Weather Update: बदलते मौसम में गेहूं, चना, सब्जियों और आम की फसलों के बचाव के टिप्स
Gaon Connection | Mar 10, 2026, 11:42 IST
देश के कई हिस्सों में मौसम तेजी से बदल रहा है। किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है। दलहनी, तिलहनी, गेहूं, सब्जी और बागवानी फसलों के लिए सिंचाई और सुरक्षा के उपाय बताए गए हैं। आम के बागों में कीट और रोग से बचाव जरूरी है।
बदलते मौसम में गेहूं, चना, सब्जियों और आम की फसलों के बचाव के टिप्स
देश के कई हिस्सों में मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। कहीं गरज-चमक, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना है तो कहीं तापमान में उतार-चढ़ाव से फसलों पर असर पड़ सकता है। ऐसे हालात में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार जरूरी कृषि कार्य करने और सावधानी बरतने की सलाह दी है, ताकि मौसम के असर से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
इस समय कई राज्यों में चना, मसूर और सरसों जैसी रबी फसलें खेतों में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दलहनी फसलों में फली बनने की अवस्था में हल्की सिंचाई करना फायदेमंद होता है। इससे दानों के विकास पर सकारात्मक असर पड़ता है। वहीं तिलहनी फसलों में समय पर सिंचाई और खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है, जिससे उत्पादन बेहतर हो सके।
आम के बागानों में इस समय मंजर (फूल) आने की अवस्था होती है। इस दौरान कीट और रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। किसानों को सलाह दी गई है कि आम के पेड़ों में उचित कीटनाशक और फफूंदनाशक का छिड़काव करें, ताकि मंजर सुरक्षित रह सके और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
गेहूं की फसल इस समय दाना बनने की अवस्था में है। इस अवस्था में हल्की सिंचाई करना फसल के लिए लाभकारी माना जाता है। साथ ही खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। मौसम के अनुसार सिंचाई का समय तय करना चाहिए ताकि तेज हवा या बारिश के कारण फसल गिरने का खतरा कम हो सके।
बैंगन, टमाटर, मिर्च और अन्य सब्जी फसलों में समय-समय पर सिंचाई करते रहना जरूरी है। खेतों में जलभराव न होने दें और पौधों को सहारा देने की व्यवस्था करें। तेज हवाओं और बारिश की संभावना को देखते हुए पौधों की सुरक्षा के लिए खेतों की निगरानी करते रहें।
प्याज और लहसुन की फसल में नियमित सिंचाई जरूरी है, लेकिन खेत में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। मिट्टी में उचित नमी बनाए रखने से कंदों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
केला, पपीता और अन्य बागवानी फसलों में जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और पौधों के आसपास की मिट्टी को हल्का ढीला रखें। इससे जड़ों तक हवा और नमी का संतुलन बना रहता है। तेज हवा की स्थिति में पौधों को सहारा देना भी जरूरी होता है।
मौसम में बदलाव का असर पशुओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। पशुओं को साफ, सूखा और हवादार स्थान पर रखें। उन्हें साफ पानी उपलब्ध कराएं और चारे की पर्याप्त व्यवस्था रखें। तेज मौसम के दौरान पशुओं को खुले स्थान पर बांधने से बचें।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की ताजा जानकारी लेते रहना किसानों के लिए बेहद जरूरी है। समय पर सिंचाई, पौधों की सुरक्षा और खेत की नियमित निगरानी से मौसम के प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क में रहकर फसल के अनुसार सलाह लेते रहें।
दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए सलाह
आम की फसल के लिए जरूरी प्रबंधन
गेहूं की फसल में सिंचाई और पोषण प्रबंधन
सब्जी फसलों के लिए सावधानी
प्याज और लहसुन की खेती में जरूरी उपाय
बागवानी फसलों में प्रबंधन
पशुपालन करने वाले किसानों के लिए सलाह
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की ताजा जानकारी लेते रहना किसानों के लिए बेहद जरूरी है। समय पर सिंचाई, पौधों की सुरक्षा और खेत की नियमित निगरानी से मौसम के प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क में रहकर फसल के अनुसार सलाह लेते रहें।