MSP Hike 2026: सूरजमुखी, तिल, सोयाबीन समेत इन फसलों की MSP बढ़ी, जानें कितनी हुई MSP में बढ़ोतरी?

Preeti Nahar | May 13, 2026, 17:10 IST
सरकार किसानों को धान और गेहूं से हटकर सूरजमुखी, सोयाबीन, तिल, मूंगफली और नाइजरसीड जैसी तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। खरीफ सीजन 2026-27 के लिए सूरजमुखी बीज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है।

Kharif Crops for Marketing Season 2026-27: देश में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और आयात पर भारी निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार लगातार तिलहन फसलों को बढ़ावा दे रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसी वजह से सरकार किसानों को धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर सूरजमुखी, सोयाबीन, तिल, मूंगफली और नाइजरसीड जैसी तेलहन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।



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सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी बीज की MSP में

खरीफ सीजन 2026-27 के लिए MSP में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी भी इन्हीं फसलों में देखने को मिली है, जो इस बात का संकेत है कि सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाकर खाद्य तेल आयात को कम करना चाहती है। साथ ही मोटे अनाज और दलहन फसलों को बढ़ावा देकर सरकार किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार लगातार किसानों को धान के अलावा दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।



सरकार के मुताबिक Kharif Crops for Marketing Season 2026-27 में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी बीज की MSP में की गई है।



फसलMSP 2026-27 (₹/क्विंटल)2025-26 MSPMSP में बढ़ोतरी
मूंगफली₹7,517₹7,263₹254
सूरजमुखी बीज₹8,343₹7,721₹622
सोयाबीन₹5,708₹5,328₹380
तिल₹10,346₹9,846₹500
नाइजरसीड₹10,052₹9,537₹515

सरकार क्यों दे रही है मोटे अनाज और तिलहन पर जोर?

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है। इसी वजह से दलहन, तिलहन और मोटे अनाज यानी श्री अन्न की खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं।



  1. पहला, देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना ताकि सिर्फ कुछ सीमित फसलों पर निर्भरता न रहे।
  2. दूसरा, खाद्य तेल और दालों के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना, क्योंकि देश बड़ी मात्रा में खाद्य तेल विदेशों से खरीदता है।
  3. तीसरा, किसानों की आय के स्रोतों को विविध बनाना ताकि उन्हें बेहतर कमाई के अवसर मिल सकें।
  4. इसके अलावा मोटे अनाज पोषण से भरपूर होते हैं और जलवायु परिवर्तन के दौर में कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकते हैं। यही वजह है कि सरकार MSP बढ़ाकर किसानों को इन फसलों की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

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क्या है इस फैसले का मतलब?

खरीफ सीजन शुरू होने से ठीक पहले MSP बढ़ाने का यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। खासतौर पर दलहन, तिलहन, कपास और मोटे अनाज उगाने वाले किसानों को इससे सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि सिर्फ MSP बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, असली चुनौती यह रहेगी कि राज्यों में किसानों से कितनी प्रभावी तरीके से खरीद की जाती है। अगर खरीद व्यवस्था मजबूत रहती है तो यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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