Pollution Alert: किसानों के लिए अलर्ट, पराली जलाने पर कार्रवाई तय, पंजाब–हरियाणा–यूपी को केंद्र का आदेश
Preeti Nahar | Feb 18, 2026, 12:55 IST
हर साल पराली जलाने की ख़बरें आती है जिसे वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार भी ठहराया जाता रहा है। लेकिन साल 2026 में केंद्र सरकार ने उत्तर-प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों सरकारों से गेहूं के डंठल (भूसा) जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उत्तर भारत, विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर, पूरे साल वायु प्रदूषण की समस्याओं का सामना करता है, ऐसे में गेहूं कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाएँ इस प्रदूषण को और गंभीर बना देती है। जानिए किसानों को क्या निर्देश दिए हैं पराली न जलाने के लिए?
Parali Jalaane par kya Jurmana: दिल्ली-एनसीआर में हर साल बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने गेहूं की कटाई से पहले ही सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को साफ निर्देश दिए हैं कि गेहूं की पराली जलाने की एक भी घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने राज्यों से कहा है कि वे अपने-अपने एक्शन प्लान को पूरी गंभीरता से जमीन पर लागू करें, ताकि कटाई के मौसम में हवा दोबारा जहरीली न हो।
पराली जलाने का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जिस गांव या जिले में पराली जलाई जाती है, वहां की हवा भी बुरी तरह प्रभावित होती है। आयोग के मुताबिक गेहूं की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल–मई 2025 के दौरान पंजाब में 10 हजार से ज्यादा, हरियाणा में करीब 1800 और यूपी के एनसीआर जिलों में 250 से अधिक आग की घटनाएं दर्ज की गई थीं।
CAQM ने निर्देश दिया है कि राज्यों को हर गांव के हर खेत की मैपिंग करनी होगी। यह तय किया जाएगा कि पराली का निपटान खेत में ही किया जाएगा, मशीन से किया जाएगा या फिर चारे के रूप में इस्तेमाल होगा। इसके साथ ही हर 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात करने को कहा गया है, ताकि मौके पर निगरानी मजबूत हो सके।
आयोग ने साफ कहा है कि छोटे और सीमांत किसानों को पराली प्रबंधन मशीनें किराए पर मुफ्त दी जाएँ। कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) के जरिए यह व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, मोबाइल ऐप के जरिए मशीनों की उपलब्धता और इस्तेमाल पर नजर रखने को कहा गया है, ताकि कटाई के समय किसानों को परेशानी न हो।
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए हर जिले और ब्लॉक स्तर पर “पराली प्रोटेक्शन फोर्स” बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे। खासतौर पर शाम और रात के समय गश्त बढ़ाने को कहा गया है, क्योंकि कई बार किसान सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए रात में पराली जलाते हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पराली जलाने वालों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (EC) लगाया जाएगा और उसकी वसूली भी सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही गाँव-गाँव जाकर किसानों को जागरूक करने, पराली से होने वाले नुकसान और वैकल्पिक उपायों की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, गेहूं की कटाई शुरू होने से पहले केंद्र सरकार और CAQM यह संदेश देना चाहते हैं कि पराली जलाना अब विकल्प नहीं, बल्कि अपराध माना जाएगा। अगर राज्यों ने समय रहते सख्ती और सहयोग दोनों दिखाए, तो किसानों को नुकसान पहुंचाए बिना हवा को साफ रखा जा सकता है।
पराली जलाने से क्या नुकसान
हर खेत की मैपिंग, हर किसान पर निगरानी
जुर्माना और जागरूकता दोनों पर जोर
छोटे किसानों को मुफ्त मशीनें
पराली प्रोटेक्शन फोर्स और सख्त कार्रवाई
पराली प्रोटेक्शन फोर्स और सख्त कार्रवाई
जुर्माना और जागरूकता दोनों पर जोर
कुल मिलाकर, गेहूं की कटाई शुरू होने से पहले केंद्र सरकार और CAQM यह संदेश देना चाहते हैं कि पराली जलाना अब विकल्प नहीं, बल्कि अपराध माना जाएगा। अगर राज्यों ने समय रहते सख्ती और सहयोग दोनों दिखाए, तो किसानों को नुकसान पहुंचाए बिना हवा को साफ रखा जा सकता है।