क्या आप भी बिना जमीन के मुर्गी पालन करना चाहते हैं? जानें कैसे संभव है ये सफल बिजनेस!

Gaon Connection | Mar 25, 2026, 14:27 IST
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बिना जमीन के भी मुर्गी पालन को संचालित करना संभव है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। घरेलू मुर्गी पालन एक किफायती विकल्प है जो सही रणनीति के साथ उच्च मुनाफा दे सकता है। छोटे चूजों के लिए तापमान का ध्यान रखें और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के अलावा क्या कुछ सावधानी रखनी है, सब इस आर्टिकल में आपको मिलेंगी।
मुर्गीपालन को बनाएं सफल बिजनेस
मुर्गीपालन को बनाएं सफल बिजनेस
अगर आप मुर्गी पालन करना चाहते हैं लकेिन आपके पास जमीन नहीं, तो मर्गी पालन कैसे होगा? अगर आपके साथ भी ऐसा समस्या आ रही है तो इसका समाधान इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं, जिसके अपना कर आप एक सफल बिजनेस कर सकते हैं। क्योंकि मुर्गी पालन का व्यवसाय कम जगह में भी शुरू किया जा सकता है, जिसे बैकयार्ड मुर्गी पालन कहते हैं।

क्या होता है बैकयार्ड मुर्गी पालन?

यह कम बजट में शुरू होने वाला एक लाभदायक व्यवसाय है, जिसमें केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी के अनुसार, युवा भी रुचि दिखा रहे हैं। भारत में कुल पोल्ट्री आबादी 851.81 मिलियन है, जिसमें बैकयार्ड पोल्ट्री आबादी 317.07 मिलियन शामिल है, जो पिछली जनगणना से 45.8 प्रतिशत अधिक है। भारत अंडा उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जहाँ 2022-23 में कुल 138.38 बिलियन अंडों का उत्पादन अनुमानित है, जो पिछले पांच वर्षों में 33.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

बैकयार्ड मुर्गी पालन में किन बातों का ख्याल रखें?

मुर्गी पालन
मुर्गी पालन
अगर चूजे से मुर्गी पालन की शुरुआत कर रहे हैं तो कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होता है जैसे-बाड़े का तापमान सही रखें और शिकारियों से सुरक्षित रखें। चूजों के बाड़े के फर्श पर चूरा, धान की भूसी, चावल की भूसी, नारियल की भूसी की एक समान 1-2 इंच की परत बिछा देनी चाहिए। जो मुर्गी की बीट की नमी को अवशोषित करता है और सर्दियों में गर्मी और गर्मियों में ठंडक बनाए रखता है। इसे समय-समय पर बदलते रहें। ब्रूडिंग प्राकृतिक या कृत्रिम तरीके से की जा सकती है; पहले में अंडे को सेकर मुर्गी चूजे तैयार करती है, जबकि दूसरे में कृत्रिम तरीके से चूजे तैयार किए जाते हैं।

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छह सप्ताह के बाद वयस्क मुर्गियों का प्रबंधन

दिन के दौरान पक्षियों को चारा खोजने के लिए छोड़ देना चाहिए, जबकि रात में बाड़े में रखना चाहिए। बाहर छोड़ने से पहले उनके लिए साफ पानी की व्यवस्था करें। बाड़ा हमेशा साफ और हवादार होना चाहिए।

ऐसे बनाए मुर्गी बाड़ा

बाड़ा बनाने के लिए बांस, लकड़ी के फट्टे और पॉलिथीन शीट जैसी स्थानीय और कम लागत वाली सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। नमी से बचने के लिए बाड़े को जमीन से कुछ इंच ऊपर, अच्छी जल निकासी वाले क्षेत्र में बनाना चाहिए। प्रत्येक पक्षी के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए ताकि वे आराम से रह सकें। बल्ब जलाकर उजाले का प्रबंध करने से मुर्गियाँ अधिक अंडे देती हैं।

10 मुर्गियों के बाड़े के लिए 4 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 3.5 फीट ऊंचा आयाम सुझाया गया है। इसे जमीन से 1.5-2 फीट ऊपर, 3.5 फीट से 2.5 फीट की ढलान के साथ बनाना चाहिए। साफ पानी और दाना बाड़े के सामने की तरफ और रहने की व्यवस्था पीछे की तरफ होनी चाहिए।

चारा प्रबंधन कैसे करें?

मुर्गियों का चारा
मुर्गियों का चारा
नर्सरी पालन या ब्रूडिंग के तहत शुरुआती छह हफ्तों के दौरान चूजों को मानक चिक स्टार्टर राशन पर पाला जाना चाहिए। दूसरे बढ़ते चरण में, मुफ्त रेंज में उपलब्ध चारे के अलावा, प्राकृतिक भोजन जैसे बेकार अनाज, अंकुरित बीज, शहतूत की पत्तियाँ, अजोला, सहजन की पत्तियाँ और सुबबुल की पत्तियाँ (जो प्रोटीन का उच्च स्रोत हैं) देनी चाहिए।

- खुले में घूमने वाली मुर्गियाँ अपने लिए प्रोटीन का इंतजाम स्वयं कर लेती हैं। इसके अतिरिक्त, उपलब्धता के अनुसार मक्का, ज्वार, बाजरा, टूटे चावल, चावल की पॉलिश या भूसी जैसे अनाज भी दिए जा सकते हैं। पक्षियों के वजन को नियंत्रित करने के लिए छह महीने की उम्र पर दाना सीमित कर देना चाहिए।

- बरसात के मौसम और फसल के समय, कीड़े-मकोड़े और फसलों के छिलके पक्षियों के खाने के लिए पर्याप्त होते हैं। शुष्क मौसम के दौरान, रसोई का बचा हुआ खाना और सरसों की खली का फीड अंडे के उत्पादन और पक्षियों के शरीर के वजन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। सुबह और शाम को मुट्ठी भर अनाज या रसोई से निकले सब्जियों के छिलके देना चाहिए।

- स्थानीय रूप से उपलब्ध फीड फॉर्मूलेशन में 50% अनाज (मक्का, ज्वार, बाजरा, टूटा हुआ चावल), 28% चोकर (चावल की भूसी, गेहूँ की भूसी, तेल रहित चावल की भूसी), 20% भोजन/तिलहनी फसलों की खली (सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी, अलसी, सरसों की खली आदि) और 2% योजक (विटामिन और खनिज मिश्रण) शामिल हो सकते हैं।

ताजा पानी का रखें ख्याल

दिन के समय ताज़ा, साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना चाहिए। यदि पक्षियों को दो दिनों तक पानी नहीं मिलता है, तो वे अंडे देना बंद कर सकते हैं। एक पक्षी अपने शरीर के वजन से दोगुना पानी पी सकता है। अंडा देने के लिए पक्षी को कम से कम 10-15 दिनों की आवश्यकता होती है।

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मुर्गी पालन में टीकाकरण का विशेष ख्याल

टीकाकरण का रखे ध्यान
टीकाकरण का रखे ध्यान
मुर्गी पालन में किसान अक्सर ब्रायलर और लेयर फार्मिंग में टीकाकरण पर ध्यान देते हैं, लेकिन देसी मुर्गी पालन में इस पर कम ध्यान दिया जाता है। हालांकि, देसी मुर्गियों को भी बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीनेशन आवश्यक है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए मारेक रोग, रानीखेत रोग और फाउल पॉक्स जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीका जरूर लगाना चाहिए। आंतरिक परजीवियों से बचाने के लिए पक्षियों को नियमित रूप से कृमि मुक्त करना चाहिए।

पीने के पानी के माध्यम से दवा देते समय, पशु चिकित्सक की सलाह का पालन करना चाहिए कि पानी में कितनी दवा मिलानी है, जिसे चूजे आमतौर पर चार घंटे में पी लेते हैं। अतिरिक्त पानी तभी देना चाहिए जब सारी दवा वाली पानी पी ली जाए। स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचने के लिए पशु चिकित्सकों से सलाह लेते रहना चाहिए।

बर्ड फ्लू के लिए क्यों जरूरी है सतर्कता?

अगर आप मुर्गी पालन करते हैं तो बहुत बार बर्ड फ्लू होने का खतरा भी रहता है। ऐसे में बर्ड फ्लू जैसी बीमारी से मुर्गियों को बचाने के लिए कुछ जरूरी सावधानियाँ भी बरतनी चाहिए। बर्ड फ्लू केवल पशुपालकों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी खतरा बन सकता है। समय पर सूचना और सही निपटान से संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सकता है और बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।मुर्गीपालकों को चाहिए कि वे सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, नियमित निगरानी रखें और किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत संबंधित विभाग से संपर्क करें। जागरूकता और जिम्मेदारी से ही बर्ड फ्लू जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

बर्ड फ्लू वायरस संक्रमित पक्षियों के संपर्क, उनके मल-मूत्र, पंख या बीट के जरिए फैलता है। यदि समय पर रोकथाम नहीं की गई, तो पूरा पोल्ट्री फार्म प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मुर्गी पालकों के लिए जरूरी सावधानियाँ और साफ-सफाई को लेकर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है-

  1. मुर्गियों के संपर्क में आने, पंख या बीट छूने के बाद हमेशा साबुन से हाथ धोएं।
  2. फार्म परिसर में नियमित रूप से सफाई और कीटाणुशोधन (डिसइन्फेक्शन) करें।
  3. बीमार पक्षियों को अलग रखें
  4. यदि कोई मुर्गी बीमार दिखे, तो उसे तुरंत स्वस्थ पक्षियों से अलग कर दें।
  5. असामान्य बीमारी या अचानक मृत्यु की सूचना तुरंत निकटतम पशु चिकित्सालय या जिला पशुपालन पदाधिकारी को दें।
  6. मृत मुर्गियों का सुरक्षित निपटान
  7. मृत मुर्गियों को खुले में कभी न फेंकें।
  8. उन्हें गहरे गड्ढे में डालकर चूना छिड़कें और मिट्टी से अच्छी तरह ढंक दें।
  9. इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है।
  10. बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित करें
  11. पोल्ट्री फार्म में अनावश्यक व्यक्तियों का प्रवेश रोकें।

मुर्गियों की बनाएं डेटा शीट

अलग-अलग पक्षियों के प्रदर्शन की निगरानी के लिए बुनियादी रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है। यह आसान है क्योंकि हर मुर्गी अलग-अलग घोंसलों में अंडे देती है और बैकयार्ड में पाले जाने वाले पक्षियों की संख्या आमतौर पर कम होती है। प्रत्येक मुर्गी की अंडा देने की क्षमता और अंडे सेने के प्रदर्शन पर नज़र रखने से अगली पीढ़ी के उत्पादन के लिए मुर्गियों को चुनने में मदद मिलती है। अंडे के उत्पादन का रिकॉर्ड रखने से किसानों को कम प्रदर्शन करने वाले या सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले पक्षियों की पहचान करने में मदद मिलती है। टीकाकरण और कृमि मुक्ति की जानकारी भी दर्ज की जा सकती है।

बाजार की कर लें समय से पहचान

बिजनेस शुरू करने से पहले बाजार जांचे
बिजनेस शुरू करने से पहले बाजार जांचे


किसान अगर मुर्गी पालन शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें अपने आसपास के बाजार का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अंडे और मांस को अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता है। इसलिए, अपने आसपास की हाट बाजारों का निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है। बैकयार्ड फार्मिंग को बहुत आसान बताया गया है।

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मुर्गी के साथ क्यों पालते हैं गिनी फाउल?

किसानों के लिए मुर्गियों के साथ टर्की या गिनी फाउल का पालन करना और भी फायदेमंद हो सकता है। इन्हें गार्ड बर्ड कहा जाता है, क्योंकि यदि कोई शिकारी आता है तो ये चीखने लगती हैं, जिससे अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

मुर्गी पालन में कहाँ आता है सबसे अधिक खर्च?

मुर्गी पालन में सबसे अधिक खर्च फीड पर होता है। इस मॉडल से एक एकड़ में मुर्गी पालन करने पर मुर्गियों के फीड का खर्च सत्तर फीसदी तक कम किया जा सकता है। छोटे किसानों के लिए यह मॉडल कमाई का एक बेहतर जरिया बन सकता है।

यहाँ से लें जानकारी

केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान और अन्य कई संस्थानों ने बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग के लिए कई प्रजातियाँ विकसित की हैं। इसलिए, हमेशा वैज्ञानिक की सलाह पर ही मुर्गियों की नस्लों का चुनाव करना चाहिए। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान समय-समय पर मुर्गी पालन के लिए प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। यदि आप मुर्गी पालन के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो संस्थान से संपर्क कर सकते हैं। ईमेल: carisupply01@gmail.com, मोबाइल: +91-7417043972 / +91-7500394137।
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