Soil Health: क्या फसल विविधीकरण से बचेगी मिट्टी और पानी की सेहत? कृषि मंत्री ने राज्यसभा में उठाया बड़ा सवाल
Gaon Connection | Mar 28, 2026, 11:43 IST
केंद्रीय कृषि मंत्री ने देश की मिट्टी के स्वास्थ्य और घटते जल स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग और जल बर्बादी के कारण मिट्टी की उपजाऊता खतरे में है।
उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में देश की मिट्टी की सेहत और गिरते जलस्तर पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के बेतहाशा इस्तेमाल और पानी की बर्बादी के कारण कई जगहों पर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है। सरकार किसानों को धान-गेहूं की पारंपरिक खेती से हटाकर दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (श्री अन्न) की ओर ले जाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास कर रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब में पानी के गंभीर संकट पर, जहाँ 75% खेती योग्य भूमि पर धान-गेहूं उगाया जा रहा है, जिससे 80% से अधिक भूजल ब्लॉक डार्क जोन में पहुँच गए हैं, सरकार ने फसल विविधीकरण के लिए 103.75 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में देश की मिट्टी की सेहत और गिरते जलस्तर को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल और पानी की बर्बादी देश के कई हिस्सों में मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को नुकसान पहुंचा रही है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार किसानों को धान और गेहूं की पारंपरिक खेती के बजाय दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसी फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान सांसद सतनाम संधू ने पंजाब की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पंजाब के कुल 40 लाख हेक्टेयर खेती योग्य क्षेत्र में से 75% पर धान और गेहूं की खेती होती है। इस फसल चक्र में पानी की इतनी ज्यादा खपत हो रही है कि प्रदेश के 80% से अधिक भूजल ब्लॉक 'डार्क जोन' में पहुँच गए हैं, यानी वहाँ पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है। कृषि मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए फसलों में विविधता लाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
शिवराज सिंह चौहान ने देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में पंजाब के किसानों के महत्वपूर्ण योगदान की जमकर सराहना की। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मैं पंजाब और वहाँ के किसानों को प्रणाम करता हूं। देश की भूख मिटाने और हमें आत्मनिर्भर बनाने में उनका बड़ा योगदान है।" प्रदूषण के मुद्दे पर किसानों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब के किसान अब पराली प्रबंधन की दिशा में भी बेहतर काम कर रहे हैं।
किसानों को धान की जगह दूसरी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने एक बड़ा बजट आवंटित किया है। साल 2025-26 के लिए पंजाब में फसल विविधीकरण कार्यक्रम के तहत 103.75 करोड़ रुपये की सालाना योजना को मंजूरी दी गई है। इस पैसे का इस्तेमाल उन किसानों की मदद के लिए किया जाएगा जो पानी की ज्यादा खपत वाली धान की फसल छोड़कर मिलेट्स (मोटे अनाज), दालें और तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलें अपनाएंगे।
खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन मिशन चला रही है। इस मिशन के तहत देश के 28 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में मोटे अनाज, जिन्हें 'श्री अन्न' के नाम से भी जाना जाता है, की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। पंजाब में मोटे अनाजों की खेती को विशेष प्रोत्साहन देने के लिए साल 2025-26 के लिए 34.60 लाख रुपये अलग से मंजूर किए गए हैं। इस फंड से किसानों को बीज वितरण, ट्रेनिंग और खेती के नए तरीकों का प्रदर्शन करने में सहायता मिलेगी।
कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले सालों में मोटे अनाजों का उत्पादन और खपत दोनों बढ़ेंगे। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा और खेतों की मिट्टी भी सुरक्षित रहेगी। यह पहल देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब में पानी के गंभीर संकट पर, जहाँ 75% खेती योग्य भूमि पर धान-गेहूं उगाया जा रहा है, जिससे 80% से अधिक भूजल ब्लॉक डार्क जोन में पहुँच गए हैं, सरकार ने फसल विविधीकरण के लिए 103.75 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।