LPG सप्लाई सामान्य होने में लग सकते हैं 3-4 साल, कीमतें बढ़ने का खतरा, जानें गाँवों पर क्या पड़ेगा असर
Gaon Connection | Apr 16, 2026, 13:39 IST
एलपीजी आपूर्ति की चिंता ने देश के नागरिकों की नींद उड़ा दी है। पश्चिम एशिया में उत्पन्न होने वाले तनाव के कारण कमी की आशंका बनी हुई है, जिससे सामान्य लोगों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। बाजार में एलपीजी की कीमतें चढ़ सकती हैं।
एलपीजी सप्लाई संकट के बीच लाइन में लग कर सिलेंडर भरवाते लोग
देश में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है और आने वाले समय में इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने ईंधन आपूर्ति को अस्थिर बना दिया है। Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर बाधित एलपीजी (LPG) सप्लाई चेन को सामान्य होने में तीन से चार साल लग सकते हैं, क्योंकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उत्पादन अस्थायी रूप से रुका है या स्थायी नुकसान हुआ है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का करीब 60 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है, जिससे मौजूदा संकट का असर और गंभीर हो गया है। युद्ध से पहले भारत के लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होते थे, लेकिन अब यह घटकर करीब 55 प्रतिशत रह गया है, जो सप्लाई में बाधा और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते पश्चिम एशिया में ऊर्जा ढांचे पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। Rubix Data Sciences और Vayana TradeXchange की रिपोर्ट के मुताबिक, वैकल्पिक मार्ग अपनाने के बावजूद प्रभावी सप्लाई में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी बनी रह सकती है। सरकार फिलहाल घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कोविड काल में अपनाए गए उपाय—जैसे आयात स्रोतों में विविधता, रूट बदलाव, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और मांग प्रबंधन—पर फिर से काम कर रही है, ताकि आम उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी न हो।
भारत में सालाना एलपीजी मांग करीब 3.3 करोड़ टन है, जबकि भंडारण क्षमता केवल 15 दिनों की खपत के बराबर है, जिससे सप्लाई में किसी भी बाधा का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। पिछले एक महीने में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 115 रुपये तक बढ़ चुकी है। खाड़ी देशों—यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान—से आने वाली सप्लाई पर भारत की 92 प्रतिशत निर्भरता भी चिंता बढ़ा रही है। बढ़ती फ्रेट और बीमा लागत के कारण एलपीजी और महंगी हो सकती है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और MSME सेक्टर के साथ-साथ तेल कंपनियों पर सब्सिडी का दबाव भी बढ़ने की आशंका है।
• रसोई खर्च में भारी बढ़ोतरी: LPG महंगी होने से ग्रामीण परिवार, खासकर उज्ज्वला लाभार्थी, दोबारा लकड़ी/कोयले पर निर्भर हो सकते हैं। International Energy Agency और NITI Aayog की रिपोर्ट्स बताती हैं कि कीमत बढ़ने पर क्लीन फ्यूल का उपयोग घटता है।
• मजदूरों की वापसी का खतरा: शहरों में बढ़ते खर्च (खाना, गैस, किराया) के कारण दिहाड़ी मजदूर गांव लौट सकते हैं, जैसा World Bank ने कोविड के दौरान नोट किया था।
• गांव में बेरोजगारी और आर्थिक दबाव: गांव लौटे मजदूरों के लिए पर्याप्त रोजगार नहीं होगा, जिससे परिवारों की आय घटेगी और कर्ज बढ़ सकता है।
• कृषि पर असर: महंगी ऊर्जा और इनपुट लागत (डीजल, उर्वरक) खेती को महंगा बनाएगी, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और किसानों की कमाई प्रभावित होगी।
पश्चिम एशिया संकट से सप्लाई चेन पर गहरा असर
कीमतों में उछाल
ग्रामीण भारत पर क्या असर
• मजदूरों की वापसी का खतरा: शहरों में बढ़ते खर्च (खाना, गैस, किराया) के कारण दिहाड़ी मजदूर गांव लौट सकते हैं, जैसा World Bank ने कोविड के दौरान नोट किया था।
• गांव में बेरोजगारी और आर्थिक दबाव: गांव लौटे मजदूरों के लिए पर्याप्त रोजगार नहीं होगा, जिससे परिवारों की आय घटेगी और कर्ज बढ़ सकता है।
• कृषि पर असर: महंगी ऊर्जा और इनपुट लागत (डीजल, उर्वरक) खेती को महंगा बनाएगी, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और किसानों की कमाई प्रभावित होगी।