नमक के कचरे से बन रहा था पोटाश! जयपुर में कृषि मंत्री की छापेमारी में बड़ा खुलासा, कई कंपनियाँ जाँच के घेरे में

Jun 21, 2026, 13:34 IST
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राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) में कई उर्वरक और कृषि उत्पाद इकाइयों पर छापेमारी की। जाँच में कथित तौर पर अवैध बायोस्टिमुलेंट, जैव उर्वरक और पोटाश उत्पादों के निर्माण व भंडारण से जुड़ी अनियमितताएँ मिलीं। मंत्री ने बिक्री रोकने, नमूने जाँच के लिए भेजने, एफआईआर दर्ज करने और राज्यव्यापी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

नकली खाद और कृषि उत्पादों पर बड़ा एक्शन
नकली खाद और कृषि उत्पादों पर बड़ा एक्शन
राजस्थान में किसानों को कथित तौर पर नकली और बिना अनुमति वाले कृषि उत्पाद बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शनिवार को जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) में कई उर्वरक और कृषि उत्पाद इकाइयों पर अचानक छापेमारी की। इस दौरान बायोस्टिमुलेंट, जैव उर्वरक और पोटाश उत्पादों के निर्माण व भंडारण से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जाँच के दौरान कुछ इकाइयों में ऐसे उत्पाद मिलने का दावा किया गया, जिनके निर्माण और भंडारण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं थी।

कृषि मंत्री ने इसे किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी किसानों को गुमराह कर नियमों के विपरीत कृषि उत्पाद बेच रही है तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। छापेमारी के बाद कृषि विभाग ने संदिग्ध उत्पादों की बिक्री रोकने, नमूने जाँच के लिए भेजने और दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही पूरे राजस्थान में इसी तरह की गतिविधियों के ख़िलाफ़ विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सील की गई यूनिट में मिली कथित गड़बड़ी

कार्रवाई के दौरान सबसे गंभीर मामला नंदी फर्टिलाइजर्स में सामने आया। कृषि मंत्री की मौजूदगी में कृषि विभाग द्वारा पहले सील की गई यूनिट को दोबारा खोला गया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को संदेह हुआ कि नमक के अपशिष्ट (सॉल्ट वेस्ट) का उपयोग कर म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) तैयार किया जा रहा था।

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा, "यह किसानों के साथ गंभीर धोखाधड़ी है। ऐसे उत्पाद फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं, मिट्टी की उर्वरता घटा सकते हैं और खाद्य गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर डाल सकते हैं।"

बिना अनुमति बायोस्टिमुलेंट की सप्लाई का आरोप

निरीक्षण टीम ने रोड नंबर-7 स्थित सीएंडएफ गोदाम समृद्धि सर्विसेज़ पर भी छापा मारा। अधिकारियों के अनुसार यहाँ बिना अनुमति बायोस्टिमुलेंट की आपूर्ति किए जाने की आशंका है। इसके अलावा चित्तारी एग्री केयर नामक कंपनी में भी बायोस्टिमुलेंट और अन्य कृषि उत्पादों का भंडारण आवश्यक स्वीकृतियों के बिना पाए जाने का दावा किया गया। कृषि विभाग अब इन मामलों की विस्तृत जाँच कर रहा है और दस्तावेज़ों की भी पड़ताल की जा रही है।

सब्सिडी के दुरुपयोग की भी जाँच

छापेमारी के दौरान एक अन्य उर्वरक गोदाम में तरल और किण्वित जैविक उर्वरक मिले, जो कंपनी के लाइसेंस में दर्ज नहीं थे। अधिकारियों को यह भी संदेह है कि इन उत्पादों पर प्रति टन 1,500 रुपये की केंद्रीय सब्सिडी का लाभ नियमों के विपरीत लिया गया हो सकता है। कृषि विभाग ने इस पहलू को भी जाँच के दायरे में शामिल किया है और संबंधित दस्तावेज़ों की समीक्षा शुरू कर दी गई है।

दोषियों पर होगी सख़्त कार्रवाई

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा, "मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकी जाए, नमूने परीक्षण के लिए भेजे जाएँ और जाँच में दोषी पाए जाने वाली कंपनियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जाए।" उन्होंने कहा कि राज्यभर में नकली खाद, उर्वरक और अन्य कृषि उत्पादों के निर्माण एवं बिक्री के ख़िलाफ़ विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकें और उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई?

कृषि विभाग का मानना है कि निम्न गुणवत्ता या कथित नकली कृषि उत्पाद फसलों की पैदावार, मिट्टी की सेहत और किसानों की आय पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में यह कार्रवाई केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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