Weather Alert: आलू, गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों को पाले से कैसे बचाएँ?
Preeti Nahar | Jan 13, 2026, 16:29 IST
यूपी कृषि अनुसंधान परिषद ने मौसम के बदलाव के मद्देनजर किसानों को चेतावनी दी है। आगामी दिनों में तापमान में भारी उतार-चढ़ाव और घने कोहरे का अनुमान है, जिससे फसलों और मवेशियों को नुकसान पहुँच सकता है। विशेषकर गेहूं, सरसों, दलहनी फसलों, आलू, टमाटर, मिर्च, और आम के बागों के लिए आवश्यक सावधानियों का जिक्र किया गया है।
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) ने किसानों के लिए मौसम के मिजाज को देखते हुए खास सलाह दी है। 15 जनवरी तक तापमान पहले बढ़ेगा, फिर गिरेगा। अगले दो हफ्ते मौसम सूखा रहेगा, लेकिन कोहरा छा सकता है। इससे आलू जैसी फसलों में बीमारी का खतरा बढ़ेगा और नए बागों व पशुओं को भी दिक्कत हो सकती है।
गेहूं की खेती करने वाले किसान 15 जनवरी तक सिर्फ देर से बोई जाने वाली किस्में ही लगाएं। अगर देर हो जाए तो बीज थोड़ा ज्यादा इस्तेमाल करें। समय पर बोई गई फसल को 20-25 दिन के अंतराल पर पानी देते रहें। अगर गेहूं में जिंक की कमी दिखे तो 5 किलो जिंक सल्फेट और 16 किलो यूरिया को 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। खरपतवार हटाने के लिए बुवाई के 30-35 दिन बाद दवा डालें।
सरसों की फसल को माहू (पेंटेड बग) से बचाने के लिए ऑक्सीडेमेटॉन मिथाइल या डाईमेथोएट का छिड़काव करें। सफेद गेरूई रोग के लिए मेटालेक्जल और मेंकोजेब का मिश्रण इस्तेमाल करें। दलहनी फसलों, खासकर मटर में फूल आते समय पानी जरूर दें और बुकनी रोग से बचने के लिए घुलनशील गंधक का प्रयोग करें। चने में फूल आने से पहले एक बार सिंचाई करें, लेकिन फूल आने पर पानी न दें। चने में कटुआ कीट दिखे तो खेत में पक्षियों के बैठने की जगह बनाएं और क्लोरपाईरीफास का छिड़काव करें।
आलू को पछेती झुलसा से बचाने के लिए मैन्कोजैब या कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें। अगर बीमारी लग गई है तो साईमोक्सेनिल+मेंकोजेब का इस्तेमाल 15-15 दिन के अंतर पर करें। टमाटर और मिर्च को झुलसा से बचाने के लिए 0.2% मैन्कोजेब का छिड़काव करें। छोटे पौधों को ठंड से बचाने के लिए फूस या घास से ढक दें और मिट्टी में नमी बनाए रखें। आम के बागों में अगेती बौर को झुलसा से बचाने के लिए मैन्कोजेब+कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें और गुझिया कीट के लिए ट्री-बैंडिंग तकनीक अपनाएं।
ठंड से पशुओं को बचाने के लिए उन्हें हवादार लेकिन सुरक्षित जगह पर रखें। संतुलित आहार के साथ नमक और गुड़ का घोल दें। 22 जनवरी 2026 से शुरू होने वाले राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत FMD का टीका जरूर लगवाएं। मछली पालकों को सलाह है कि तापमान 15 डिग्री से नीचे जाने पर खाना और खाद देना बंद कर दें। संक्रमण से बचाव के लिए पोटेशियम परमैंगनेट या नमक का छिड़काव करें। किसान अतिरिक्त आय के लिए कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत पंजीकरण कराकर अपने खेतों में पेड़ लगा सकते हैं।