Film Review: अकेलेपन, असफलता और ज़िंदगी में टूटते भरोसे की कहानी है मिनी फीचर फिल्म 'KOOD'
Preeti Nahar | Apr 04, 2026, 12:46 IST
Kood Film Review: नीलेश मिसरा की पहली फिल्म 'कूद' रिलीज हो गई है। यह फिल्म छोटे शहरों की मानवीय कहानियों को दर्शाती है। फिल्म दो अजनबियों की कहानी बताती है जो अपनी तकलीफों से हारकर एक पुल पर मिलते हैं। यहीं से फिल्म की पूरी कहानी शुरू होती है। फिल्म अकेलेपन, असफलता और टूटते भरोसे जैसे मुद्दों को उठाती है। पढ़िए फिल्म को लेकर दर्शकों की क्या राय रही।
KOOD’ पर दर्शकों की मजेदार, इमोशनल और इंस्पायरिंग प्रतिक्रियाएं
हिंदी सिनेमा के जाने-माने लेखक, गीतकार, पत्रकार और कहानीकार नीलेश मिसरा की पहली फिल्म 'कूद' 3 अप्रैल को रिलीज हो गई। 'Slow Motion Pictures' के तहत बनी इस फिल्म का मकसद छोटे शहरों की संवेदनशील और मानवीय कहानी को सिनेमा के ज़रिए दर्शकों तक पहुँचाना है। KOOD सिर्फ एक शॉर्ट फिल्म नहीं है, बल्कि आज के समाज की उन अनकही सच्चाइयों को सामने लाती है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। Neelesh Misra की यह मिनी फीचर फिल्म अपने धीमे लेकिन गहरे नैरेटिव के जरिए दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है।
'कूद' को नीलेश मिसरा के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ किया गया है। यह फिल्म दो अजनबियों की कहानी बताती है जो एक ही दिन, एक ही समय पर ख़ुदकुशी करने के लिए एक पुल पर मिलते हैं। फिल्म में दो ओरिजिनल गाने भी हैं जो कहानी की गहराई को बढ़ाते हैं।
नीलेश मिसरा की कहानियाँ सुनने वाले फैन्स के लिए ये फिल्म भावनाओं से भरी हुई थी। जिन फैन्स ने नीलेश को सिर्फ आवाज़ों या इंटरव्यू के ज़रिए ही जाना था, उन्होंने कूद फिल्म के माध्यम से अपने पंसदीदा कहानीकार को कहानी बुनते हुए देखा, एक्टिंग करते हुए देखा, भावनाओं से भरा देखा। कूद फिल्म में के बारे में नीलेश मिसरा ने गाँव कनेक्शन को बताया "यह फिल्म सिर्फ दो अजनबियों की कहानी नहीं है, यह फिल्म है समाज के उस हिस्से की जो जीवन में कहीं अकेले रह गए हैं।" जैसा कि एक दर्शक ने लिखा “Ye Film Nahi..Ye Dard Hai Jo Har Insaan K Andar Pal Raha hai..” फिल्म यह दिखाती है कि कैसे दो पीढ़ियाँ 'पुरानी और नई'अपने-अपने संघर्षों में उलझी हुई हैं, लेकिन उनकी जड़ें कहीं न कहीं एक ही दर्द से जुड़ी हैं। फिल्म की कहानी किसी एक किरदार की नहीं, बल्कि उस भाव की है जो आज हर इंसान के अंदर कहीं न कहीं मौजूद है-अकेलापन, असफलता और टूटता भरोसा।
KOOD की सबसे बड़ी ताकत इसका भावनात्मक टोन है। यह फिल्म तेज गति से नहीं भागती, बल्कि ठहरकर अपनी बात कहती है। एक दर्शक ने इसे बहुत सटीक तरीके से लिखा “स्लो व भावनात्मक होने की वजह से सफल… दो पीढ़ियों को जस का तस उकेरा गया।”फिल्म में रिश्तों, भरोसे और टूटन को बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है, जिससे दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।
Kood Movie by Neelesh Misra – Cast, Story, Trailer Details
फिल्म सिर्फ इमोशन नहीं, बल्कि कई गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी उठाती है- युवाओं का स्टार्टअप में असफल होना, रिश्तों में विश्वास का टूटना, निजी पलों का दुरुपयोग (वीडियो बनाना), महिलाओं का आत्मनिर्भर बनना और उससे जुड़े संघर्ष। एक दर्शक ने कमेंट में लिखा, “दोनों ही हमारी राष्ट्रीय समस्या हैं… दोनों का मेल किया जाना प्रासंगिक।” यह पहलू, फिल्म को सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि एक सामाजिक दस्तावेज बना देता है।
फिल्म का सबसे बड़ा संदेश है कम्युनिकेशन (संवाद) करना। फिल्म देखने के बाद एक दर्शक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि- “This movie teaches us how much important communication is!” “अगर किसी को सही समय पर थोड़ी हिम्मत मिल जाए, तो वह बहुत कुछ कर सकता है।” फिल्म यह बताती है कि समस्याएं खत्म नहीं होतीं, लेकिन अगर हम उन्हें अपने करीबियों से साझा करें, तो उनका असर कम जरूर हो सकता है।
KOOD दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। एक दर्शक ने फिल्म देखने के बाद लिखा कि “ऐसी दुनिया क्यों बना रहे जहाँ सबके सब अकेले खड़े हैं?” यह सवाल आज के डिजिटल और दिखावटी जीवन पर सीधा प्रहार करता है, जहाँ लोग बाहर से खुश दिखते हैं लेकिन अंदर से टूटे होते हैं। इस मुद्दे पर नीलेश मिसरा कहते हैं, " अगर आप कुछ भी साफ-सुथरा कंटेंट बनाते हैं या फिर समाज, गाँव घर से जुड़े मुद्दों पर कंटेंट/ फिल्में बनाते हैें तो एलगोरिदम उसे अपलिफ्ट नहीं करता, इसके बजाय हिंसक, गाली-गलौच, अपशब्दों से भरा हुआ कंटेंट ही आगे बढ़ता है। इसी भेड़-चाल में अधिकतर क्रिएटर फंसते चले जाते हैं और एक मिनट के भीतर वायरल हो जाने वाले ट्रैंड्स में सिमट जाते हैं। हमने कूद में अपनी पिच नहीं छोड़ी, अपनी ऑरिजिलन थिंकिग को बचाए रखा। ये इसलिए ज़रूरी था क्योंकि अपनी मौलिकता और ऑथेंटिसिटी पर अगर आप खेंलेंगे तो आपके बनाए कंटेंट लंबे समय तक रिलेवेंट रहेंगे।"
फिल्म का अंत और उसका संदेश दर्शकों को एक नई उम्मीद देता है- “जिंदगी के कुछ प्रयोग गलत हो सकते हैं, लेकिन जिंदगी गलत नहीं होती ” यह लाइन फिल्म की आत्मा को पूरी तरह समेट लेती है। गिरना, टूटना, फिर संभलना। ‘KOOD’ – एक फिल्म नहीं, एहसास है। KOOD उन फिल्मों में से है जो देखने के बाद खत्म नहीं होतीं, बल्कि दर्शकों के अंदर चलती रहती हैं। यह फिल्म आपको रुलाती है, सोचने पर मजबूर करती है और अंत में एक छोटी-सी उम्मीद भी छोड़ जाती है। कमियों के बावजूद, इसकी सच्चाई और ईमानदारी इसे खास बनाती है और यही वजह है कि दर्शक इसे सिर्फ देख नहीं रहे, महसूस कर रहे हैं।
Kood फिल्म का ऑफिशियल पोस्टर
क्या कहती फिल्म की कहानी?
कूद फिल्म का एक सीन
स्लो लेकिन असरदार कैसे बनी फिल्म कूद?
कूद फिल्म के सीन में केतकी कुलकर्णी
Kood Movie by Neelesh Misra – Cast, Story, Trailer Details
रियलिटी का कड़वा सच
कूद फिल्म का एक दृश्य
क्या मैसेज देती है फिल्म कूद?
सोचने पर मजबूर करने वाले रिएक्शन
सवाल उठाती फिल्म: “हम कैसी दुनिया बना रहे हैं?”
सामाजिक मुद्दों को छूती फिल्म कूद
जिंदगी गलत नहीं होती
फिल्म कूद का मार्मिक दृश्य