Iran-Israel तनाव का भारत के बासमती चावल निर्यात पर असर, किसानों की बढ़ सकती है आर्थिक चिंताएँ
Preeti Nahar | Mar 02, 2026, 12:16 IST
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से भारत के बासमती चावल निर्यात पर संकट आ गया है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों से तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल और रुपया दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ईरान भारत का बड़ा बासमती बाजार है और वहां की बिगड़ती स्थिति के कारण नई खेप रोक दी गई है। जानिए कैसे पड़ेगा भारत में असर और किन अत्पादों का होता है दोनों देशों के बीच व्यापार।
बासमती के निर्यात पर मंडराता संकट
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों और ईरानी ऑयल फील्ड्स पर संभावित खतरे ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। एस जियोपॉलिटिक्स का सीधा असर भारत के आर्थिक हितों पर पड़ रहा है, खासकर बासमती चावल के निर्यात पर, क्योंकि ईरान भारत का एक बड़ा बासमती बाजार है। तेल की कीमतों में उछाल से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है। बासमती चावल के निर्यात पर संकट मंडरा रहा है, क्योंकि ईरान में इसकी बड़ी मांग है और युद्ध की आशंका से पहले भारी ऑर्डर दिए गए थे।
तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए तेल महंगा होने का असर महंगाई, परिवहन लागत और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर पड़ता है। यदि हालात लंबे समय तक बिगड़े रहते हैं तो इससे भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव भी बढ़ सकता है।
ईरान में बासमती चावल की बहुत माँग है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ईरान को जाता है। वहीं, करीब 20 प्रतिशत निर्यात इराक को होता है। दोनों देशों को मिलाकर हर साल 20 लाख टन से ज्यादा बासमती चावल भेजा जाता है। इसकी कीमत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टेटिस्टिक्स (DGCIS) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को लगभग 8,897 करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद निर्यात किए। इसमें 6,374 करोड़ रुपये का हिस्सा केवल बासमती चावल का था। कुल बासमती निर्यात में ईरान की हिस्सेदारी लगभग 12.67 प्रतिशत बताई गई है। पिछले वर्ष भारत ने करीब 10,944 करोड़ रुपये का बासमती चावल केवल ईरान को निर्यात किया था।
APEDA के अनुसार भारत के कृषि/प्रोसेस्ड उत्पादों के प्रमुख निर्यात- भारत ने 2024-25 में कुल ~60.65 लाख MT बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत ₹50,312.01 करोड़ ($5.94 बिलियन) थी। ईरान भारतीय बासमती निर्यात में तीसरा बड़ा खरीदार है, जिसका हिस्सा लगभग 12.67% था और ₹6,374 करोड़ मूल्य का निर्यात हुआ।
(Source- डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टेटिस्टिक्स DGCIS)
युद्ध जैसे हालातों में किसी भी देश से कोई खेप दूसरे देश में भेजी जाती है तो उसे कुछ समय के लिए रोकना पड़ता है। ऐसा ही हो रहा है, ईरान में हालात बिगड़ते के कारण भारत से ईरान जाने वाली नई खेप लगभग रुक गई है। चावल की एक बड़ी खेप समुद्री मार्ग से ट्रांजिट में है। मौजूदा हालात में यह स्पष्ट नहीं है कि ईरानी आयातक इनकी डिलीवरी ले पाएंगे या नहीं।
कृषि एक्सपर्ट विजय बताते हैं, "यदि भुगतान में देरी होती है या माल वापस लौटता है, तो व्यापारियों को भारी नुकसान हो सकता है। बासमती चावल भारत के लिए केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों और व्यापारियों की आजीविका का आधार है। अगर शिपमेंट रुकती है या वापिस आती है तो भारतीय बाजार में सप्लाई बढ़ेगी। सप्लाई बढ़ने से बासमति के दाम गिर सकते हैं। भारत में बासमती उत्पादन मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों पर निर्भर है। यदि निर्यात प्रभावित होता है तो इसका सीधा असर किसानों की आय, मिलर्स और निर्यातकों की कमाई पर पड़ेगा।घरेलू बाजार में कीमतों में गिरावट की आशंका भी बन सकती है, जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। मौजूदा हालात में स्थिति पूरी तरह अनिश्चित है।"
इसके अलावा भारत से ईरान को होने वाला चाय निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 700 करोड़ रुपये की भारतीय चाय ईरान भेजी गई थी, जो अब जोखिम में है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इराक को होने वाला निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। पश्चिम एशिया के कई देश भारतीय बासमती के बड़े खरीदार हैं। क्षेत्रीय अस्थिरता से शिपिंग बीमा प्रीमियम बढ़ सकते हैं, समुद्री मार्ग महंगे हो सकते हैं और आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
ईरान में बासमती चावल की बहुत माँग है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ईरान को जाता है। वहीं, करीब 20 प्रतिशत निर्यात इराक को होता है। दोनों देशों को मिलाकर हर साल 20 लाख टन से ज्यादा बासमती चावल भेजा जाता है। इसकी कीमत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टेटिस्टिक्स (DGCIS) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को लगभग 8,897 करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद निर्यात किए। इसमें 6,374 करोड़ रुपये का हिस्सा केवल बासमती चावल का था। कुल बासमती निर्यात में ईरान की हिस्सेदारी लगभग 12.67 प्रतिशत बताई गई है। पिछले वर्ष भारत ने करीब 10,944 करोड़ रुपये का बासमती चावल केवल ईरान को निर्यात किया था।
APEDA के अनुसार भारत के कृषि/प्रोसेस्ड उत्पादों के प्रमुख निर्यात- भारत ने 2024-25 में कुल ~60.65 लाख MT बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत ₹50,312.01 करोड़ ($5.94 बिलियन) थी। ईरान भारतीय बासमती निर्यात में तीसरा बड़ा खरीदार है, जिसका हिस्सा लगभग 12.67% था और ₹6,374 करोड़ मूल्य का निर्यात हुआ।
भारत से ईरान को प्रमुख निर्यात (2024-25)
| उत्पाद | निर्यात मूल्य (₹ करोड़) | मात्रा (मीट्रिक टन) |
|---|---|---|
| बासमती चावल | 6,374.29 | 8,55,133 |
| अन्य मिल्ड चावल | 591.56 | 1,38,816 |
| ताजे फल | 469.44 | 1,14,188 |
| चाय | 320.22 | 10,987 |
| दालें | 271.48 | 34,433 |
| मसाले | 239.54 | 13,219 |
| चीनी | 126.13 | 26,903 |
| भैंस का मांस | 118.15 | 4,213 |
| मूंगफली | 89.47 | 9,933 |
| प्रोसेस्ड फूड | 57.67 | 871 |
| गैर-बासमती चावल | 34.81 | 7,817 |
| तिल के बीज | 34.17 | 2,111 |
| कॉफी | 33.88 | 848 |
| प्रोसेस्ड फूड & जूस | 24.97 | 2,269 |
| हर्बल प्रोडक्ट | 23.22 | 1,001 |
| डेयरी प्रोडक्ट | 19.93 | 487 |
| अरंडी का तेल | 15.47 | 1,126 |
| तंबाकू | 5.83 | 145 |
| फल-सब्जियों के बीज | 3.68 | 331 |
| काजू | 3.32 | 54 |
युद्ध जैसे हालातों में किसी भी देश से कोई खेप दूसरे देश में भेजी जाती है तो उसे कुछ समय के लिए रोकना पड़ता है। ऐसा ही हो रहा है, ईरान में हालात बिगड़ते के कारण भारत से ईरान जाने वाली नई खेप लगभग रुक गई है। चावल की एक बड़ी खेप समुद्री मार्ग से ट्रांजिट में है। मौजूदा हालात में यह स्पष्ट नहीं है कि ईरानी आयातक इनकी डिलीवरी ले पाएंगे या नहीं।
कृषि एक्सपर्ट विजय बताते हैं, "यदि भुगतान में देरी होती है या माल वापस लौटता है, तो व्यापारियों को भारी नुकसान हो सकता है। बासमती चावल भारत के लिए केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों और व्यापारियों की आजीविका का आधार है। अगर शिपमेंट रुकती है या वापिस आती है तो भारतीय बाजार में सप्लाई बढ़ेगी। सप्लाई बढ़ने से बासमति के दाम गिर सकते हैं। भारत में बासमती उत्पादन मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों पर निर्भर है। यदि निर्यात प्रभावित होता है तो इसका सीधा असर किसानों की आय, मिलर्स और निर्यातकों की कमाई पर पड़ेगा।घरेलू बाजार में कीमतों में गिरावट की आशंका भी बन सकती है, जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। मौजूदा हालात में स्थिति पूरी तरह अनिश्चित है।"
इसके अलावा भारत से ईरान को होने वाला चाय निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 700 करोड़ रुपये की भारतीय चाय ईरान भेजी गई थी, जो अब जोखिम में है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इराक को होने वाला निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। पश्चिम एशिया के कई देश भारतीय बासमती के बड़े खरीदार हैं। क्षेत्रीय अस्थिरता से शिपिंग बीमा प्रीमियम बढ़ सकते हैं, समुद्री मार्ग महंगे हो सकते हैं और आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।