राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026: हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। यह दिन लड़कियों के अधिकारों, शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। साल 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसकी शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य लड़कियों को बराबरी का हक दिलाना और उन्हें बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने के अवसर देना है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि लड़कियों को भी वही मौके और सुविधाएं मिलनी चाहिए जो लड़कों को मिलती हैं। समाज में आज भी कई जगहों पर लड़कियों के साथ भेदभाव होता है, उनकी पढ़ाई रोकी जाती है या उन्हें कमतर समझा जाता है। इस दिन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है कि वे लड़कियों का सम्मान करें, उनकी शिक्षा को बढ़ावा दें और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका दें।
बेटियों के सशक्तिकरण के लिए कौन-कौन सी योजनाएँ
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राष्ट्रीय बालिका दिवस पहल का एक बड़ा मकसद समाज की सोच को बदलना है। बेटी भ्रूण हत्या, गिरता हुआ लिंग अनुपात और लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव जैसी गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, ताकि एक समान और सुरक्षित माहौल बनाया जा सके। सरकार ने समय-समय पर लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना का मकसद बेटियों को बचाना और उनकी पढ़ाई को बढ़ावा देना है। इस योजना का उद्देश्य बेटियों को जन्म से लेकर शिक्षा तक सुरक्षित और सशक्त बनाना है, ताकि समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो।
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सुकन्या समृद्धि योजना' के तहत बेटी के भविष्य के लिए बचत को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अलावा, माध्यमिक शिक्षा के लिए लड़कियों को प्रोत्साहन देने वाली योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। 'सुकन्या समृद्धि योजना' के जरिए माता-पिता अपनी बेटी की पढ़ाई और शादी के लिए बचत कर सकते हैं, जिससे उसका भविष्य सुरक्षित हो सके।
National Scheme of Incentive to Girls for Secondary Education (NSIGSE) यह योजना खासकर माध्यमिक शिक्षा (10वीं के बाद) तक पढ़ाई जारी रखने के लिए लड़कियों को आर्थिक मदद देती है, ताकि वे पढ़ाई बीच में न छोड़ें।
लड़कियों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए कड़े कानून
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लड़कियों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए कड़े कानून
लड़कियों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए कड़े कानून भी बनाए गए हैं। जैसे-
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बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006' बाल विवाह को रोकने के लिए बनाया गया है।
- POCSO अधिनियम, 2012 बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों से उनकी रक्षा करता है।
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जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015' जरूरतमंद बच्चों की देखभाल और पुनर्वास पर ध्यान देता है।
बच्चों की सुरक्षा चाइल्ड हेल्पलाइन
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मिशन वात्सल्य' के तहत बच्चों की सुरक्षा और विकास से जुड़ी सेवाएं दी जाती हैं, जैसे चाइल्ड हेल्पलाइन और ट्रैक चाइल्ड पोर्टल, जो गुमशुदा बच्चों को खोजने में मदद करता है। कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्चों के लिए '
PM CARES for Children' योजना शुरू की गई। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य और इलाज के लिए
NIMHANS और ई-संपर्क जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
क्यों जरूरी है राष्ट्रीय बालिका दिवस
राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें यह सोचने का मौका देता है कि अगर हम लड़कियों को सही माहौल, शिक्षा और सुरक्षा दें, तो वे देश और समाज को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। हर बेटी की काबिलियत को पहचानना और उसे आगे बढ़ने का मौका देना ही एक बेहतर, बराबरी और तरक्की वाला भारत बनाने की कुंजी है। सरकार ने लड़कियों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई अहम योजनाएं शुरू की हैं। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत लड़कियों को आर्थिक मदद दी जाती है ताकि वे पढ़ाई बीच में न छोड़ें। इन योजनाओं का मकसद यही है कि कोई भी लड़की सिर्फ पैसों या सामाजिक दबाव की वजह से अपने सपनों से पीछे न हटे।