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Local to Global: कर्नाटक के GI उत्पादों ने भरी अंतरराष्ट्रीय उड़ान

Gaon Connection | Jan 16, 2026, 17:15 IST
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कर्नाटक के GI टैग वाले तीन कृषि उत्पाद Nanjangud केला, मैसूर पान और इंडी नींबू पहली बार हवाई मार्ग से मालदीव भेजे गए हैं। APEDA की इस पहल से भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच मिली है।
पहले जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित था, अब गाँव के किसान भी इस वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन रहे हैं।
कर्नाटक के खेतों से निकले केले, पान के पत्ते और नींबू अब सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रहे। पहली बार भारत ने हवाई मार्ग से जीआई टैग वाले कृषि उत्पादों का निर्यात करके एक नया इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक शिपमेंट में कर्नाटक के तीन विशिष्ट उत्पाद- Nanjangud केला, मैसूर पान और इंडी नींबू को मालदीव भेजा गया है। यह सिर्फ एक निर्यात खेप नहीं है, बल्कि भारतीय किसानों की मेहनत, पहचान और वैश्विक बाज़ार में बढ़ती स्वीकार्यता की कहानी है।

एपीडा यानी कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अब भारत की खेती पारंपरिक ढर्रे से आगे बढ़कर आधुनिक वैश्विक बाजार से जुड़ रही है। हवाई मार्ग से कृषि उत्पाद भेजना इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे फल और सब्ज़ियां ताज़ी अवस्था में कम समय में विदेशी बाजारों तक पहुँचती हैं। इसका सीधा फायदा किसानों को बेहतर दाम और कम नुकसान के रूप में मिलता है।

कर्नाटक के नंजनगुड़ इलाके में उगने वाला रसाबाले केला अपनी मिठास, सुगंध और खास स्वाद के लिए जाना जाता है। मैसूर के पान पारंपरिक रूप से दक्षिण भारत की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहे हैं, जबकि इंडी नींबू अपनी रसदार गुणवत्ता के कारण बाजार में अलग पहचान रखता है। इन तीनों उत्पादों को जीआई टैग मिला हुआ है, जिसका मतलब है कि ये उत्पाद अपनी भौगोलिक पहचान और गुणवत्ता के कारण विशिष्ट माने जाते हैं। अब जब ये सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुँच रहे हैं, तो इससे स्थानीय किसानों को भी अपनी फसल पर गर्व महसूस हो रहा है।

पहले जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित था, अब गाँव के किसान भी इस वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन रहे हैं।
पहले जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित था, अब गाँव के किसान भी इस वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन रहे हैं।


इस पहल का असर सिर्फ निर्यात आंकड़ों तक सीमित नहीं है। गाँवों में बैठे किसान अब यह समझने लगे हैं कि उनकी उपज की मांग केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। इससे खेती को लेकर सोच बदल रही है। किसान अब उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाज़ार की जरूरतों पर भी ध्यान देने लगे हैं। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।

एपीडा की लगातार कोशिशों ने भारत के कृषि निर्यात को नई दिशा दी है। कोल्ड चेन, पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच और लॉजिस्टिक्स में सुधार से अब छोटे और मध्यम किसान भी निर्यात की प्रक्रिया से जुड़ पा रहे हैं। पहले जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित था, अब गाँव के किसान भी इस वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन रहे हैं।

इस शिपमेंट के ज़रिये भारत ने दुनिया को यह संदेश भी दिया है कि देश केवल अनाज का निर्यातक नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक कृषि विरासत और जीआई उत्पादों के ज़रिये सांस्कृतिक पहचान को भी वैश्विक मंच पर पहुंचा रहा है। इससे भारत की सॉफ्ट पावर मजबूत होती है और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है।

किसानों के लिए यह पहल उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। बेहतर बाजार पहुंच का मतलब है स्थिर आय, कम बिचौलिया निर्भरता और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा। यही वजह है कि इस तरह के प्रयास ग्रामीण युवाओं को भी खेती से जोड़े रखने में मदद कर सकते हैं।

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