Animal Health in Summer: अप्रैल में पशुपालकों के लिए जरूरी सलाह- गर्मी से बचाव और पशुओं की सेहत पर दें खास ध्यान
Gaon Connection | Apr 05, 2026, 15:00 IST
अप्रैल महीने में बढ़ती गर्मी को देखते हुए पशुपालकों को पशुओं की देखभाल में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय पर पानी, छाया, टीकाकरण और संतुलित आहार उपलब्ध कराकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है, जिससे उत्पादन भी बेहतर बना रहेगा।
गर्मी से पशुओं को बचाएं
अप्रैल महीने में तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, जिसका सीधा असर पशुओं की सेहत और उत्पादन क्षमता पर पड़ता है। अधिक गर्मी के कारण पशुओं में पानी और लवण (मिनरल) की कमी हो सकती है, जिससे उनका चारा कम खाना, दूध उत्पादन में गिरावट और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में पशुपालकों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और उनका उत्पादन प्रभावित न हो।
गर्मी से बचाव के लिए जरूरी है कि पशुओं को दिन के समय छायादार और हवादार स्थान पर रखा जाए। साथ ही, उन्हें दिन में कम से कम तीन से चार बार ताजा और साफ पानी पिलाना चाहिए। इससे पशुओं के शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और वे हीट स्ट्रेस से बच पाते हैं।
इस मौसम में पशुओं को कई संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। भेड़ पालकों को Sheep Pox (भेड़ चेचक) और Enterotoxaemia जैसी बीमारियों के टीके पशु चिकित्सक की सलाह से जरूर लगवाने चाहिए। इसके अलावा, गलाघोंटू और ब्लैक क्वार्टर (लंगड़ी रोग) जैसी बीमारियों से बचाव के लिए भी समय पर टीकाकरण कराना आवश्यक है।
पशुओं में बाहरी और आंतरिक परजीवी (कीड़े) गर्मी के मौसम में तेजी से बढ़ते हैं। इसलिए नियमित रूप से कृमिनाशक दवाओं का उपयोग पशु चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए। साथ ही, बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव भी समय-समय पर करते रहना जरूरी है।
गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए पशुपालकों को ज्वार और मक्का जैसी फसलों की बुवाई करनी चाहिए, जिससे पशुओं को पौष्टिक चारा मिल सके और उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
इस मौसम में पशुओं में खासकर फॉस्फोरस जैसे खनिज तत्वों की कमी देखी जाती है, जिससे ‘पाइका’ जैसी समस्या हो सकती है, जिसमें पशु मिट्टी या अन्य चीजें खाने लगते हैं। इससे बचाव के लिए पशुओं को खनिज मिश्रण (मिनरल मिक्स) देना बेहद जरूरी है, ताकि उनके शरीर में पोषण संतुलन बना रहे।
पशुओं को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज और विटामिन युक्त संतुलित आहार देना चाहिए। अजैला घास जैसे पौष्टिक चारे का उपयोग करने से पशुओं की सेहत में सुधार होता है और उनका दूध उत्पादन भी बढ़ता है। सही पोषण और देखभाल से पशुपालक अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। ये सभी जानकारी पशुपालन सूचना एवं प्रसार कार्यालय, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार द्वारा जारी “पशुपालक कैलेंडर (अप्रैल)” से ली गई है, जिसे जनहित में प्रसारित किया गया है।
ठंडे और हवादार स्थान पर रखें पशु
गर्मी से पशुओं को बचाएं
टीकाकरण और रोगों से बचाव पर ध्यान
समय पर कराएं टीकाकरण
परजीवियों से सुरक्षा और दवाओं का उपयोग
परजीवियों से पशु का बचाव
हरे चारे की व्यवस्था करें
हरा चारा भरपूर खिलाएं
खनिज तत्वों की पूर्ति जरूरी
डाइट का रखें ख्याल