सोलर पंप लगाओ, बिजली बेचो और कमाओ जानिए कैसे ले PM-KUSUM योजना का लाभ
Gaon Connection | Jan 21, 2026, 18:44 IST
डीज़ल की बढ़ती कीमतें और बिजली की कटौती से परेशान किसानों के लिए केंद्र सरकार की PM-KUSUM योजना एक नई उम्मीद है। इस योजना के तहत किसान न सिर्फ सोलर पंप से सस्ती सिंचाई कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर हर महीने कमाई भी कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) देश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित यह योजना धीरे-धीरे पूरे देश में लोकप्रिय हो रही है।
क्या है PM-KUSUM योजना
PM-KUSUM योजना का मकसद साफ है, कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना। इससे किसानों की बिजली की लागत घटती है, सिंचाई भरोसेमंद होती है और ग्रिड को स्वच्छ बिजली मिलती है। सरकार ने इस योजना को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा है, ताकि हर तरह के किसान इसका फायदा उठा सकें।
तीन तरह की सुविधाएं
पहला विकल्प - अपनी जमीन पर सोलर प्लांट: अगर आपके पास बंजर या खाली पड़ी जमीन है, तो आप उस पर 0.5 मेगावाट से 2 मेगावाट तक का सोलर पावर प्लांट लगा सकते हैं। इससे पैदा होने वाली बिजली को आप स्थानीय बिजली कंपनी (DISCOM) को तय रेट पर बेच सकते हैं। यह एक तरह का लंबी अवधि का बिजनेस मॉडल है जिसमें किराया और बिजली बिक्री दोनों से कमाई होती है।
दूसरा विकल्प - सोलर पंप लगाएं: अगर आप अभी डीज़ल पंप चला रहे हैं, तो उसकी जगह सोलर पंप लगा सकते हैं। इससे सिंचाई की लागत में भारी कमी आती है और डीज़ल पर निर्भरता खत्म हो जाती है। यह खासतौर पर दूर-दराज के इलाकों में बेहद फायदेमंद है जहां बिजली नहीं पहुंचती।
तीसरा विकल्प - पुराने पंप को सोलर से जोड़ें: अगर आपके पास पहले से बिजली वाला पंप है, तो उसे सोलर से जोड़ सकते हैं। इससे आप अपनी जरूरत के हिसाब से पानी खींच सकते हैं और बची हुई बिजली ग्रिड में बेच सकते हैं। यह सबसे आसान और सस्ता विकल्प है।
कितनी होगी कमाई?
यह सवाल हर किसान के मन में आता है। PM-KUSUM योजना में कमाई का तरीका बेहद सीधा है। किसान या किसान समूह सोलर प्लांट लगाता है, पहले अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली इस्तेमाल करता है, और बची हुई बिजली को बिजली कंपनी को बेच देता है।
कई राज्यों में 25 साल तक का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) होता है, जिससे हर महीने एक तय रकम मिलती रहती है। यह एक स्थिर और भरोसेमंद आय का जरिया बन जाता है।राजस्थान के कुछ इलाकों में किसान इस योजना से हर महीने 15,000 से 20,000 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। हालांकि यह रकम आपके प्लांट की क्षमता और राज्य की टैरिफ दर पर निर्भर करती है।
सरकार कितनी मदद करती है?
सरकार इस योजना में किसानों की अच्छी-खासी मदद करती है। सोलर पंप लगाने पर 30 फीसदी तक की सब्सिडी केंद्र सरकार देती है, और कुछ राज्य अपनी तरफ से भी सब्सिडी जोड़ते हैं। बाकी पैसे के लिए किसानों को आसान शर्तों पर बैंक लोन मिल जाता है।
इसके अलावा सरकार मान्यता प्राप्त कंपनियों से ही सोलर प्लांट लगवाने की व्यवस्था करती है, ताकि किसानों को तकनीकी दिक्कत न हो। साथ ही बिजली कंपनियों के साथ तय दर पर बिजली खरीद की गारंटी भी दी जाती है।
कैसे करें आवेदन?
योजना में आवेदन करना काफी आसान है। सबसे पहले अपने राज्य की नोडल एजेंसी या ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद आपको यह तय करना होता है कि आप किस तरह की सुविधा लेना चाहते हैं, सोलर प्लांट, सोलर पंप या पुराने पंप को सोलर से जोड़ना।
फिर अपनी जमीन, पंप या बिजली कनेक्शन की जानकारी अपलोड करनी होती है। सब्सिडी मंजूर होने के बाद सरकारी कंपनी लगाती है, और निरीक्षण के बाद आपका प्लांट ग्रिड से जुड़ जाता है। इसके बाद आप बिजली बेचना शुरू कर सकते हैं।
ये दस्तावेज रखें तैयार
आवेदन के समय आपको कुछ जरूरी कागजात चाहिए होंगे:
आधार कार्ड
जमीन के कागजात (खसरा-खतौनी)
बैंक पासबुक या कैंसिल चेक
बिजली कनेक्शन की जानकारी (अगर पुराने पंप को सोलर से जोड़ रहे हैं)
पासपोर्ट साइज फोटो
मोबाइल नंबर और ईमेल
जमीनी हकीकत क्या है?
हर योजना की तरह PM-KUSUM में भी कुछ चुनौतियां हैं। कुछ राज्यों में बिजली कंपनियों की तरफ से भुगतान में देरी होती है। टैरिफ यानी बिजली की कीमत हर राज्य में अलग है, इसलिए कमाई में फर्क आता है। शुरुआती निवेश के लिए पैसे जुटाना भी कई किसानों के लिए मुश्किल होता है। लेकिन जहां किसान समूह या एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) मिलकर काम कर रहे हैं, वहां यह योजना बेहतरीन नतीजे दे रही है। सही मार्गदर्शन और राज्य सरकार के सहयोग से यह एक फायदेमंद बिजनेस मॉडल साबित हो रहा है।