दस फ़रवरी से घर-घर पहुँचेगी दवा: फ़ाइलेरिया से लड़ाई में भारत का बड़ा कदम
Gaon Connection | Feb 10, 2026, 12:59 IST
भारत सरकार ने 10 फ़रवरी से फ़ाइलेरिया (हाथीपाँव) जैसी गंभीर लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी के खिलाफ मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान शुरू किया है। यह अभियान देश के 12 राज्यों के 124 फ़ाइलेरिया-प्रभावित जिलों में चलाया जा रहा है, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर मुफ़्त और सुरक्षित दवाएँ खिलाएँगे। फ़ाइलेरिया मच्छर के काटने से फैलने वाला परजीवी रोग है, जो समय पर रोका न जाए तो आजीवन सूजन, दर्द और विकलांगता का कारण बन सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया में फ़ाइलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित देशों में है जहाँ करोड़ों लोग जोखिम में और लाखों लोग बीमारी के दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। MDA का उद्देश्य इलाज नहीं, बल्कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हर पात्र व्यक्ति दवा ले, तो भारत 2027 तक फ़ाइलेरिया-मुक्त बनने के लक्ष्य के बेहद करीब पहुँच सकता है।
Image Feb 10, 2026, 12_49_00 PM
मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA): कैसे काम करता है यह अभियान?
इस अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर दवाएँ देते हैं और अपने सामने सेवन करवाते हैं, ताकि कवरेज अधिकतम हो। दवाएँ मुफ़्त, WHO-समर्थित और वर्षों से सुरक्षित रूप से इस्तेमाल में हैं। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण ढाँचे का अहम हिस्सा है।
MOH
फ़ाइलेरिया क्या है और यह कैसे फैलता है?
आधिकारिक आंकड़े क्या कहते हैं?
इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को देखें तो करीब 74 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जिन्हें फ़ाइलेरिया के लिए जोखिम क्षेत्र माना गया है। यही वजह है कि सरकार इसे केवल बीमारी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में देखती है। आधिकारिक रिकॉर्ड यह भी बताते हैं कि फ़ाइलेरिया का सबसे बड़ा असर इसकी दीर्घकालिक जटिलताओं के रूप में सामने आता है। देश में लगभग 6.2 लाख लोग लिम्फैडेमा यानी हाथ-पैरों की स्थायी सूजन से पीड़ित हैं, जबकि करीब 1.21 लाख लोगों में हाइड्रोसील जैसी गंभीर स्थिति दर्ज की गई है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में जिले फ़ाइलेरिया-एंडेमिक रहे हैं। अकेले इन राज्यों में देश के अधिकांश जोखिमग्रस्त जिले और आबादी आती है। यही कारण है कि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियानों का सबसे बड़ा फोकस इन्हीं राज्यों पर रहा है। दुनिया में फ़ाइलेरिया के जोखिम में रहने वाली कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत में पाया जाता है। इसी वजह से भारत सरकार ने फ़ाइलेरिया उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता वाले स्वास्थ्य लक्ष्यों में शामिल किया है और 2027 तक इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है।
दवाएँ कौन-सी हैं और क्या ये सुरक्षित हैं?
किसे दवा लेनी चाहिए और किसे नहीं?
भारत ने 2027 तक फ़ाइलेरिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए MDA की उच्च कवरेज, समुदाय की भागीदारी और सतत निगरानी जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हर व्यक्ति दवा लेता है, तो मच्छर को परजीवी नहीं मिलेगा और बीमारी अपने-आप खत्म हो जाएगी।