UP NEWS: माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12वीं तक पढ़ाई जाएंगी केवल NCERT की किताबें: स्कूलों की मनमानी पर लगी रोक

Gaon Connection | Apr 07, 2026, 12:42 IST
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के नए सत्र 2026-27 की किताबों को लेकर किए गए नए फैसले के बाद अब माध्यमिक स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही चलेंगी। कक्षा 9 से 12 तक के छात्र अब निर्धारित मूल्य पर ही पुस्तकें खरीद सकेंगे। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर रोक लगा दी गई है। साथ ही नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होगी।
यूपी के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी सिर्फ NCERT की किताबें
यूपी के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी सिर्फ NCERT की किताबें
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में जिला प्रशासन ने माध्यमिक विद्यालयों में महंगी किताबों और फीस के विरोध के चलते एक बड़ा फैसला लिया है। अब जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक केवल एनसीईआरटी की निर्धारित पुस्तकें ही संचालित की जाएंगी। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. रामचंद्र ने सभी माध्यमिक विद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। यदि कोई भी विद्यालय एनसीईआरटी की निर्धारित पुस्तकों के अलावा किसी अन्य निजी प्रकाशक की किताबों से शिक्षण कार्य कराता पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश कक्षा 9 से 12 तक के सभी विद्यालयों पर लागू होगा और इन कक्षाओं की किताबों के दाम भी तय कर दिए गए हैं, ताकि छात्रों को निर्धारित मूल्य पर ही पुस्तकें उपलब्ध हो सकें। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित 36 विषयों की एनसीईआरटी पुस्तकों का ही प्रयोग किया जाएगा।

मंहगी किताबों की जगह अब सिर्फ NCERT की किताबें

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नए सत्र 2026-27 से पहले एक अहम फैसला लिया है, जो सीधे तौर पर पढ़ाई के तरीके को बदलने वाला है। अब स्कूलों में मनमर्जी की किताबें नहीं चलेंगी, बल्कि सिर्फ तय और मंजूर किताबों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। इस फैसले से जहां छात्रों पर गलत या महंगी किताबों का बोझ कम होगा, वहीं पढ़ाई का स्तर भी एक जैसा रखने की कोशिश की जाएगी। बोर्ड के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए इंग्लिश, मैथ्स और साइंस की तय किताबें जरूरी कर दी गई हैं। वहीं कक्षा 11 और 12 के लिए 36 विषयों की किताबें फिक्स की गई हैं। पढ़ाई को बेहतर और एक जैसा बनाने के लिए एनसीईआरटी की करीब 70 किताबों को शामिल किया गया है। इसके अलावा हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की 12 किताबें भी सिलेबस में जोड़ी गई हैं।




महंगी किताबों से मिलेगी मुक्ति

जिला प्रशासन ने निजी प्रकाशकों की किताबों पर पूरी तरह से रोक लगाने का काम शुरू कर दिया है। किसी भी विद्यालय के संचालक ने अगर एनसीईआरटी की किताबों के अलावा अन्य किताबें लेने के लिए किसी भी अभिभावक को कहीं अन्य स्थान पर भेजा तो उस पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। एनसीईआरटी की किताबें सस्ती हैं, जिससे अभिभावकों को इन्हें खरीदने में कोई कठिनाई नहीं होगी साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की बात कही। एनसीईआरटी किताबों को लेकर जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

सस्ती दरों पर मिलेंगी किताबें

इस फैसले का एक बड़ा फायदा ये भी है कि अब छात्रों को किताबें ज्यादा कीमत पर नहीं खरीदनी पड़ेंगी। बोर्ड ने साफ कहा है कि तय किताबें सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएं। इसका खास ध्यान रखा जाएगा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को किसी तरह की दिक्कत न हो। ये नियम सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट सभी स्कूलों पर लागू होगा। स्कूलों में किताबों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए खास कैंप भी लगाए जाएंगे, ताकि छात्र और उनके माता-पिता सही जानकारी पा सकें।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

बोर्ड ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किताबों की छपाई और सप्लाई की जिम्मेदारी तीन एजेंसियों को दी गई है। साथ ही जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों को इसकी निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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