Mustard Variety: कम पानी में लहलहाएगी सरसों की नई किस्म RHH-2101/2102, होगी 14.5% अधिक उपज
Gaon Connection | Mar 19, 2026, 16:33 IST
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने सरसों की एक अद्भुत हाइब्रिड किस्म आरएचएच-2101 का विकास किया है जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होगी। यह नई किस्म पुराने उदाहरणों की तुलना में 14.5% अधिक उपज प्रदान करती है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी।
किसानों के काम की खबर- कम पानी में लहलहाएगी सरसों की नई किस्म
हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) ने सरसों की एक नई हाइब्रिड किस्म, आरएचएच-2101, विकसित की है। यह किस्म पुरानी किस्मों की तुलना में 14.5% तक अधिक उपज देती है और इसे हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों के लिए वरदान माना जा रहा है। तीन साल के परीक्षण के बाद विकसित यह किस्म 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और देश कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।
यह किस्म लगभग 142 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है और इसमें शाखाएं अधिक होने के साथ-साथ फलियों में दानों की संख्या भी ज्यादा होती है। इसके मध्यम आकार के दानों में लगभग 40% तेल पाया जाता है, जो इसे तेल में समृद्ध और गुणों में उत्कृष्ट बनाता है।
यह नई हाइब्रिड किस्म आरएचएच-2101, पुरानी किस्म आरएच-749 से 14.5% अधिक पैदावार देती है। वहीं, डीएमएच-1 से यह 11% और निजी हाइब्रिड 45546 से 8% ज्यादा उपज देने में सक्षम है। इस उपलब्धि से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा भी मजबूत होगी।
आज के समय में सरसों की खेती में नई-नई उन्नत और हाइब्रिड किस्में विकसित की जा रही हैं, जिससे उत्पादन और किसानों की आय दोनों बढ़ सकें। विकसित हाइब्रिड सरसों की किस्में, पुरानी किस्मों के मुकाबले 10–15% तक ज्यादा पैदावार देती हैं और इनमें तेल की मात्रा भी अधिक होती है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई हाइब्रिड सरसों (जैसे RHH-2101/2102) लगभग 28–30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है और इसमें करीब 40% तेल पाया जाता है, जो किसानों के लिए ज्यादा मुनाफे का कारण बन सकता है।
सरसों (मस्टर्ड) भारत की एक प्रमुख रबी फसल है, जिसे खासतौर पर ठंड के मौसम में अक्टूबर-नवंबर में बोया जाता है और फरवरी-मार्च में काटा जाता है। यह फसल मुख्य रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में उगाई जाती है। सरसों एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है, जिससे खाने का तेल बनाया जाता है और यह देश के कुल तिलहन उत्पादन का बड़ा हिस्सा देती है। इसके बीजों में लगभग 40–45% तक तेल पाया जाता है, जो खाने के साथ-साथ औद्योगिक उपयोग में भी काम आता है।
सरसों की खेती की खास बात यह है कि इसमें पानी की जरूरत कम होती है, इसलिए यह कम बारिश वाले इलाकों में भी आसानी से उगाई जा सकती है। यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक लाभदायक फसल मानी जाती है। साथ ही, सही खाद, सिंचाई और उन्नत बीजों के इस्तेमाल से इसकी पैदावार को और बढ़ाया जा सकता है। कुल मिलाकर, सरसों न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि देश की खाद्य तेल जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाती है।
सरसों की नई किस्म के फायदे
यह नई हाइब्रिड किस्म आरएचएच-2101, पुरानी किस्म आरएच-749 से 14.5% अधिक पैदावार देती है। वहीं, डीएमएच-1 से यह 11% और निजी हाइब्रिड 45546 से 8% ज्यादा उपज देने में सक्षम है। इस उपलब्धि से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा भी मजबूत होगी।