Success Story: पोषण वाटिका से सरिता यादव ने रची आत्मनिर्भरता की नई कहानी
Apr 09, 2026, 15:57 IST
उत्तर प्रदेश के सीतापुर की सरिता यादव एक सशक्त महिला की मिसाल बनकर उभरी हैं। उनके कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने और पोषण वाटिका में सब्जियों की खेती करने की प्रेरणादायक कहानी ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है। सरिता ने आज मशरूम, मिलेट्स और सहजन जैसे फसलों की खेती के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि की है।
पोषण वाटिका से आत्मनिर्भरता तक की कहानी-सरिता देवी
सीतापुर जनपद के मछरेटा ब्लॉक के उमरापुर (पोस्ट–गुड़रिया) की निवासी श्रीमती सरिता यादव आज ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और सीखने की इच्छा से न केवल अपने परिवार की आय बढ़ाई, बल्कि अपने क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया।
कृषि विज्ञान केंद्र से ली ट्रेनिंग
सरिता यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके-2, कटिया, सीतापुर) से एक साल पहले प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसके बाद उन्होंने अपने घर पर पोषण वाटिका की शुरुआत की। इस पोषण वाटिका में वे लौकी, कद्दू, तुरई, भिंडी जैसी मौसमी सब्जियों की खेती कर रही हैं, जिससे उनके परिवार को ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं।
उन्होंने खेती में प्राकृतिक एवं जैविक विधियों को अपनाया है। सरिता जी गोबर की खाद, बीजामृत, जीवामृत तथा कम्पोस्ट खाद का उपयोग कर रही हैं। विशेष बात यह है कि वे मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले अपशिष्ट (waste) का उपयोग कम्पोस्ट खाद बनाने में करती हैं, जिससे लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।
इसके साथ ही सरिता यादव मशरूम, मिलेट्स (श्री अन्न) और सहजन (मोरिंगा) की खेती भी कर रही हैं। वे मशरूम और मिलेट्स का वैल्यू एडिशन कर रही हैं, जैसे-मशरूम पाउडर, मशरूम अचार , मिलेट्स से बने उत्पाद इत्यादि इन उत्पादों से उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि सरिता यादव केवल खुद तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने अपने स्वयं सहायता समूह (SHG)की महिलाओं को भी प्रशिक्षित और प्रेरित किया। अब तक वे लगभग 100 से अधिक महिलाओं को पोषण वाटिका अपनाने, मशरूम उत्पादन और मिलेट्स के उपयोग के लिए प्रेरित कर चुकी हैं।
सरिता यादव पोषण वाटिका, मशरूम एवं मिलेट्स को दैनिक आहार में शामिल करने के प्रति जागरूकता फैला रही हैं । उनके प्रयासों से क्षेत्र में सब्जी, मशरूम और मिलेट्स की क्लस्टर आधारित खेती का विकास हो रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय और पोषण स्तर दोनों में सुधार हो रहा है।
आज सरिता यादव न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि एक सशक्त प्रेरक के रूप में भी उभरकर सामने आई हैं। उनकी यह यात्रा दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र से ली ट्रेनिंग
पोषण वाटिका से आत्मनिर्भरता तक की कहानी-सरिता देवी
जैविक विधी से करती हैं खेती
खेती में करती हैं जैविक विधी का इस्तेमाल
मशरूम, मिलेट्स और सहजन से बना रही हेल्दी प्रोडक्ट्स
मशरूम उगाकर बनाए जा रहे हैं प्रोडक्ट्स
100 से अधिक महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
मशरूम और मिलेट्स की क्लस्टर आधारित खेती का विकास
महिलाओं की आय और पोषण स्तर दोनों में हुआ सुधार
ग्रामीण महलिाओं को दी ट्रनिंग
आज सरिता यादव न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि एक सशक्त प्रेरक के रूप में भी उभरकर सामने आई हैं। उनकी यह यात्रा दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।