मध्य प्रदेश के इन चार जिलों में ‘बीज से बाजार तक’ का रोडमैप तैयार, हर ब्लॉक में बनेगा बीज ग्राम, 20% तक बढ़ेगा उत्पादन

Gaon Connection | Apr 13, 2026, 17:15 IST
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विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र के किसानों के लिए एक नई योजना शुरू की गई है। यह योजना खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाएगी। इस योजना के तहत बताया गया कि हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनेंगे, दलहन और बागवानी फसलों का विस्तार होगा, किसानों को आधुनिक उपकरण किराए पर मिलेंगे, एफपीओ को मजबूत किया जाएगा। पैक हाउस और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएँ बढ़ेंगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी।
विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास का कृषि रोडमैप हुआ तैयार
विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास का कृषि रोडमैप हुआ तैयार
रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने किसानों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए सीहोर, रायसेन, विदिशा और देवास जिलों का समग्र कृषि रोडमैप जारी किया। इस रोडमैप का उद्देश्य खेती को अधिक लाभकारी, वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाना है। मंत्री ने कहा कि यह केवल कागजी योजना नहीं बल्कि जमीन पर लागू होने वाली रणनीति है।



विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास का कृषि रोडमैप

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्नत कृषि महोत्सव का यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश की कृषि व्यवस्था में सुधार लाने का एक गंभीर प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए कृषि विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। आगे मध्यप्रदेश के सभी जिलों के लिए इसी प्रकार की योजना बनाई जाएगी। इन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि उन्हें जमीन पर लागू किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के समन्वय से किसानों को इसका लाभ पहुंचाया जाएगा, ताकि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।

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हर ब्लॉक में बीज ग्राम, 20% तक बढ़ेगा उत्पादन

योजना के तहत हर ब्लॉक में “बीज ग्राम” विकसित किए जाएंगे, जहाँ किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। यदि प्रत्येक ब्लॉक में करीब 10 गाँवों को बीज ग्राम बनाया जाए, तो उत्पादन में लगभग 20% तक वृद्धि संभव है। इसके साथ ही ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

जल प्रबंधन और फसल विविधीकरण पर जोर

कृषि रोडमैप में जल संरक्षण, जल के कुशल उपयोग और फसल विविधीकरण को प्रमुखता दी गई है। भूजल पर बढ़ती निर्भरता और मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों और बागवानी फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी गई है।

Soil Mobile App से वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा

किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए “सॉइल मोबाइल ऐप” लॉन्च किया गया है। इसके जरिए किसान अपने खेत की मिट्टी की स्थिति जानकर सही मात्रा में खाद का उपयोग कर सकेंगे, जिससे लागत कम होगी और उत्पादन बेहतर होगा।

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क्लीन प्लांट सेंटर और मशीन बैंक की स्थापना

किसानों को उच्च गुणवत्ता और रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराने के लिए क्लीन प्लांट सेंटर और नर्सरी सिस्टम विकसित किए जाएंगे। वहीं मशीन बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए छोटे किसान भी किराए पर आधुनिक कृषि उपकरणों का लाभ उठा सकेंगे।

कोल्ड स्टोरेज और पैक हाउस से मिलेगा बेहतर बाजार

फसल के नुकसान को कम करने और बेहतर कीमत दिलाने के लिए कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया गया। इससे किसानों को अपनी उपज सही समय पर बेचने में मदद मिलेगी।

FPOs और वैज्ञानिक संस्थानों का सहयोग

किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत कर उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक किसानों को जोड़ा जाएगा। साथ ही कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और आईसीएआर संस्थानों के समन्वय से किसानों को निरंतर वैज्ञानिक मार्गदर्शन मिलेगा। कुल मिलाकर, ‘बीज से बाजार तक’ का यह रोडमैप खेती को आधुनिक, टिकाऊ और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
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