Fishery Sector: सीफूड एक्सपोर्ट में भारत की मजबूत पकड़, किसानों और मछुआरों को मिल रहा फायदा
Gaon Connection | Apr 03, 2026, 14:52 IST
भारत सरकारी की भविष्य में योजना है कि भारत को एक प्रीमियम सीफूड निर्यातक बनाना है। इसके लिए भारत सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रही है जिससे मछली उत्पादन और निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही सरकार गुणवत्ता और विविधीकरण पर जोर दे रही है।
भारत का मत्स्य पालन (फिशरी) क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा
भारत का मत्स्य पालन (फिशरी) क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। साल 2015 से सरकार ने इसमें ₹39,272 करोड़ का निवेश किया है, जिससे यह क्षेत्र अब खाद्य सुरक्षा, रोजगार और निर्यात आय का बड़ा स्रोत बन गया है। करीब 3 करोड़ मछुआरे और मछली किसान इससे सीधे जुड़े हैं, और इससे जुड़ी दूसरी गतिविधियों में भी लाखों लोगों को काम मिलता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जलीय कृषि उत्पादक है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसका 8% योगदान है। पिछले दशक में यह क्षेत्र पारंपरिक से आगे बढ़कर एक मजबूत व्यावसायिक क्षेत्र बन गया है। मछली उत्पादन 2019-20 में 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया है, यानी हर साल औसतन 7% की वृद्धि।
भारत का सीफूड निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है। पिछले 11 वर्षों में इसमें औसतन 7% की वृद्धि हुई है। 2013-14 में ₹30,213 करोड़ का निर्यात अब 2024-25 में बढ़कर ₹62,408 करोड़ हो गया है। इसमें झींगा (श्रिंप) का सबसे बड़ा योगदान है, जो ₹43,334 करोड़ का है। भारत 350 से ज्यादा प्रकार के सीफूड उत्पाद लगभग 130 देशों में भेजता है। अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है, जहाँ 36.42% निर्यात होता है। इसके बाद चीन, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व आते हैं।
सबसे ज्यादा निर्यात फ्रोज़न श्रिंप का होता है, फिर फ्रोज़न मछली, स्क्विड, सूखे उत्पाद, कटलफिश, सुरिमी और ताजा/ठंडा सीफूड का नंबर आता है। वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स का निर्यात 74.2 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया है, जो कुल का 11% है।
सरकार अब सिर्फ कुछ उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग प्रजातियों और उत्पादों को बढ़ावा दे रही है, ताकि वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ मजबूत हो। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, खारे पानी में खेती, नई तकनीक, बीमारी नियंत्रण और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही, कोल्ड स्टोरेज, मछली बंदरगाह और प्रोसेसिंग सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है। सरकार टूना, सीबास, कोबिया, पॉम्पानो, मड क्रैब, तिलापिया, ग्रुपर और टाइगर श्रिंप जैसी महंगी प्रजातियों को बढ़ावा दे रही है।
भारत अपने सीफूड को अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार तैयार कर रहा है, ताकि बड़े देशों में निर्यात में कोई दिक्कत न आए। खासकर अमेरिका के नियमों को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है। 2025 में भारत को अमेरिका से मंजूरी भी मिल चुकी है, जिससे वहाँ निर्यात जारी रहेगा। समुद्री जीवों की सुरक्षा के लिए ट्रॉलर में खास उपकरण (TED) लगाए जा रहे हैं। साथ ही, एक डिजिटल सिस्टम शुरू किया गया है जिससे पूरे उत्पादन और प्रोसेसिंग पर नजर रखी जा सके और गुणवत्ता बनी रहे।
आने वाले पांच साल में सरकार का लक्ष्य है कि भारत ज्यादा वैल्यू वाले सीफूड उत्पाद बनाए और नए बाजारों तक पहुंचे। इसके लिए प्रोसेसिंग सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी, लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी और गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। यूके, यूरोप, आसियान और मध्य पूर्व जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने की योजना है। कोल्ड स्टोरेज, डिजिटल सिस्टम और बेहतर सप्लाई चेन के जरिए भारत को एक भरोसेमंद और प्रीमियम सीफूड निर्यातक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
निर्यात में बढ़ोतरी और प्रमुख उत्पाद
भारत का सीफूड निर्यात
किन सीफूड का होता है निर्यात?
| क्रम | उत्पाद |
|---|---|
| 1 | फ्रोज़न श्रिंप (सबसे प्रमुख) |
| 2 | फ्रोज़न मछली |
| 3 | स्क्विड |
| 4 | सुखाए हुए उत्पाद |
| 5 | फ्रोज़न कटलफ़िश |
| 6 | सुरिमी आधारित उत्पाद |
| 7 | ताजा एवं ठंडा सीफूड |
गुणवत्ता पर जोर
अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन और व्यापार आसान बनाना
उत्पादन ,गुणवत्ता और प्रोसेसिंग पर नजर