Muskmelon Farming: फरवरी-मार्च में बुवाई से पाएँ अच्छी आमदनी, जानें सही तरीका
Gaon Connection | Feb 23, 2026, 18:25 IST
किसान फरवरी और मार्च के महीने में खरबूजे की फसल लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। इसके लिए उपयुक्त दोमट मिट्टी, सही समय पर बुवाई करना और वैज्ञानिक सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। कोई भई किसान बहन-भाई इसकी खेती करनी चाहते हैं तो यहाँ से खरबूजे की बोने से लेकर फल आने तक की पूरी प्रोसेस जान सकते हैं।
खरबूजे की खेती
Sowing Time for Muskmelon: यह फल मूल रूप से ईरान, अनातोलिया और आर्मेनिया क्षेत्र से आया माना जाता है, लेकिन आज यह भारत की प्रमुख फसलों में शामिल है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी और करीब 9 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। साथ ही यह विटामिन ए और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है। भारत में पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। खरबूजे की खेती से किसान फरवरी-मार्च में बुवाई कर अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं, जिसके लिए दोमट मिट्टी, सही समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीके से सिंचाई व खरपतवार नियंत्रण आवश्यक है।
खरबूजे की अच्छी पैदावार के लिए सबसे जरूरी है सही मिट्टी का चुनाव। यह फसल गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में सबसे बेहतर बढ़ती है। दोमट मिट्टी इसके लिए आदर्श मानी जाती है। जहां पानी रुकता हो या जमीन में जलभराव की समस्या हो, वहां इसकी खेती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अधिक पानी से जड़ें सड़ सकती हैं। मिट्टी का pH स्तर 6 से 7 के बीच होना चाहिए। ज्यादा लवणीय या खारी मिट्टी में यह फसल अच्छी नहीं होती। एक ही खेत में बार-बार खरबूजा लगाने से बचें। फसल चक्र अपनाना जरूरी है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और बीमारियों का खतरा कम हो।
बुवाई से पहले खेत की 2-3 बार गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें। अंतिम जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिला दें, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो सके। उत्तर भारत में खरबूजे की बुवाई का सबसे अच्छा समय फरवरी का मध्य माना जाता है। वहीं पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में नवंबर से जनवरी के बीच इसकी बुवाई की जाती है। किस्म के अनुसार 3 से 4 मीटर चौड़ी क्यारियाँ तैयार करें। हर टीले पर दो बीज बोएं और टीलों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें। इससे बेलों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और पौधों का विकास अच्छा होता है।
अगर किसान पॉलीथीन बैग में खेती करना चाहते हैं, तो पॉलीथीन बैग में बीज बो सकते हैं। 25 से 30 दिन में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई जरूर करें। शुरुआती बढ़वार के समय खेत को खरपतवार मुक्त रखना बहुत जरूरी है। अगर समय पर निराई-गुड़ाई न की जाए, तो खरपतवार लगभग 30 प्रतिशत तक उपज कम कर सकते हैं। बुवाई के 15-20 दिन बाद पहली गुड़ाई करें। जरूरत के अनुसार दो से तीन बार निराई करनी पड़ सकती है।
साथ ही पौधों में की निगरानी भी जरूरी है। बेलों पर पत्तियों का रंग बदलना या दिखाई देना रोग का संकेत हो सकता है। समय रहते कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपचार करें। गर्मी के मौसम में खरबूजे को नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। सामान्यत: सप्ताह में एक बार पानी देना पर्याप्त रहता है। लेकिन खेत में पानी भरने से बचना चाहिए। अधिक नमी से फल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। फूल आने और फल लगने के समय बेलों को ज्यादा गीला न करें। भारी मिट्टी में बार-बार सिंचाई करने से बचें। बेहतर मिठास और स्वाद के लिए कटाई से 3 से 6 दिन पहले सिंचाई बंद कर देना या कम कर देना लाभदायक होता है।
सही देखभाल और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने पर खरबूजे की फसल 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ अच्छी पैदावार मिलने पर किसान गर्मियों के सीजन में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। बाजार में मांग अधिक होने से इसकी बिक्री भी आसान रहती है। अगर किसान मौसम, मिट्टी और सिंचाई प्रबंधन का ध्यान रखें, तो खरबूजे की खेती कम लागत में ज्यादा लाभ देने वाली फसल साबित हो सकती है। गर्मियों में इसकी मांग और मिठास दोनों ही किसानों की कमाई बढ़ाने में मदद करती हैं।
खरबूजे की खेती के लिए सही मिट्टी का चुनाव
खरबूजे की खेती
खरबूजे की बुवाई के लिए मिट्टी का ख्याल
कितने दिन में पौध तैयार?
खरबूजे की खेती
पौधों की निगरानी कैसे करें?
कितने दिन में मिलेगा खरबूजे का फल
कटाई के लिए फल तैयार