संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव ठुकराया, आज फिर होगी बैठक

गाँव कनेक्शन | Jan 21, 2021, 15:52 IST
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संयुक्त किसान मोर्चा की मैराथन मीटिंग के बाद किसान संगठनों ने फैसला लिया कि वो तीनों कानूनों की वापसी और एमएसपी पर कानून लिए बिना घर वापस नहीं जाएंगे। किसान संगठनों और सरकार के बीच आज 11वें दौर की वार्ता है।

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संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव ठुकराया
संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित करने के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। सिंघु बॉर्डर पर देश भर के 500 से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक मैराथन बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने यह फैसला लिया। अब सबकी नजर आज (शुक्रवार) होने वाली सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली 11वें दौर की बातचीत पर टिक गई है। सरकार का यह पूरा प्रयास है कि 26 जनवरी से पहले किसानों और सरकार के बीच चल रही यह टकराव समाप्त हो जाए, लेकिन बृहस्पतिवार के किसान संगठनों के निर्णय के बाद सरकार को एक बड़ा झटका लगा है।

इससे पहले बुधवार, 20 जनवरी को कृषि क़ानूनों को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच दसवें दौर की बातचीत हुई। बातचीत के दौरान केंद्र सरकार ने लचीला रुख अपनाते हुए किसानों के सामने तीनों कृषि कानूनों को अगले डेढ़ साल के लिए स्थगित करने और इन क़ानूनों पर किसान संगठनों की आपत्तियों के निस्तारण के लिए किसान संगठनों और सरकार की एक कमेटी के गठन का प्रस्ताव रखा था। जिस पर किसान संगठनों ने कहा था कि वह गुरुवार को बैठक कर केंद्र सरकार के प्रस्तावों पर कोई निर्णय लेंगे।

किसान संगठनों का कहना है कि उन्होंने सरकार के प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया लेकिन सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि कृषि क़ानूनों को रद्द करने के अलावा सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं मंजूर होगा। 11 बजे से शुरू हुई इस बैठक में पहले आम किसानों से राय ली गई जबकि 2 बजे से देश भर के किसान संगठनों ने आपस में बैठक की।

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बुधवार के बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि सरकार एक-डेढ़ साल तक क़ानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित करने को तैयार है। अब आगे का निर्णय किसान संगठनों को लेना है। हालांकि उन्होंने पूरी उम्मीद जताई थी कि अगली बैठक तक कोई ना कोई नतीजा ज़रूर निकलेगा।

इन तीनों नए कृषि क़ानूनों के क्रियान्वयन को सुप्रीम कोर्ट भी स्थगित कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई एक कमेटी सभी पक्षों के किसान संगठनों (विरोध और पक्ष) और सरकार से बातचीत कर सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। बुधवार को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने साफ किया कि ये कमेटी कृषि क़ानूनों पर कोई फैसला नहीं लेगी, सिर्फ सभी पक्षों से बात कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी।

वहीं 26 जनवरी को किसान संगठनों द्वारा प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। केंद्र सरकार द्वारा दी गई याचिका पर कोर्ट ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र का मामला है और वह इसके लिए निर्णय ले कि वह इस रैली के लिए इजाज़त देती है या नहीं।

वहीं किसान संगठनों ने आज के बैठक के बाद फिर से 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च करने की अपनी बात दुहराई। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया कि हालांकि उन्हें पुलिस के द्वारा दिल्ली में प्रवेश करने की इजाजत नहीं मिली है, लेकिन वे लोग 26 जनवरी को दिल्ली के रिंग रोड पर जरूर ट्रैक्टर मार्च करेंगे। इसके लिए सभी किसान संगठन जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं।

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