दक्षिण भारत में भारी बारिश, उत्तर भारत में कोहरा और शीतलहर का अलर्ट
Gaon Connection | Jan 10, 2026, 14:54 IST
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण भारत में बंगाल की खाड़ी से जुड़े सिस्टम के कारण भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक घना कोहरा, शीत दिवस और शीतलहर का असर जारी रहेगा।
देश का मौसम इस समय दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखा रहा है। दक्षिण भारत में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब अब कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया है, लेकिन इसके असर से तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अभी भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। वहीं उत्तर भारत के बड़े हिस्से में घना कोहरा, शीत दिवस और शीतलहर की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले कई दिन जनजीवन, यातायात और खेती, तीनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं।
IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा दबाव पश्चिम–उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए उत्तर श्रीलंका तट के पास कमजोर हुआ है, लेकिन इसका असर अभी खत्म नहीं हुआ है। 10 जनवरी को तमिलनाडु के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की बहुत अधिक संभावना है, जबकि 11 जनवरी को भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 10 से 12 जनवरी के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और फसलों को नुकसान का खतरा बना हुआ है।
दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति फिलहाल सुरक्षित नहीं मानी जा रही है। IMD ने बताया है कि 10 जनवरी को दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और तमिलनाडु–पुडुचेरी तटों के पास समुद्र बेहद खराब रह सकता है। तेज़ हवाओं और ऊंची लहरों के चलते मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न जाने की सख़्त सलाह दी गई है।
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दक्षिण में बारिश के बीच उत्तर भारत में सर्दी और कोहरे का दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 5–7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में तथा अगले 1–3 दिनों तक मध्य प्रदेश, उत्तर-पूर्वी भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम के कई हिस्सों में सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार में दृश्यता कई जगह 50 मीटर से भी नीचे दर्ज की गई है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो रहा है।
IMD के अनुसार 10 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम के कुछ हिस्सों में, 10–11 जनवरी को राजस्थान में और 10 से 14 जनवरी के दौरान बिहार में शीत दिवस की स्थिति बनी रह सकती है। वहीं 12 और 13 जनवरी को राजस्थान के कुछ हिस्सों में शीतलहर से लेकर गंभीर शीतलहर चलने की बहुत अधिक संभावना है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, ओडिशा, झारखंड और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में भी शीतलहर का असर देखने को मिल सकता है। उत्तराखंड के कई इलाकों में पाला (ग्राउंड फ्रॉस्ट) दर्ज किया गया है।
तापमान के आंकड़े सर्दी की तीव्रता को साफ दिखा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 1.3°C अमृतसर (पंजाब) में दर्ज किया गया। ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 3–5 डिग्री तक नीचे चल रहा है।
घने कोहरे और शीतलहर के कारण स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ रहे हैं। IMD के अनुसार लंबे समय तक कोहरे में रहने से फेफड़ों पर असर पड़ सकता है और अस्थमा व ब्रोंकाइटिस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ठंड के कारण फ्लू, कंपकंपी और फ्रॉस्टबाइट जैसी समस्याओं का खतरा भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने अनावश्यक यात्रा से बचने, गर्म कपड़े पहनने और विशेष रूप से बुज़ुर्गों व बच्चों का ध्यान रखने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने किसानों के लिए भी अहम चेतावनी जारी की है। दक्षिण भारत में भारी बारिश को देखते हुए तमिलनाडु में पकी हुई धान, मक्का और दलहन फसलों की समय पर कटाई और खेतों से पानी की निकासी पर जोर दिया गया है। वहीं उत्तर और मध्य भारत में शीतलहर और पाले से बचाव के लिए शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई, मल्चिंग और सब्ज़ियों की नर्सरी को ढकने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को पशुओं को ठंड से बचाने के उपाय करने को कहा गया है।
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IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा दबाव पश्चिम–उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए उत्तर श्रीलंका तट के पास कमजोर हुआ है, लेकिन इसका असर अभी खत्म नहीं हुआ है। 10 जनवरी को तमिलनाडु के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की बहुत अधिक संभावना है, जबकि 11 जनवरी को भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 10 से 12 जनवरी के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, यातायात बाधित होने और फसलों को नुकसान का खतरा बना हुआ है।
दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति फिलहाल सुरक्षित नहीं मानी जा रही है। IMD ने बताया है कि 10 जनवरी को दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और तमिलनाडु–पुडुचेरी तटों के पास समुद्र बेहद खराब रह सकता है। तेज़ हवाओं और ऊंची लहरों के चलते मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न जाने की सख़्त सलाह दी गई है।
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दक्षिण में बारिश के बीच उत्तर भारत में सर्दी और कोहरे का दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 5–7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में तथा अगले 1–3 दिनों तक मध्य प्रदेश, उत्तर-पूर्वी भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम के कई हिस्सों में सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार में दृश्यता कई जगह 50 मीटर से भी नीचे दर्ज की गई है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो रहा है।
शीत दिवस और शीतलहर: ठंड और बढ़ेगी
IMD Alert: पहाड़ों में बारिश-बर्फ, यूपी-बिहार में शीत दिवस, कई राज्यों में घना कोहरा
तापमान के आंकड़े सर्दी की तीव्रता को साफ दिखा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 1.3°C अमृतसर (पंजाब) में दर्ज किया गया। ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 3–5 डिग्री तक नीचे चल रहा है।
घने कोहरे और शीतलहर के कारण स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ रहे हैं। IMD के अनुसार लंबे समय तक कोहरे में रहने से फेफड़ों पर असर पड़ सकता है और अस्थमा व ब्रोंकाइटिस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ठंड के कारण फ्लू, कंपकंपी और फ्रॉस्टबाइट जैसी समस्याओं का खतरा भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने अनावश्यक यात्रा से बचने, गर्म कपड़े पहनने और विशेष रूप से बुज़ुर्गों व बच्चों का ध्यान रखने की सलाह दी है।
किसानों के लिए मौसम की दोहरी चुनौती
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