उत्तर भारत में शीतलहर और घने कोहरे का सबसे सख़्त दौर, IMD का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले 2–3 दिनों तक उत्तर भारत के कई राज्यों में शीतलहर से लेकर गंभीर शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है और अगले 5–6 दिनों तक सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है।
उत्तर भारत इस समय सर्दी के सबसे सख़्त दौर से गुजर रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले 2–3 दिनों तक हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा में शीतलहर से लेकर गंभीर शीतलहर की स्थिति बनी रहने की बहुत अधिक संभावना है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में अगले 5-6 दिनों तक सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है। मौसम विभाग ने साफ कहा है कि इस दौरान जनजीवन, यातायात, स्वास्थ्य और खेती चारों पर असर पड़ना तय है।
पिछले 24 घंटों में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। उत्तराखंड के पंतनगर में दृश्यता शून्य तक पहुंच गई, जबकि अमृतसर, बरेली, बुलंदशहर, हिसार और गंगानगर जैसे शहरों में घना से बहुत घना कोहरा दर्ज किया गया। कोहरे की वजह से सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हुआ है और कई जगहों पर सफ़र जोखिम भरा बना हुआ है। IMD ने लोगों को सुबह और रात के समय यात्रा से बचने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में गंभीर शीतलहर की स्थिति बनी हुई है, जबकि पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में भी शीतलहर का असर देखा जा रहा है। ठंडी हवाओं और गिरते तापमान के कारण दिन में भी ठंड का अहसास बना हुआ है। उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब में गंभीर ठंडे दिन (Severe Cold Day) की स्थिति दर्ज की गई है।
तापमान के आंकड़े सर्दी की तीव्रता को और साफ करते हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों में कई जगह न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में न्यूनतम तापमान सामान्य से 3 से 6 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 0.2°C हिसार (हरियाणा) में रिकॉर्ड किया गया, जो इस सर्दी की गंभीरता को दर्शाता है।
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उत्तराखंड के कई इलाकों में पाला (ग्राउंड फ्रॉस्ट) दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि शीतलहर और पाले का सीधा असर खड़ी फसलों, सब्ज़ियों और बागवानी पर पड़ सकता है। आलू, सरसों, सब्ज़ियां और नर्सरी के पौधों को सबसे ज़्यादा नुकसान का खतरा रहता है। IMD ने किसानों को सलाह दी है कि वे शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई, मल्चिंग और नर्सरी को पॉलीथीन शीट या पुआल से ढकने जैसे उपाय अपनाएं।
राहत की खबर यह है कि IMD के अनुसार अगले 4 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में 3–5 डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद तापमान में बड़े बदलाव की संभावना कम है। मध्य और पूर्वी भारत में भी आने वाले दिनों में ठंड की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने के संकेत हैं, लेकिन फिलहाल सतर्कता बेहद ज़रूरी है।
मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि 19 जनवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके असर से 16 से 21 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है। वहीं 18 से 20 जनवरी के बीच पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
IMD ने चेतावनी दी है कि घने कोहरे और शीतलहर के कारण सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों को खास सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। लंबे समय तक ठंड में रहने से फ्लू, नाक से खून आना और फ्रॉस्टबाइट जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। मौसम विभाग ने गर्म कपड़े पहनने, शरीर को ढककर रखने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने को कहा है।
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