Digital Detox: छात्रों को स्क्रीन लत से बचाने के लिए कर्नाटक में जारी हुआ 'Responsible Digital Use' ड्राफ्ट

Gaon Connection | Mar 26, 2026, 12:02 IST
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कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए एक नई डिजिटल नीति पेश की है, जिसका उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट की लत से बचाना और मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना है। इस नीति के तहत, शिक्षा के साथ-साथ मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाएगा। स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा और स्वास्थ्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
9वीं से 12वीं के छात्र: पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए केवल 1 घंटा स्क्रीन टाइम
9वीं से 12वीं के छात्र: पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए केवल 1 घंटा स्क्रीन टाइम
कर्नाटक सरकार ने 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के डिजिटल इस्तेमाल को लेकर एक नई नीति का मसौदा तैयार किया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को इंटरनेट की लत, नींद की कमी और चिंता जैसी समस्याओं से बचाना है। इसके तहत पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम को दिन में सिर्फ 1 घंटे तक सीमित रखने और शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि लगभग 25% किशोर इंटरनेट के आदी हो चुके हैं, इसलिए यह कदम उठाया जा रहा है।

डिजिटल वेल-बीइंग और ऑनलाइन सुरक्षा पर जोर

इस नीति के अनुसार, स्कूलों में डिजिटल वेल-बीइंग (Digital Well-Being) और ऑनलाइन सुरक्षा को पढ़ाई का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। छात्रों को साइबर बुलिंग, प्राइवेसी और जिम्मेदारी से ऑनलाइन व्यवहार करने के बारे में सिखाया जाएगा। हर स्कूल अपनी डिजिटल उपयोग नीति खुद बनाएगा। साथ ही, स्कूलों में 'डिजिटल डिटॉक्स डे/Digital Detox Day' और 'टेक-फ्री पीरियड/ Take Free Period' जैसे आयोजन भी होंगे। छात्रों से संपर्क के लिए व्हाट्सएप की जगह डायरी का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।

मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षकों-अभिभावकों की भूमिका

नीति में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। स्कूलों में काउंसलिंग सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। शिक्षकों को डिजिटल लत के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चों को विशेषज्ञों के पास भेजा जा सके। शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें। अभिभावकों को घर में बच्चों के स्क्रीन टाइम को तय करना होगा, 'नो-फोन जोन' बनाने होंगे और खुद भी एक अच्छा उदाहरण पेश करना होगा।

AI के इस्तेमाल पर भी बनेंगे दिशानिर्देश

इसके अलावा, स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर भी नियम बनाए जाएंगे। स्कूल तय करेंगे कि AI का उपयोग कैसे किया जाएगा, होमवर्क में इसके इस्तेमाल को कैसे नियंत्रित किया जाएगा और नकल रोकने के लिए क्या सिस्टम होंगे। इस मसौदा नीति को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, कर्नाटक स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी, निमहांस/NIMHANS और शिक्षा विभाग ने मिलकर तैयार किया है।

सोशल मीडिया पर सख्ती का अलग प्रस्ताव

यह मसौदा नीति मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 6 मार्च को बजट में किए गए ऐलान से अलग है। बजट में उन्होंने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्ती बरतने की घोषणा की थी। कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जिसका उन पर गलत असर पड़ रहा है।

डेटा सुरक्षा कानून से जुड़ा सोशल मीडिया बैन

16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव डेटा सुरक्षा कानून डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP) और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 से भी जुड़ा है। इसके तहत, बच्चों को अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति और उम्र का वेरिफिकेशन जरूरी होगा। इसके लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

किशोरों का सोशल मीडिया की ओर झुकाव

किशोरों में सोशल मीडिया के प्रति आकर्षण ज्यादा देखा जाता है। इस उम्र में 'सोशल वैलिडेशन' यानी दूसरों से मिलने वाली स्वीकृति बहुत मायने रखती है। सोशल मीडिया उन्हें अपनी पहचान बनाने और अपनी पसंद की चीजें दुनिया के साथ साझा करने का मंच देता है। यह उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक वर्चुअल दुनिया है जहाँ वे खुद को तलाशते हैं। यहाँ मिलने वाले तुरंत रिएक्शन (लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज) उन्हें यह एहसास कराते हैं कि लोग उन्हें देख रहे हैं और यह महत्वपूर्ण है।

केंद्र सरकार की अश्लील कंटेंट पर चेतावनी

केंद्र सरकार ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अश्लील कंटेंट को लेकर चेतावनी जारी की है। सरकार ने कहा है कि कंपनियाँ अश्लील, भद्दे, पोर्नोग्राफिक, बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले और गैर-कानूनी कंटेंट पर तुरंत रोक लगाएं। अगर कंपनियां कार्रवाई नहीं करेंगी तो उन पर केस चलाया जाएगा।
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