Mental Health: देश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर क्या-क्या सुविधाएँ मौजूद हैं, आम लोगों को कैसे मिलेगा लाभ
Preeti Nahar | Feb 11, 2026, 17:30 IST
अगर आपके आस-पास कोई मानसिक रोगों से जूझ रहा है तो गाँव व जिला स्तर पर इलाज करा सकता है। क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य कोई छुपाने की चीज नहीं है, समय पर इलाज और सही परामर्श बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। चुनौती यही है कि लोग जागरूक हों, डर छोड़ें और समय पर मदद लें। जानिए आपके गाँव और जिला स्तर पर मानसिक रोगों के इलाज के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अब सोच और नीतियाँ दोनों बदल रही हैं। पहले जहाँ मानसिक बीमारी को लेकर चुप्पी और डर बना रहता था, वहीं अब सरकार इसे एक जरूरी स्वास्थ्य मुद्दा मानकर इलाज और मदद की व्यवस्था कर रही है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 ने हर नागरिक को सस्ती और अच्छी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकार दिया है। इस कानून की खास बात यह है कि आत्महत्या की कोशिश को अपराध नहीं माना गया, बल्कि ऐसे लोगों को इलाज और सहारे की जरूरत समझी गई। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने मानसिक स्वास्थ्य को देश की प्राथमिकताओं में शामिल कर दिया।
मानसिक स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ बीमारी न होना नहीं है। इसका मतलब है कि इंसान रोजमर्रा के तनाव को संभाल सके, काम कर सके, सीख सके और समाज में अपनी भूमिका निभा सके। अच्छी मानसिक सेहत में मन, सोच और रिश्तों का संतुलन शामिल होता है। अगर मानसिक स्वास्थ्य ठीक न हो, तो चिंता, अवसाद जैसी समस्याएँ पैदा होती हैं, जो शरीर, परिवार और कामकाज पर बुरा असर डालती हैं। आज बेरोजगारी, खेती का संकट, बढ़ता खर्च, शहरीकरण और कोरोना के बाद की परेशानियों ने गाँवों तक मानसिक तनाव बढ़ा दिया है। समय पर मदद न मिले तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
सरकार ने बजट 2026-27 में मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता के रूप में रखा है। खासतौर पर गरीब, कमजोर और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सुविधाएँ बढ़ाने पर जोर दिया गया है। ट्रॉमा (आघात) देखभाल, स्वास्थ्य कर्मियों की ट्रेनिंग और इलाज की पहुँच आसान बनाने पर ध्यान दिया गया है, ताकि मानसिक बीमारी सिर्फ शहरों तक सीमित न रहे।
उत्तर भारत में खुलेगा
बजट 2026-27 में भारत सरकार का खास फोकस मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी को लेकर है। जिसमें NIMHANS-2 बड़ी घोषणा उत्तर भारत में निमहंस-2 (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान)की स्थापना है। अभी तक देश का प्रमुख संस्थान बेंगलुरु में ही था। नए निमहंस-2 में इलाज, डॉक्टरों की ट्रेनिंग और रिसर्च तीनों काम होंगे। इससे उत्तर भारत के लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही रांची और तेजपुर के मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को भी क्षेत्रीय शीर्ष संस्थान के रूप में मजबूत किया जाएगा।
अब सरकार देश के हर जिला अस्पताल में आपातकालीन और ट्रॉमा केयर सेंटर बनाने जा रही है। यहाँ सड़क हादसे, प्राकृतिक आपदा, घरेलू हिंसा या आत्महत्या की कोशिश जैसी स्थितियों में तुरंत इलाज और मानसिक मदद मिलेगी। यह सुविधा खासकर गाँवों और गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
आयुष्मान भारत योजना के तहत लाखों उप-स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर बन चुके हैं। यहाँ सामान्य इलाज के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ भी दी जा रही हैं। इसके अलावा जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) लगभग पूरे देश में लागू है। इसके तहत जिला स्तर पर सलाह, दवाएँ, परामर्श, आत्महत्या रोकथाम और जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जाते हैं। हर जिले में मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता की टीम काम करती है।
अगर आपके आस-पास कोई मानसिक रोगों से जूझ रहा है तो गाँव व जिला स्तर पर इलाज तरा सकता है। क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य कोई छुपाने की चीज नहीं है, समय पर इलाज और सही परामर्श बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। चुनौती यही है कि लोग जागरूक हों, डर छोड़ें और समय पर मदद लें।
अगर किसी को मानसिक परेशानी हो और अस्पताल जाना मुश्किल हो, तो टेली-मानस हेल्पलाइन (14416) पर फोन किया जा सकता है। यह सेवा 20 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। यहाँ मुफ्त सलाह मिलती है और जरूरत पड़ने पर नजदीकी अस्पताल से जोड़ा जाता है। मोबाइल ऐप, वीडियो काउंसलिंग और एआई चैटबॉट जैसी सुविधाएँ भी मानसिक रोगों में शुरूआती मदद करती हैा