Solar Insect Trap: कीटनाशक का झंझट खत्म! सोलर ट्रैप से 24 घंटे फसल की सुरक्षा, जानिए कैसे बिना रसायन के होगा कीट नियंत्रण?
Gaon Connection | Apr 03, 2026, 14:10 IST
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने सौर कीट ट्रैप विकसित किया है जो बिना किसी रसायन के 24 घंटे तक फसल की सुरक्षा करता है। यह उपकरण सौर ऊर्जा पर निर्भर है, जिससे बिजली की बचत होती है। इसमें विभिन्न तकनीकों का समावेश किया गया है, जो विभिन्न कीटों को प्रभावी ढंग से पकड़ता है।
बिना रसायन कीट नियंत्रण
ICAR Solar Trap: किसानों की फसल खराब होने के कई कारणों में से एक कारण है जिससे लगभग सभी किसान परेशान रहते हैं, वो है कीटों का हमला। कई बार कीटों के हमले से खेतों में तैयार खड़ी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है।किसान बहन-भाई कीटों से फसल को बचाने के लिए कीटनाशकों का उपयोग करते हैं, जो फसल, फल के साथ-साथ खेत की जमीन को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी सोलर यूनिवर्सल कीट ट्रैप विकसित किया है।
यह बिना किसी रसायन के दिन-रात फसलों को कीटों से सुरक्षित रखेगा। यह तकनीक खेतों और अनाज भंडारण दोनों जगहों के लिए उपयोगी है और सौर ऊर्जा से चलने के कारण बिजली की लागत भी बचाएगी। यह यंत्र दिन और रात दोनों समय अपने आप काम कर सकता है। इसे ICAR-Central Institute of Post-Harvest Engineering and Technology, Ludhiana ने बनाया है। यह ट्रैप फसलों और अनाज में लगने वाले कीड़ों को खत्म करने का एक पर्यावरण-अनुकूल तरीका है।
अक्सर जब कीटों का हमला होता है, तो यह उनकी सारी मेहनत और मेहनत पर पानी फेरने का काम करता है। इस प्रकार, ICAR का यह विशेष सोलर कीट ट्रैप 24 घंटे लगातार फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है। यह तकनीक किसानों के लिए पहले से कहीं अधिक फायदेमंद और वरदान साबित हो रही है।
यह सोलर ट्रैप कई खूबियों से लैस है। इसमें एक सोलर पैनल है जो सूरज की रोशनी से बैटरी चार्ज करता है। चार्ज होने के बाद, यह रात में 8 से 12 घंटे तक चल सकता है। यह समय ज्यादातर रात में सक्रिय रहने वाले कीड़ों के लिए सबसे अहम होता है। इस ट्रैप में रंगीन चिपचिपी शीट (नीली और पीली), एक लाइट सोर्स (रोशनी का स्रोत) और कीड़ों को आकर्षित करने के लिए फेरोमोन (गंध) का इस्तेमाल किया गया है। कीड़ों को पकड़ने के लिए पानी के बेसिन और चिपचिपी शीट भी लगी हैं। एक खास लाइट सेंसर सर्किट है जो अपने आप लाइट को चालू और बंद करता है।
ICAR के अनुसार, इसका उपयोग खेत, बगीचे, सब्जी की खेती और अनाज गोदामों सहित हर जगह किया जा सकता है। यह छोटे किसानों से लेकर बड़े स्टोरेज यूनिट तक सभी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसकी ऊंचाई को आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है, जिससे इसे विभिन्न फसलों में आसानी से लगाया जा सके।
इस ट्रैप की एक और खास बात यह है कि इसमें तीसरे पक्ष के छोटे ट्रैप लगाने के लिए आर्म्स (भुजाएं) भी दी गई हैं। यह ट्रैप हल्के लेकिन मजबूत मटेरियल से बना है। इसे कोई भी एक व्यक्ति आसानी से कहीं भी ले जा सकता है, जोड़ सकता है और लगा सकता है। इसके अलग-अलग हिस्से (मॉड्यूलर कंपोनेंट्स) आसानी से फिट हो जाते हैं। इसके लिए किसी खास औजार या ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ती। इसका स्टैंड इसे जमीन में गाड़ने या किसी समतल सतह पर खड़ा करने में मदद करता है। यह घर के अंदर और बाहर दोनों जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह तकनीक कीटनाशकों पर किसानों के खर्च को कम करेगी। कीटनाशकों का अधिक उपयोग लागत बढ़ाता है और फसल पर रसायनों का नकारात्मक प्रभाव डालता है। इस सोलर ट्रैप से कीटनाशकों की आवश्यकता कम होगी, जिससे मिट्टी और पर्यावरण सुरक्षित रहेंगे और फसल की गुणवत्ता बनी रहेगी।
यह ट्रैप धान, बैंगन, गोभी, मिर्च, सरसों, अमरूद, गेहूं, प्याज और हरी मटर जैसी कई फसलों के लिए बहुत असरदार साबित हुआ है। सिर्फ फसलों पर ही नहीं, बल्कि अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों को खराब करने वाले कीड़ों को कंट्रोल करने में भी यह बहुत कारगर है।
इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कीड़ों को आकर्षित करने और पकड़ने के कई तरीके एक साथ जोड़े गए हैं। इस वजह से यह अलग-अलग तरह की फसलों और उन पर लगने वाले कीड़ों के लिए, चाहे वे कहीं भी उगाए या रखे गए हों, बहुत उपयोगी है। यह डिवाइस कीड़ों को कंट्रोल करने का एक ऐसा तरीका है जो पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है और किसानों के लिए भी फायदेमंद। यह कीटनाशकों पर निर्भरता कम करता है और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है।
इस तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट फाइल किया गया है और इसे व्यावसायिक रूप से भी विकसित किया जा चुका है। इसका मतलब है कि यह जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगा और किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
दिन और रात दोनों समय करेगा फसल की रक्षा
एक बार करें चार्ज, 8 से 12 घंटे काम
सौर ऊर्जा कृषि उपकरण
यह सोलर ट्रैप कई खूबियों से लैस है। इसमें एक सोलर पैनल है जो सूरज की रोशनी से बैटरी चार्ज करता है। चार्ज होने के बाद, यह रात में 8 से 12 घंटे तक चल सकता है। यह समय ज्यादातर रात में सक्रिय रहने वाले कीड़ों के लिए सबसे अहम होता है। इस ट्रैप में रंगीन चिपचिपी शीट (नीली और पीली), एक लाइट सोर्स (रोशनी का स्रोत) और कीड़ों को आकर्षित करने के लिए फेरोमोन (गंध) का इस्तेमाल किया गया है। कीड़ों को पकड़ने के लिए पानी के बेसिन और चिपचिपी शीट भी लगी हैं। एक खास लाइट सेंसर सर्किट है जो अपने आप लाइट को चालू और बंद करता है।
एक ही यूनिट, अनेक फायदे
- इसे '3+ traps in one' के नाम से जाना जा रहा है। इसका मतलब यह है कि एक ही यूनिट विभिन्न प्रकार के कीटों पर प्रभावी सिद्ध होगी। इससे किसानों को अलग-अलग किस्म के ट्रैप लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह न केवल समय बचाएगा, बल्कि मेहनत में भी कमी लाएगा।
- इसमें कई विधियों को शामिल किया गया है, जैसे कि लाइट ट्रैप, फेरोमोन, रंग आकर्षण, स्टिकी ट्रैप और पानी ट्रैप। अलग-अलग कीट विभिन्न चीजों की ओर आकर्षित होते हैं, जैसे रोशनी, सुगंध या रंग। इसलिए, यह ट्रैप कई प्रकार के कीटों को आकर्षित करने और उन पर पकड़ बनाने में सक्षम है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
- इस ट्रैप की सबसे बड़ी खासियत इसका 24x7 ऑटो ऑपरेशन है। दिन के समय यह रंग और स्टिकी सिस्टम से कीटों को पकड़ता है। रात में, रोशनी और फेरोमोन सक्रिय हो जाते हैं। सोलर पैनल से चार्ज होने के कारण यह रात में भी आसानी से काम करता रहता है।
हर जगह उपयोगी, हर किसी के लिए फायदेमंद
कीट नियंत्रण नई तकनीक
इस ट्रैप की एक और खास बात यह है कि इसमें तीसरे पक्ष के छोटे ट्रैप लगाने के लिए आर्म्स (भुजाएं) भी दी गई हैं। यह ट्रैप हल्के लेकिन मजबूत मटेरियल से बना है। इसे कोई भी एक व्यक्ति आसानी से कहीं भी ले जा सकता है, जोड़ सकता है और लगा सकता है। इसके अलग-अलग हिस्से (मॉड्यूलर कंपोनेंट्स) आसानी से फिट हो जाते हैं। इसके लिए किसी खास औजार या ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ती। इसका स्टैंड इसे जमीन में गाड़ने या किसी समतल सतह पर खड़ा करने में मदद करता है। यह घर के अंदर और बाहर दोनों जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।
कीटनाशकों पर निर्भरता कम, लागत में बचत
यह ट्रैप धान, बैंगन, गोभी, मिर्च, सरसों, अमरूद, गेहूं, प्याज और हरी मटर जैसी कई फसलों के लिए बहुत असरदार साबित हुआ है। सिर्फ फसलों पर ही नहीं, बल्कि अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों को खराब करने वाले कीड़ों को कंट्रोल करने में भी यह बहुत कारगर है।
जल्द ही बाजार में उपलब्ध
इस तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट फाइल किया गया है और इसे व्यावसायिक रूप से भी विकसित किया जा चुका है। इसका मतलब है कि यह जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगा और किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।