Ramadan: रमज़ान की रौनक और ईद की मिठास के बीच भारत में सेवइयों के अलग-अलग रंग
Gaon Connection | Feb 19, 2026, 10:21 IST
रमज़ान के पाक महीने के बाद जब ईद-उल-फित्र का चांद नजर आता है, तो हर घर में मिठास घुल जाती है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में ईद की खास पहचान बनी है सेवइयों से। कहीं शीर खुरमा, कहीं किमामी, तो कहीं जर्दा और शरबती सेवई। जानिए कैसे एक ही सेवई अलग-अलग इलाकों में अलग स्वाद और परंपरा के साथ पकती है।
रमज़ान की रौनक और ईद की मिठास
Sewai kaise banayein: पूरा रमज़ान रोज़ा, इबादत और सब्र के नाम रहता है। सेहरी और इफ्तार के बीच गुज़रता ये महीना जब ईद-उल-फित्र पर ख़त्म होता है, तो खुशियों का त्योहार दस्तक देता है। ईद की नमाज़ के बाद जब लोग गले मिलते हैं तो घरों में सबसे पहले जो खुशबू आती है, वह होती है मीठी सेवइयों की। भारत में सेवइयाँ सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि रमज़ान और ईद की रिवायत का अहम हिस्सा हैं। आइए जानते हैं देश के अलग-अलग राज्यों में बनने वाली सेवइयों के खास अंदाज़ के बारे में।
महाराष्ट्र समेत कई इलाकों में ईद के दिन शीर खुरमा बनाना खास परंपरा है। ‘शीर’ का मतलब दूध और ‘खुरमा’ का मतलब सूखे मेवों का मिश्रण। इस डिश में फुल क्रीम दूध को गाढ़ा करके उसमें भुनी हुई बारीक सेवई डाली जाती है। फिर काजू, बादाम, पिस्ता, किशमिश, छुहारा और चिरौंजी जैसे मेवे मिलाए जाते हैं। केसर और इलायची इसकी खुशबू को और बढ़ा देते हैं। रमज़ान के बाद ईद की सुबह मेहमानों को सबसे पहले यही शाही मिठाई परोसी जाती है।
उत्तर प्रदेश में ईद-उल-फित्र पर किमामी सेवई का अलग ही जलवा होता है। इसमें सेवइयों को घी में भूनकर एक तार की चाशनी में पकाया जाता है। नारियल, मावा, मखाना और बारीक कटे मेवों का चूर्ण इसमें मिलाया जाता है। हल्का सा ऑरेंज रंग इसे खास पहचान देता है। रमज़ान के पूरे महीने के बाद जब ईद आती है, तो किमामी सेवई की खुशबू घर-घर में मुहब्बत और अपनापन घोल देती है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में शरबती सेवई की परंपरा रही है। इसमें सेवई से दोगुनी मात्रा में चीनी की चाशनी बनाई जाती है, जिससे इसका स्वाद बेहद मीठा और रसीला हो जाता है। पहले यह डिश ईद की खास पहचान हुआ करती थी, लेकिन बदलते वक्त के साथ अब इसकी जगह किमामी सेवई ने ले ली है। फिर भी कई घरों में रमज़ान के बाद ईद पर शरबती सेवई बनाकर पुरानी यादों को जिंदा रखा जाता है।
पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में जर्दा या सूखी सेवई बनाई जाती है। इसमें सेवइयों को घी में भूनकर चाशनी में पकाया जाता है और खाने वाला रंग मिलाया जाता है। ऊपर से काजू, बादाम और खोया डालकर इसे सजाया जाता है। कई घरों में इसे अलग से दूध के साथ भी परोसा जाता है। रमज़ान की इबादतों के बाद ईद की दावत में यह सूखी सेवई अपनी अलग पहचान बनाती है।
हालांकि सेवइयों का जलवा सबसे ज्यादा होता है, लेकिन ईद-उल-फित्र की दावत में शाही टुकड़ा, गुलाब जामुन और खीर जैसी मिठाइयाँ भी खास जगह रखती हैं। रमज़ान के महीने भर की सादगी के बाद ईद का दिन मिठास, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक बन जाता है।