NHB की हॉर्टिकल्चर सब्सिडी पर बड़ा बदलाव, मंत्री-सांसद से लेकर सरकारी कर्मचारियों तक पर लगी रोक

Abhishek Pandey | Aug 24, 2026, 14:44 IST
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नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) ने कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज योजनाओं की सब्सिडी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब मंत्री, सांसद, विधायक और कई श्रेणियों के सरकारी कर्मचारियों को सब्सिडी नहीं मिलेगी। साथ ही, एक परिवार से सिर्फ़ एक सदस्य ही NHB की वित्तीय सहायता ले सकेगा और सामान्य राज्यों में सब्सिडी 50% से घटाकर 35% कर दी गई है।

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नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) ने कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज से जुड़ी अपनी सब्सिडी योजनाओं के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 21 अगस्त 2026 को जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, मौजूदा मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, नगर निगम के मेयर, ज़िला पंचायत अध्यक्ष और कई श्रेणियों के सरकारी कर्मचारियों को NHB की वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी।

क्यों बदले गए NHB के सब्सिडी नियम?

NHB के मुताबिक़ नए बदलावों का उद्देश्य सब्सिडी का अधिक समान वितरण करना, एक ही परिवार को बार-बार लाभ मिलने से रोकना और योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाना है। NHB, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाला स्वायत्त निकाय है और कमर्शियल हॉर्टिकल्चर तथा कोल्ड स्टोरेज जैसी योजनाओं के ज़रिए बाग़वानी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देता है।

इन लोगों को अब नहीं मिलेगी सब्सिडी

  • संशोधित नियमों के मुताबिक़ निम्न श्रेणियां NHB की योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता के लिए पात्र नहीं होंगी:
  • संवैधानिक पदों पर वर्तमान में कार्यरत व्यक्ति।
  • केंद्रीय और राज्य मंत्री, सांसद, विधायक/विधान परिषद सदस्य।
  • नगर निगम के मेयर और ज़िला पंचायत के अध्यक्ष।
  • केंद्र या राज्य सरकार के मंत्रालयों/विभागों, PSU, स्वायत्त संस्थानों और स्थानीय निकायों के सेवारत कर्मचारी। हालांकि MTS/Class-IV/Group-D कर्मचारियों को अपवाद दिया गया है।
  • ₹10,000 या उससे अधिक मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी। MTS/Class-IV/Group-D कर्मचारियों को यहां भी अपवाद दिया गया है।
  • Farmers' Groups.
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अब 'परिवार' की परिभाषा भी बदली

NHB ने सब्सिडी के लिए परिवार की परिभाषा को भी व्यापक किया है। अब इसमें केवल पति-पत्नी और आश्रित नाबालिग बच्चे ही नहीं, बल्कि पति/पत्नी, पिता, माता, बेटे और बेटियां शामिल होंगे। नए नियम के मुताबिक़ परिवार का केवल एक सदस्य NHB की वित्तीय सहायता का लाभ ले सकेगा। यह नियम व्यक्तिगत आवेदन के अलावा HUF, पार्टनरशिप/प्रोपराइटरशिप फ़र्म या कंपनी के निदेशक के रूप में लिए गए लाभ पर भी लागू होगा यानी परिवार के किसी एक सदस्य ने NHB की किसी योजना के तहत सहायता ले ली, तो उसी परिवार का दूसरा सदस्य किसी अन्य NHB योजना या उसी योजना के दूसरे कंपोनेंट के तहत दोबारा सहायता नहीं ले सकेगा।

सब्सिडी की दर भी हुई कम

NHB ने सब्सिडी की अधिकतम सीमा में भी बदलाव किया है। पहले कमर्शियल हॉर्टिकल्चर योजना के तहत परियोजना लागत का अधिकतम 50%, एक परिवार के लिए ₹1 करोड़ तक, सहायता के रूप में दिया जाता था। नए नियमों में सामान्य राज्यों के लिए सब्सिडी घटाकर 35% कर दी गई है, जबकि उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए यह 45% होगी। यह योजना बड़े स्तर पर कमर्शियल हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा देने के लिए है, जिसमें कैप्सिकम, खीरा और टमाटर जैसी सब्ज़ियों के साथ गुलाब, लिलियम और गुलदाउदी जैसे फूलों की खेती शामिल है।

एक परिवार को एक ही बार लाभ

नए नियमों में सब्सिडी की डुप्लीकेसी रोकने के लिए स्पष्ट प्रावधान किया गया है। परिवार के किसी एक सदस्य द्वारा ली गई वित्तीय सहायता को पूरे परिवार द्वारा लिया गया लाभ माना जाएगा यदि कोई आवेदक जानकारी छिपाकर या ग़लत जानकारी देकर सब्सिडी हासिल करता है, तो उससे जारी की गई सहायता राशि ब्याज़ समेत वापस वसूली जा सकती है।

सब्सिडी छोड़ने का विकल्प भी

NHB ने लाभार्थियों के लिए योजना से स्वैच्छिक रूप से बाहर निकलने का प्रावधान भी जोड़ा है। लॉक-इन अवधि के दौरान लाभार्थी पूरी सब्सिडी राशि और लागू ब्याज़ वापस करके योजना से बाहर निकल सकता है। NHB द्वारा रिफंड स्वीकार किए जाने और निर्धारित शर्तें पूरी होने के बाद लाभार्थी को योजना से जुड़ी संबंधित ज़िम्मेदारियों से मुक्त किया जा सकेगा।

बदलाव की पृष्ठभूमि क्या है?

NHB के इन बदलावों को उस विवाद की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी द्वारा 2025 में अपने फ़ार्म के लिए क़रीब ₹99 लाख की सब्सिडी लेने की ख़बर सामने आई थी। बाद में उन्होंने यह राशि सरकार को वापस कर दी थी। NHB के नए नियमों का मक़सद सब्सिडी वितरण को अधिक पारदर्शी बनाना और एक ही परिवार या व्यक्ति को अलग-अलग माध्यमों से बार-बार वित्तीय सहायता मिलने की संभावना को रोकना है।
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