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राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन जैसी योजनाओं की मदद से पिछले कुछ साल में देश में बढ़ रहा तिलहन उत्पादन

Gaon Connection | Feb 04, 2026, 14:46 IST
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देश में तिलहन उत्पादन में आई तेज़ बढ़ोतरी को सरकार ने खाद्य तेल आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम बताया है। कई योजनाओं से किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं और आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश तेज़ हुई है।
कुल मिलाकर तिलहन उत्पादन में आई यह तेजी न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती देती है।
पिछले कुछ साल में देश में तिलहन का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, यह बढ़ोतरी देश को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। क्योंकि भारत अभी भी बड़ी मात्रा में खाद्य तेल आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है।

इसी निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) को मंजूरी दी थी। इस मिशन का मकसद तिलहन उत्पादन बढ़ाना, बेहतर बीज और तकनीक को बढ़ावा देना और किसानों को तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।

किसानों को उचित दाम दिलाने और बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी और आयात शुल्क जैसे उपाय भी लागू कर रही है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) योजना के तहत तिलहनी फसलों की सरकारी खरीद की जाती है, ताकि किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिल सके और उनकी आय सुरक्षित रहे।

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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, तिलहन की खेती का क्षेत्रफल 2023-24 में 301.92 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 304.40 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में तिलहन का उत्पादन भी 2023–24 में 396.69 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 429.89 लाख टन हो गया है।

लोकसभा में कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि तिलहन उत्पादन में यह बढ़ोतरी सरकार की नीतियों, किसानों की मेहनत और बेहतर कृषि प्रबंधन का नतीजा है। उनका कहना है कि आने वाले समय में तिलहन क्षेत्र को और मजबूत किया जाएगा ताकि देश को खाद्य तेल के लिए आयात पर कम निर्भर रहना पड़े और किसानों की आमदनी भी बढ़े।

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