भारत में मिली चमेली के फूलों को नष्ट करने वाली नई कीट प्रजाति, पुणे के वैज्ञानिकों ने की खोज
Gaon Connection | Feb 24, 2026, 13:12 IST
पुणे स्थित ICAR-पुष्प अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने चमेली के फूलों को नुकसान पहुँचाने वाली एक नई कीट प्रजाति की खोज की है। इस कीट का नाम Contarinia icardiflores रखा गया है। यह खोज भारत के फूल उत्पादक किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे फसल को बचाने के नए और पर्यावरण अनुकूल तरीके विकसित किए जा सकेंगे।
Contarinia icardiflores
भारत के फूल उत्पादन जगत में एक बड़ी और महत्वपूर्ण खोज हुई है। पुणे स्थित ICAR-पुष्प अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DFR) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी. एम. फिराके के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने चमेली के फूलों में एक नई कीट प्रजाति की पहचान की है। इस कीट को Contarinia icardiflores नाम दिया गया है। यह एक प्रकार का बेहद छोटा मच्छर जैसा कीट होता है जिसे 'ब्लॉसम मिज' कहते हैं, जो फूलों की कलियों को अंदर से खोखला कर देता है।
Contarinia icardiflores एक ऐसा कीट है जो चमेली यानी Jasminum sambac के फूलों की कलियों में घुसकर उन्हें नष्ट कर देता है। यह कीट इतना खतरनाक है कि इसकी वजह से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। चमेली भारत में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है और इसका उपयोग इत्र, माला, धार्मिक अनुष्ठान और सौंदर्य उत्पादों में होता है। ऐसे में इस कीट का पता चलना किसानों और वैज्ञानिकों दोनों के लिए एक बड़ी जानकारी है। इस नई प्रजाति का नाम ICAR-DFR संस्थान के सम्मान में रखा गया है। 'icardiflores' शब्द Indian Council of Agricultural Research और Directorate of Floricultural Research से मिलकर बना है, जो इस संस्था के फूल अनुसंधान में अमूल्य योगदान को दर्शाता है।
इससे पहले चमेली पर एक और मिज कीट Contarinia maculipennis का प्रकोप दर्ज किया गया था। देखने में यह नई प्रजाति उससे मिलती-जुलती लगती है, लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इसके जीन की जाँच की तो पता चला कि यह पूरी तरह अलग और नई प्रजाति है। सिर्फ आँखों से देखकर इन दोनों में फर्क करना मुश्किल था, इसलिए वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया।
वैज्ञानिकों ने इस कीट की पहचान के लिए दो तरीके एक साथ अपनाए। पहला तरीका था इसके शरीर की बनावट को बारीकी से देखना, जैसे कि मादा कीट के शरीर के खास अंगों की संरचना और नर कीट के प्रजनन अंग की बनावट। दूसरा तरीका था डीएनए जाँच, जिसमें माइटोकॉन्ड्रियल जीन COI के एक हिस्से की जाँच की गई। यह जीन जाँच एक तरह का कीट का 'आधार कार्ड' होता है जो बताता है कि यह किस प्रजाति से है। इन दोनों तरीकों को मिलाकर वैज्ञानिकों ने पक्के तौर पर साबित किया कि यह एक बिल्कुल नई प्रजाति है।
यह कीट बहुत तेज़ी से अपनी संख्या बढ़ाता है। इसका पूरा जीवन चक्र यानी अंडे से लेकर वयस्क कीट बनने तक की प्रक्रिया महज 16 से 21 दिनों में पूरी हो जाती है। इसका मतलब यह है कि एक ही मौसम में यह कई पीढ़ियाँ पैदा कर सकता है और बहुत कम समय में पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है। भारत में चमेली की खेती लाखों किसानों की आजीविका से जुड़ी है, खासकर तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में। इस कीट की सही पहचान हो जाने से अब वैज्ञानिक इसके खिलाफ सटीक और पर्यावरण के अनुकूल दवाएँ और तरीके विकसित कर सकेंगे। अब तक किसान इस कीट को पहचान न पाने की वजह से गलत उपाय अपनाते थे, जिससे न तो कीट मरता था और न फसल बचती थी।
क्या है यह नई प्रजाति?
इससे पहले चमेली पर एक और मिज कीट Contarinia maculipennis का प्रकोप दर्ज किया गया था। देखने में यह नई प्रजाति उससे मिलती-जुलती लगती है, लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इसके जीन की जाँच की तो पता चला कि यह पूरी तरह अलग और नई प्रजाति है। सिर्फ आँखों से देखकर इन दोनों में फर्क करना मुश्किल था, इसलिए वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया।