनी कम जमीन और पानी के बावजूद खेती में बहुत आगे है। ड्रिप इरिगेशन और हाई-टेक खेती जैसी उसकी तकनीकें भारत के लिए, खासकर सूखे वाले इलाकों में, बहुत फायदेमंद साबित होंगी।
मत्स्य पालन और जलीय कृषि में बढ़ेगा सहयोग
कृषि के अलावा, मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने हाथ मिलाया है। इस सहयोग से आधुनिक मछली पालन के तरीके और टिकाऊ जलीय कृषि को बढ़ावा मिलेगा। इसमें मछली उत्पादन की नई प्रणालियां, बीमारियों से बचाव के उपाय, समुद्री खेती (मैरीकल्चर) को बढ़ावा, समुद्री शैवाल (सीवीड) उत्पादन की नई तकनीकें, संयुक्त शोध और व्यापार बढ़ाना शामिल है। भारत के तटीय इलाकों और अंदरूनी जल क्षेत्रों में मछली उत्पादन बढ़ रहा है। इजरायल की तकनीक से उत्पादन, बीमारियों पर काबू और निर्यात की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे मछुआरों की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए मौके बनेंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
कृषि और मत्स्य पालन के साथ-साथ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसमें AI की मदद से फसलों का पूर्वानुमान लगाना, पानी के प्रबंधन के लिए डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करना और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना शामिल है। इजरायल को ‘स्टार्टअप नेशन’ कहा जाता है और भारत तेजी से टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। दोनों देशों के मिलकर काम करने से दुनिया भर में नए आविष्कार हो सकते हैं।
MSME क्षेत्र में बढ़ेगी मजबूती
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी सहयोग की योजना है। छात्र एक-दूसरे के देशों में जाकर पढ़ाई कर सकेंगे, संयुक्त शोध परियोजनाएं होंगी और तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाएंगे। श्रम गतिशीलता के तहत, इजरायल में कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी बात हुई है। वित्तीय सेवाओं और निवेश में सहयोग से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से भारत में खेती की पैदावार बढ़ेगी, पानी और दूसरे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा, नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा, निर्यात बढ़ेगा और किसानों व मछुआरों की आय में भी वृद्धि होगी। भारत जैसे देश के लिए, जहाँ बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, यह साझेदारी एक बड़ा बदलाव ला सकती है।